NDTV Khabar

बर्बादी की कगार पर फर्रुखाबाद बसाने वाले नवाब बंगश का मकबरा, वारिस जी रहे मुफलिसी की जिंदगी

फर्रुखाबाद शहर में मोहम्मद खान बंगश के अलावा काबुल के नवाब और बंगश परिवार के भी कई मकबरे हैं.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
बर्बादी की कगार पर फर्रुखाबाद बसाने वाले नवाब बंगश का मकबरा, वारिस जी रहे मुफलिसी की जिंदगी

300 साल से भी ज्यादा पुराना है नवाब मोहम्मद बंगश का मकबरा

फर्रुखाबाद शहर को बसाने वाले नवाब बंगश खान की ऐतिहासिक विरासत धीरे-धीरे मलबे में तब्दील हो रही है. बंगश खान की पुरातात्विक धरोहरें ही नहीं बल्कि नवाब के वंशज भी आज मुफलिसी की जिंदगी जीने को मजबूर हैं. 
मुगल शासक फरुखशियर के नाम पर फर्रुखाबाद शहर को बसाने वाले मोहम्मद खान बंगश का शहर में बना मकबरा पुरातत्व विभाग के अधीन है लेकिन मकबरे के आसपास शराबी और जुआरियों ने अड्डा बना रखा है और नवाब बंगश खान की कब्र बच्चों के खेलने के काम आ रही है. कुछ साल पहले  तीन सौ साल पुराने इस मकबरे की गुंबद को बचाने के लिए पुरातत्व विभाग ने यहां कुछ काम करवाया था लेकिन उसके बावजूद इस ऐतिहासिक मकबरे का बड़ा हिस्सा जमींदोज़ हो चुका है.

cl3bed0g

फर्रुखाबाद शहर में मोहम्मद खान बंगश के अलावा काबुल के नवाब और बंगश परिवार के भी कई मकबरे हैं लेकिन कुछ मिट्टी में मिल चुके हैं तो कुछ पर भूमाफियाओं ने कब्जा कर लिया है.  नवाब मोहम्मद खान बंगश के वंशज काजिम हुसैन खान बंगश बताते हैं कि वे हर साल अनुरोध करते हैं कि इसकी बाउंड्री करवा दी जाए. यहां असमाजिक तत्व बैठे रहते हैं. जुआ खेलते हैं और शराब पीते रहते हैं. उन्होंने कहा कि ये फर्रुखाबाद के लिए पिकनिक स्पॉट हो सकता है. लोग इसे देखने आएंगे और पहचानेंगे कि ये फर्रुखाबाद के संस्थापक है. 


यह भी पढ़ें: फर्रुखाबाद की ढहती विरासत और सियासी समीकरण का हाल

नवाब बंगश खान से जुड़ी ऐतिहासिक विरासत ही नहीं उनके वारिस भी बदहाली के शिकार है. नवाब बंगश खान की 11 वीं पीढ़ी के वारिस काजिम हुसैन खान बंगश काशीराम आवास योजना के मकान में अपने बेटे और बहू के साथ रहते हैं. एक डाक्टर के यहां पर्चा बनाकर किसी तरह अपने परिवार का गुजर बसर कर रहे हैं. 
स्वतंत्रता आंदोलन में हिस्सा लेने के चलते इनके तीन परदादाओं को फांसी दे दी गई और एक को देश निकाला दे दिया गया था. 

73oq5f3g

काजिम कहते हैं कि हम भी आज नवाबों की तरह रहते लेकिन हमारी सबसे बड़ी गलती आजादी के आंदोलन में भाग लेना था. काजिम हुसैन ने कहा, 'हमारी यही अच्छाई या गलती समझ लीजिए कि हम अंग्रेजों से लड़े और हम तबाह हो गए. हमारे तीन परदादाओं को फांसियां हुई एक को मुल्क बदर कर दिया गया और सारी जमीन जायदाद हमारी जब्त कर ली गई.' उन्होंने  कहा कि जो देश के लिए कभी नहीं लड़े कलकत्ता संग्राम या मेरठ में कभी भाग नहीं लिया वे आज नवाबों की जिंदगी जी रहे हैं और हम छोटी सी नौकरी करके गुजर बसर कर रहे हैं.

तीन सौ साल पहले फर्रुखाबाद को बसाने वाले मोहम्मद खान बंगश और उनके वंशजों के यहां बीस मकबरे हैं. लेकिन सब मिट्ठी के ढेर में तब्दील हो रहे हैं. कुछ दिन बाद आने वाली पीढ़ी फर्रुखाबाद को बसाने वाले मोहम्मद खान बंगश और अंग्रेजों से लड़ते-लड़ते अपने को खत्म करने वाले उनके वारिसों के बारे में शायद कभी नहीं जान पाएगी.

टिप्पणियां

वीडियो: बदहाली का शिकार फर्रुखाबाद बसाने वाले नवाब का मकबरा



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement