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उत्तर प्रदेश : 'ट्रैक योर बस' ऐप डाउनलोड करें और एक क्लिक से जानें बस की लोकेशन

उत्तर प्रदेश में परिवहन निगम ने एक मोबाइल एप्लीकेशन जारी किया है, जिससे यात्री अपनी बस की वास्तविक भौगोलिक स्थिति के बारे में जान सकेंगे.

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उत्तर प्रदेश : 'ट्रैक योर बस' ऐप डाउनलोड करें और एक क्लिक से जानें बस की लोकेशन

प्रतीकात्मक फोटो

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में वाहनों में ओवरलोडिंग पर रोक लगाने के लिये डिजिटल और सेटेलाइट प्रौद्योगिकी का इस्तेमाल किया जाएगा. साथ ही परिवहन निगम ने एक मोबाइल एप्लीकेशन जारी किया है, जिससे यात्री अपनी बस की वास्तविक भौगोलिक स्थिति के बारे में जान सकेंगे. प्रदेश के परिवहन मंत्री स्वतंत्रदेव सिंह ने शुक्रवार को यह जानकारी दी.  सिंह ने बताया कि उनके विभाग ने बसों को निर्धारित मार्ग से इतर अवैध रूप से ले जाने और उन्हें मनमाने तरीके से ढाबों पर रोकने की प्रवृत्ति को समाप्त करने के लिये एक मोबाइल एप्लीकेशन शुरू किया है. 'ट्रैक योर बस' नामक इस एप्लीकेशन के जरिये राज्य सड़क परिवहन निगम की बस में यात्रा करने वाला कोई भी मुसाफिर यह जान सकेगा कि उसकी बस कहां पर है और वहां उसे रकना चाहिये या नहीं.

बताया कि राज्य सरकार ओवरलोडिंग रोकने के लिये डिजिटल और सेटेलाइट प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल के बारे में गम्भीरता से विचार कर रही है. बहरहाल, सरकार बनने के बाद से ओवरलोडेड वाहनों पर सख्त कार्रवाई शुरू की गई है.

उन्होंने बताया कि अब तक 18 हजार 112 ओवरलोडेड वाहनों के खिलाफ कार्वाई करके उनसे जुर्माने के तौर पर 23 करोड़ रुपये वसूले गए हैं. प्रदेश में क्षमता से ज्यादा भरे वाहनों का प्रवेश रोकने के लिये सरकार 'गुजरात पैटर्न' के अध्ययन पर विचार भी कर रही है. सिंह ने बताया कि ओवरलोडिंग पर भारी जुर्माना वसूले जाने से परिवहन विभाग की आमदनी भी 10 करोड़ से बढ़कर 14 करोड़ रुपये हो गयी है. उन्होंने बताया कि परिवहन विभाग ने यात्रियों से सम्पर्क बनाने के लिये ट्विटर और फेसबुक पर भी अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है. इनके जरिये रोजाना लगभग 100 शिकायतों का समाधान किया जाता है.

परिवहन मंत्री ने बताया कि उनके विभाग ने राज्य के 73 डिपो में आटोमेटेड फ्यूल मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया है. इससे डीजल के भण्डारण तथा वितरण तंत्र की स्थिति बेहतर हुई है. साथ ही इससे डीजल की चोरी की सम्भावना भी समाप्त हो गयी है. उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय राजमार्गो पर पथकर के भुगतान के लिये बसों में रैपिड फ्रीक्वेंसी आईडेंटिफिकेशन टैग लगाए जा रहे हैं. इससे बसों को टोल प्लाजा पर रकना नहीं पड़ेगा और गति में होने के बावजूद एक मशीन के जरिये उनके टैग से स्कैन करके पथकर का भुगतान हो जाएगा. सिंह ने बताया कि परिवहन निगम की बसें उन 3725 गांवों में भी परिवहन सेवा दे रही हैं, जो अब तक इससे महरूम थे.

उन्होंने कहा कि हाल में उत्त्र प्रदेश और राजस्थान के परिवहन निगमों के बीच हुए करार से साढ़े तीन करोड़ यात्रियोंको लाभ होगा. बिहार, हरियाणा, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, झारखण्ड, मध्य प्रदेश, दिल्ली और उत्तराखंड राज्यों से भी ऐसे ही समझौते होने की उम्मीद है. परिवहन मंत्री ने कहा कि बुंदेलखंड की धार्मिक महत्ता को देखते हुए उसके ऐसे क्षेत्रों को बसों से जोड़ा जाएगा, जहां रेल की सुविधा उपलब्ध नहीं है.

पूर्ववर्ती सपा सरकार के कार्यकाल में शुरू हुई 'लोहिया ग्रामीण बस सेवा' को समाप्त किये जाने की सम्भावना के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि वह कोई नयी बस सेवा शुरू कर सकते हैं, लेकिन फिलहाल लोहिया बस सेवा को खत्म करने का कोई विचार नहीं है.


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