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देव दीपावली के बाद बनारस के घाट की सफाई में जुटी BHU छात्राएं

गौरतलब है कि देव दीपावली के इस मौके पर बनारस के 84 घाट और 20 कुंडों पर तकरीबन 51 लाख दीये जलाये गये थे.

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देव दीपावली के बाद बनारस के घाट की सफाई में जुटी BHU छात्राएं

देव दीपावली के बाद बनारस के घाट की सफाई में जुटी BHU छात्राएं

वाराणसी : वाराणसी में देव दीपावली पर पूरी दुनिया से लोग आते हैं. बनारस के 84 घाटों पर जलते इन दीयों की छटा देखते ही बनती है. ऐसा लगता है मानो पूरा स्वर्ग ही धरती पर उतर आया हो. इसी नज़ारे को देखने के लिये पूरी दुनिया से लोग यहां जुटते हैं. जाहिर है जब इतने लोग जुटेंगे और घाटों पर लाखों दिये जलेंगे तो घाट गंदे जरूर होंगे. इन्ही गंदे घाटों की सफाई का बीड़ा उठाया बीएचयू की छात्राओं ने.

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उन्होंने सुबह से ही घाटों पर झाड़ू लगानी शुरू कर दी. दीयों को इकठ्ठा किया और उन्हें गंगा में नहीं बल्कि वहां रखे कूड़ेदान में इकठ्ठा कर बाहर फेंकने का काम किया. सफाई को लेकर उन्होंने नुक्कड़ नाटक कर लोगों को जागरूक भी किया. जैसे जैसे नाटक आगे बढ़ता है इसमें सफाई के हर आयाम आते जाते हैं.  पहले गंगा को मैली न करें. उसके बाद बनारस में पान खा कर थूकने की आदत पर कटाक्ष और अंत में खुले में शौच करने से होने वाले दुष्परिणाम के प्रति जागरूकता जगाई गई. इन लड़कियों की प्रस्तुति इतनी जीवंत थी कि उनका सन्देश दूर तलक जायेगा. नुक्कड़ नाटक कर रही छात्रा शिवांगी कहती हैं कि "कल हमारा बनारस का बहुत बड़ा पर्व था देव दीपावली, जिसको देखने के लिये देश विदेश से लोग आते हैं तो कल हमने यहां की गरिमा देखी, खूबसूरत देखी और आज गंदगी है जिसे हम साफ करने आये हैं और एक नुक्कड़ नाटक कर रहे हैं जिससे लोग जागरूक हों.

नुक्कड़ नाटक के बाद तकरीबन 300 स्टूड़ेंस ने सफाई की. टोली बना कर इन्होंने गन्दगी साफ़ की. छात्राओं की कुछ टोली दिये उठा रही थी तो कुछ झाड़ू लगने के बाद इकठ्ठा हुए कूड़े को बोरी और डालिये में भर कर कूड़े दान में डाल रही थी. इस काम को करने में लड़कियों के अंदर एक अजब सा उत्साह था क्योंकि इन्हें लग रहा था कि अगर ये गन्दगी समय रहते नहीं साफ़ हुई तो ये गंगा में जायेंगी और उन्हें और मैली करेंगी.

 छात्रा स्वेता सिंह चन्देल उत्साह में बताती हैं कि कल जो देखता तो लगता कि धरती का स्वर्ग यहीं पर है लेकिन जब आज हम देखने आये तो देखने लायक था कि कैसे कूड़ा करकट दिया सब फेंका हुआ था. हम इस भव्यता को वापस लाने के लिए यहां आये हैं. कम से कम हम कुछ योगदान दे सकें हमारी जो सुंदरता है गंगा मइया की सुंदरता है उसे बरकरार रख सकें.

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गौरतलब है कि देव दीपावली के इस मौके पर बनारस के 84 घाट और 20 कुंडों पर तकरीबन 51 लाख दीये जलाये गये थे. इसमें 50 हज़ार लीटर तेल की खपत होने की संभावना है. इसके लिये 100 से ज़्यादा समितियां लगी हुई थीं. कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए 10 हज़ार से ज़्यादा वालेंटियर भी घाट पर तैनात थे और इस नज़ारे को अपने कैमरे और जेहन में क़ैद करने के लिये लाखों लोग आये थे. प्रशासन का कहना है कि इस साल दुगने से ज़्यादा लोग आये थे. लिहाजा घाट के साथ गलियों के शहर बनारस में भी गन्दगी हुई जिसे साफ़ करने के लिये बड़े स्तर पर काम करने की बात कही जा रही है.


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