हाथरस कांड : CBI ने पीड़ित परिवार से की 5 घंटे पूछताछ, पूछे ये सवाल

हाथरस गैंगरेप मामले (Hathras Gang Rape Case) की जांच CBI कर रही है. शनिवार को जांच एजेंसी ने पीड़िता के परिवार से करीब 5 घंटे तक पूछताछ की.

हाथरस कांड : CBI ने पीड़ित परिवार से की 5 घंटे पूछताछ, पूछे ये सवाल

CBI ने हाथरस में कैंप ऑफिस बनाया है.

खास बातें

  • हाथरस कांड की जांच कर रही CBI
  • CBI ने पीड़ित परिवार से की पूछताछ
  • जांच एजेंसी साथ ले गई पीड़िता के कपड़े
हाथरस:

हाथरस गैंगरेप मामले (Hathras Gang Rape Case) की जांच CBI कर रही है. शनिवार को जांच एजेंसी ने पीड़िता के परिवार से करीब 5 घंटे तक पूछताछ की. पीड़िता की भाभी ने बताया कि CBI ने उनसे मामले से संबंधित सवाल पूछे. उन्होंने कहा, 'जांच टीम ने मुझसे ज्यादा सवाल नहीं पूछे. उन्होंने मुझसे छोटू के बारे में पूछा लेकिन मैं उसे नहीं जानती. वे अपने साथ पीड़िता के कपड़े ले गए. वे कई घंटे तक सवाल पूछते रहे. हमने किसी तरह का दबाव महसूस नहीं किया.'

CBI ने हाथरस में एक कैंप ऑफिस बनाया है. कृषि विभाग की संपत्ति में यह दफ्तर बनाया गया है. पीड़ित परिवार केस की सुनवाई दिल्ली में चाहता है. वह लोग भी दिल्ली में शिफ्ट होना चाहते हैं. पीड़िता के भाई ने कहा कि वह चाहते हैं कि परिवार जहां भी रहे, सुरक्षित रहे. वहीं AAP सांसद संजय सिंह (Sanjay Singh) ने शनिवार को कहा कि वह हाथरस पीड़िता के परिवार को दिल्ली में स्थित अपने आवास में रखने को तैयार हैं.

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बता दें कि हाथरस के एक गांव में 14 सितंबर को 19 वर्षीय दलित लड़की से चार लड़कों ने कथित रूप से बलात्कार किया था. 29 सितंबर को दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़िता की मौत हो गई थी. 30 सितंबर को रात के अंधेरे में उसके घर के पास ही कथित तौर पर पुलिस ने जबरन अंतिम संस्कार कर दिया था. परिवार का आरोप है कि पुलिस ने जल्द से जल्द उसका अंतिम संस्कार करने के लिए मजबूर किया था. पुलिस अधिकारियों का कहना है कि परिवार की इच्छा के मुताबिक ही अंतिम संस्कार किया गया.

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सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में कहा है कि हाथरस केस की जांच की निगरानी इलाहाबाद हाईकोर्ट को करने को दी जाएगी. प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ इस मामले को लेकर दायर जनहित याचिका और कार्यकर्ताओं तथा वकीलों के हस्तक्षेप के आवेदनों पर सुनवाई कर रही थी. पीठ से कहा गया कि उत्तर प्रदेश में निष्पक्ष सुनवाई संभव नहीं है क्योंकि पहले ही जांच कथित रूप से चौपट कर दी गई है.

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(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)