गोरखपुर हादसा : ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत का मामला, डॉक्टर कफील को भी एसटीएफ ने किया गिरफ्तार

बीआरडी कॉलेज में 100 बेड वार्ड के इंचार्ज डॉक्टर कफील को यूपी एसटीएफ ने आज सुबह गोरखपुर से गिरफ्तार किया है.

गोरखपुर हादसा : ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत का मामला, डॉक्टर कफील को भी एसटीएफ ने किया गिरफ्तार

डॉक्टर कफील ( फाइल फोटो )

खास बातें

  • एसटीफ ने किया है गिरफ्तार
  • डॉक्टर कफील पर हैं कई धाराएं दर्ज
  • कॉलेज के प्रिंसपल और पत्नी न्यायिक हिरासत में
लखनऊ :

गोरखपुर के बीआरडी कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से 30 बच्चों की मौत के मामले में डॉक्टर कफील को भी गिरफ्तार कर लिया गया है. बीआरडी कॉलेज में 100 बेड वार्ड के इंचार्ज डॉक्टर कफील को यूपी एसटीएफ ने आज सुबह गोरखपुर से गिरफ्तार किया है. उनके खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में आईपीसी की धारा 409, 308, 120 बी, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के सेक्शन 8, इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 के सेक्शन 15, सूचना तकनीकी अधिनियम सन 2000 के सेक्शन 66 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था. तब से वह फरार चल रहे थे. उनके ऊपर बच्चों की मौत में गैरजिम्मेदारी बरतने, निजी प्रैक्टिस न करने का झूठा हलफानामा देने गबन करने और साजिश के आरोप हैं.

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प्रदेश सरकार ने बीते अगस्त के महीने में गोरखपुर में 36 घंटों में हुई 30 बच्चों की मौत के मामले में गोरखपुर के डीएम और प्रदेश के मुख्य सचिव राजीव कुमार को जांच का जिम्मा सौंपा था. डीएम की रिपोर्ट में तो डॉक्टर कफील के ऊपर उंगली नहीं उठाई गई थी. लेकिन मुख्य सचिव की रिपोर्ट में मेडिकल कॉलेज के प्रिंसपल डॉक्टर राजीव मिश्रा, उनकी पत्नी डॉक्टर पूर्णिमा शुक्ला और एनस्थीसिया विभाग के अध्यक्ष ड़ॉक्टर सतीश, 100 बेड वार्ड के इंचार्ज डॉक्टर कफील सहित 9 लोगों का इसका जिम्मेदार बताया था. आरोपियों पर एफआईआर होने के बाद से सभी फरार चल रहे थे. पिछले मंगलवार को एसटीएफ ने कॉलेज प्रिंसपल और उनकी पत्नी को कानपुर से गिरफ्तार किया था. पूछताछ के बाद गुरुवार को उनको जेल भेज दिया गया. एसटीएफ डॉक्टर को कफील को अब मामले की जांच कर रहे सिविल पुलिस के एनक्वाइरी ऑफिसर को सौंप देगी. वह उनसे आगे की पूछताछ करेंगे.

वीडियो : क्यों हो रही हैं बच्चों की मौतें
वहीं चौंकाने वाली बात यह है कि गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में बड़े पैमाने पर बच्चों की मौत का सिलसिला अभी भी जारी है. बीते अगस्त महीने में ही यहां भर्ती 418 बच्चों की मौत हो चुकी है यानी औसतन 13 से 14 रोजाना बच्चे यहां मौत के मुंह में समा गए. 30 अगस्त की रात 12 बजे से 31 अगस्त की रात 12 बजे तक 19 बच्चों की मौत हुई. वहीं अगस्त के आखिरी 120 घंटों में यहां 95 बच्चे मर गए. यह आंकड़े दहलाने वाले हैं. सरकार ने जिला प्रशासन से इस पर रिपोर्ट भी मांगी है.

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