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योगी आदित्यनाथ के पक्ष में रही ये 5 बातें, जिसके चलते वे बने यूपी के मुख्यमंत्री

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योगी आदित्यनाथ के पक्ष में रही ये 5 बातें, जिसके चलते वे बने यूपी के मुख्यमंत्री

योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे हैं.

खास बातें

  1. पूर्वांचल की 60 से अधिक सीटों पर आदित्यनाथ का दबदबा है
  2. राजनाथ सिंह के सीएम रेस से हटने के बाद योगी की दावेदारी हुई मजबूत
  3. कट्टरवादी हिंदु नेता की छवि के चलते सीएम चुने गए योगी
गोरखपुर: योगी आदित्यनाथ उत्तर प्रदेश के अगले मुख्यमंत्री बनेंगे. 11 मार्च को मतगणना के बाद यूपी के सीएम की रेस में मनोज सिन्हा, दिनेश शर्मा, राजनाथ सिंह सहित कई नाम चल रहे थे, लेकिन आखिरकार बीजेपी के संसदीय बोर्ड ने योगी आदित्यनाथ की नाम पर मुहर लगा दी. ऐसे में हर किसी के जेहन में सवाल उठना लाजमी है कि आखिर वो क्या वजह रही जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने आदित्यनाथ को इस महत्वपूर्ण पद के लिए चुना. आइए जानें वो कौन से 5 फैक्टर आदित्यनाथ के पक्ष में रहे, जिसके चलते उन्हें देश के सबसे बड़े प्रदेश यानी उत्तर प्रदेश के सिंहासन संभालने का मौका मिला.

1. हिंदुत्ववादी नेता :  आदित्यनाथ की छवि कट्टर हिंदू नेता की है. बीजेपी के इस बार के विधानसभा चुनाव प्रचार पर नजर डालें तो नेताओं से लेकर चुनावी घोषणा पत्र तक में पार्टी ने हिंदुत्व लाइन को फॉलो किया था. खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने श्मशान, कब्रिस्तान जैसे मुद्दे को छेड़ा था. बीजेपी के स्टार प्रचारकों में योगी आदित्यनाथ इकलौते ऐसे नेता रहे जिन्होंने सभी चुनावी भाषणों में अखिलेश यादव के विकास कार्यों को हिंदू-मुस्लिम का रंग देते रहे.

2. बीजेपी को स्पष्ट बहुमत: 90 के दशक में बीजेपी को जब स्पष्ट बहुमत मिला था तो कल्याण सिंह जैसे कट्टर हिंदुत्ववादी नेता को मुख्यमंत्री बनाया गया था. 2017 में एक बार फिर से बीजेपी को प्रचंड बहुमत (325 सीटें) मिला है. इस वक्त उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व के सबसे बड़े चेहरे आदित्यनाथ हैं. ऐसे में पीएम मोदी और अमित शाह ने एक बार फिर से कट्टर हिंदुत्ववादी नेता को मुख्यमंत्री बनाया है.

3. पूर्वांचल पर पीएम की नजर: 2014 का लोकसभा चुनाव हो या 2017 का विधानसभा चुनाव, दोनों बार पूर्वांचल की जनता ने बीजेपी को दिल खोलकर वोट दिए. आदित्यनाथ पूर्वांचल के सबसे बड़े नेता हैं. खुद प्रधानमंत्री भी इसी क्षेत्र से सांसद हैं. ऐसे में पूर्वांचल पर बीजेपी का ज्यादा ध्यान है. इस हिसाब से आदित्यनाथ की दावेदारी मजबूत थी.

4. लंबा राजनीतिक अनुभव: महज 26 साल की उम्र में सांसद बने योगी आदित्यनाथ लगातार पांच बार से लोकसभा का चुनाव जीत रहे हैं. गोरखुपर सीट से 2014 में योगी तीन लाख से भी अधिक वोटों से जीते थे. 2009 में भी वे दो लाख से भी अधिक वोटों से जीत हासिल की थी. पूर्वांचल की 60 से अधिक सीटों पर योगी का दबदबा माना जाता है.

5. राजनाथ सिंह का नाम वापस लेना: उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की रेस में जितने भी नाम चल रहे थे, उनमें केवल गृहमंत्री राजनाथ सिंह का ही कद आदित्यनाथ से बड़ा था. राजनीति के जानकार कहते हैं कि योगी आदित्यनाथ केवल राजनाथ सिंह के मुख्यमंत्री बनने पर ही शांत रह सकते थे. राजनाथ सिंह का मुख्यमंत्री पद के लिए नाम वापस लेने के बाद आदित्यनाथ सबसे मजबूत दावेदार बन गए.


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