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रियल इस्टेट फर्म आम्रपाली में फ्लैट बुक कराने वाले 100 से अधिक खरीददार पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

खरीददारों का अनुरोध है कि उन्हें भी बैंकों और वित्तीय संस्थानों की तरह ही सुरक्षित देनदार माना जाये.

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रियल इस्टेट फर्म आम्रपाली में फ्लैट बुक कराने वाले 100 से अधिक खरीददार पहुंचे सुप्रीम कोर्ट

फाइल फोटो

नई दिल्ली: रियल इस्टेट फर्म आम्रपाली   में फ्लैट बुक कराने वाले एक सौ से अधिक खरीददारों ने आज अपने हितों की रक्षा की गुहार लगाते हुये सु्प्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. इन खरीददारों का अनुरोध है कि उन्हें भी बैंकों और वित्तीय संस्थानों की तरह ही सुरक्षित देनदार माना जाये. उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में आम्रपाली सेन्चूरियन पार्क-लो राइज परियोजना, आम्रपाली सेन्चूरियन पार्क-टेरेस होम्स और आम्रपाली सेन्चूरियन पार्क-ट्रापिकल गार्डन परियोजना में फ्लैट खरीदने वालों को न तो अभी तक घर मिले हैं और न ही इनमे निवेश की गयी उनकी गाढ़ी कमाई ही वापस मिली है. इन परियोजनाओं में चरणबद्ध तरीके से करीब 40 टावरों में पांच हजार से अधिक फ्लैट का निर्माण होना था. 

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नयी याचिका बिक्रम चटर्जी और 106 अन्य खरीददारों ने दायर की है. इसमें आम्रपाली सिलकन सिटी प्रालि को दिवालिया घोषित करने के लिये बैंक आफ बड़ौदा के मामले में नेशनल कंपनी ला ट्रिब्यूनल का आदेश निरस्त किया जाये. ट्रिब्यूनल ने चार सितंबर को बैंक आफ बडोदा की याचिका पर इस फर्म के खिलाफ दिवालिया घोषित करने संबंधी कानून के तहत कार्रवाई शुरू करने का आदेश दिया था. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल में रियल इस्टेट फर्म के खिलाफ दिवालिया घोषित करने की कार्रवाई शुरू होने के बाद धन वसूलने के लिये दीवानी अदालतों की डिक्री और उपभोक्ता आयोग के आदेशों पर अमल नहीं हो सकता है.

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याचिका में अनुरोध किया गया है कि घर खरीदने वालों को बैंकों और वित्तीय संस्थानों के समकक्ष माना जाये या दिवालिया संहिता के प्रावधानों को समता और जीवन के अधिकार जैसे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करने वाला करार दिया जाये.


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