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यूपी: दहेज में कार नहीं देने पर शौहर ने पत्‍नी को दिया तीन तलाक

लोकसभा ने एक बार में तीन तलाक को अवैध करार देने वाले मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 को मंजूरी दे दी, जिसके बाद अब ऐसे पतियों को जेल की हवा खानी पड़ेगी जो एक बार में तीन तलाक का इस्तेमाल करेंगे.

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यूपी: दहेज में कार नहीं देने पर शौहर ने पत्‍नी को दिया तीन तलाक

यूपी के मुरादाबाद में दहेज में कार नहीं देने पर शौहर ने पत्‍नी को दिया तीन तलाक

खास बातें

  1. लोकसभा ने मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 को मंजूरी दी
  2. एक बार में तीन तलाक देने पर पतियों को हो सकती है जेल
  3. 10 लाख रुपये या गाड़ी ना देने पर पति ने दिया तीन तलाक
लखनऊ: लोकसभा ने एक बार में तीन तलाक को अवैध करार देने वाले मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 को मंजूरी दे दी, जिसके बाद अब ऐसे पतियों को जेल की हवा खानी पड़ेगी जो एक बार में तीन तलाक का इस्तेमाल करेंगे. लेकिन इसके बाद भी तीन तलाक के मामले रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं. उत्‍तर-प्रदेश के मुरादाबाद में एक शौहर ने इसलिए अपनी पत्‍नी को तलाक दे दिया पीड़िता ने तलाक देने से इनकार कर दिया था.

 

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मुरादाबाद में एक महिला विराशा को उसके शौहर ने इसलिए तीन तलाक दे दिया क्‍योंकि उसने दहेज में एक कार या दस रुपये कैश देने से इनकार कर दिया है. पीड़िता ने बताया कि उसके पति ने उसे कहा कि अगर तुम दहेज नहीं दे सकती हो तो घर छोड़कर जा सकती हो. 

लोकसभा में गुरुवार को पास हुए तीन तलाक विधेयक में एक बार में तीन तलाक को दंडनीय अपराध की श्रेणी में रखते हुए तीन वर्ष तक कारावास और जुर्माने का प्रावधान है. विधेयक पर चर्चा का जवाब देते हुए विधि एवं न्याय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि अगर गरीब और त्यक्ता मुस्लिम महिलाओं के पक्ष में खड़ा होना अपराध है तो ये अपराध हम दस बार करेंगे. हम इसे वोट के तराजू में नहीं तोल रहे और सियासत के चश्मे से नहीं, इंसानियत के चश्मे से देखते हैं.

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लोकसभा से पारित होने के बाद अब विधेयक को राज्यसभा में पेश किया जाएगा जहां सरकार के पास बहुमत नहीं है लेकिन मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के रूख को देखते हुए उच्च सदन से भी इसके पारित होने की संभावना अधिक है.

प्रसाद ने कांग्रेस के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विपक्षी दल का पूरा स्वर भ्रम पैदा करता है जहां वे समर्थन भी करते हैं और किंतु-परंतु भी करते हैं. वे एक तरफ विधेयक को हड़बड़ी में लाने की बात करते हैं और दूसरी तरफ कहते हैं कि इसे पहले क्यों नहीं लाया गया.

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उन्होंने कहा कि तीन तलाक का मामला उच्चतम न्यायालय में लंबित था, इसलिए हम अपनी तरफ से कुछ नहीं कर सकते थे. जब उच्चतम न्यायालय ने इस प्रथा को गैरकानूनी कह दिया तो हम विधेयक लेकर आए.

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मंत्री के जवाब के बाद सदन ने असादुद्दीन ओवैसी, एन के प्रेमचंद्रन, जॉइस जॉर्ज, बी महताब, ए संपत, अधीर रंजन चौधरी और सुष्मिता देव के संशोधनों को नकार दिया. सदन ने ध्वनिमत से मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण विधेयक 2017 को मंजूरी दे दी.

 


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