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गायत्री प्रजापति मामला : पुलिस पर पीड़ित की बहनों को परेशान करने का आरोप

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गायत्री प्रजापति मामला : पुलिस पर पीड़ित की बहनों को परेशान करने का आरोप

गायत्री प्रजापति मामले में पीड़ित के वकील ने पुलिस पर पीड़ित की बहनों को परेशान करने का आरोप लगाया है.

खास बातें

  1. मंत्री गायत्री प्रजापति को कैबिनेट में रखने पर राज्यपाल ने उठाए सवाल
  2. पीड़ित परिवार का यूपी पुलिस पर दबाब बनाने और परेशान करने का आरोप
  3. पुलिस कर्मी पीड़ित की बहनों से कॉलेज में जाकर गलत सवाल पूछ रहे
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मंत्री गायत्री प्रजापति 27 फरवरी के बाद कहां हैं, इसका यूपी पुलिस के पास कोई जबाब नहीं हैं. कहने को तो उनके खिलाफ शनिवार को गैरजमानती वारंट भी जारी हुआ, उनका पासपोर्ट चार हफ्ते के लिए रद्द कर दिया गया और लुक आउट नोटिस जारी कर उनके विदेश भागने के रास्ते भी बंद कर दिए गए हैं, लेकिन मंत्री का कुछ पता नहीं है. उधर रेप पीड़ित लड़की के परिवार ने आरोप लगाए हैं कि यूपी पुलिस उन पर दबाब बना रही है और उन्हें परेशान कर रही है. गायत्री प्रजापति की तरफ से इन आरोपों को खारिज किया गया है.

पीड़ित के वकील महमूद प्राचा के मुताबिक ''पुलिस कर्मियों द्वारा पीड़ित की बहनों से कॉलेज में जाकर गलत सवाल पूछे जा रहे हैं. पीड़ित परिवार को धमकाया जा है. हम सुप्रीम कोर्ट में ये सारी बातें रखेंगे.''

पीड़ित लड़की और उसकी मां का आरोप है कि पिछले साल अक्टूबर से वह लगातार यूपी में थानों से लेकर डीजीपी के ऑफिस तक चक्कर लगा चुकीं हैं, लेकिन पुलिस ने केस तक दर्ज नहीं किया. अब सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद केस दर्ज हुआ तो मंत्री जी फरार हो गए. हालांकि मंत्री फरार रहकर भी सुप्रीम कोर्ट में गिरफ्तारी से बचने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं. इस पर सोमवार को सुनवाई होगी.

गायत्री प्रजापति के वकील जय बंसल के मुताबिक ''प्रजापति को झूठा फंसाया गया है. महिला के आरोप गलत है, हम अपनी पूरी बात सुप्रीम कोर्ट में रखेंगे.'' गायत्री प्रजापति और उसके 6 साथियों पर चित्रकूट की महिला से दुष्कर्म और उसकी बेटी के साथ छेड़खानी के आरोप लगाए हैं.

गायत्री प्रजापति मामले में सोमवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है. यूपी के राज्यपाल राम नाईक ने भी प्रजापति को कैबिनेट में रखने पर मुख्यमंत्री से जवाब तलब किया है. उन्होंने पत्र लिखकर पूछा है कि गायत्री प्रजापति पर इतने गंभीर आरोप लगे हैं, ऐसे में उन्हें कैबिनेट में रखने का क्या औचित्य है?

गायत्री प्रजापति को सुप्रीम कोर्ट से राहत मिले न मिले लेकिन उन्हें इस बात की पूरी उम्मीद है कि 11 मार्च के नतीजे अगर उनकी पार्टी के पक्ष में आए तो शायद वे कानूनी शिकंजे से बच जाएं.


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