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CBI जांच की रिपोर्ट्स पर अखिलेश यादव का शायराना तंज: बदनीयत है जिसकी बुनियाद उस खबर से फिक्र क्यों

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को टि्वटर पर एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वह अपनी पत्नी डिंपल यादव और बच्चों के साथ बैठे हुए दिख रहे हैं.

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CBI जांच की रिपोर्ट्स पर अखिलेश यादव का शायराना तंज: बदनीयत है जिसकी बुनियाद उस खबर से फिक्र क्यों

अखिलेश यादव ने यह तस्वीर ट्वीट की है.

खास बातें

  1. अखिलेश यादव का तंज
  2. सपा प्रमुख का दिखा शायराना अंदाज
  3. सीबीआई कर रही है खनन घोटाले की जांच
नई दिल्ली:

समाजवादी पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) का नाम कथित तौर परखनन घोटाले (Illegal Mining Scam) में आने के बाद उन्होंने टि्वटर का सहारा लेते हुए तंज कसा है. उन्होंने एक ट्वीट किया है, जिसमें लिखा है, 'दुनिया जानती है इस ख़बर में हुआ है मेरा ज़िक्र क्यों... बदनीयत है जिसकी बुनियाद उस ख़बर से फ़िक्र क्यों.'

यूपी के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने मंगलवार को टि्वटर पर एक तस्वीर शेयर की है, जिसमें वह अपनी पत्नी डिंपल यादव और बच्चों के साथ बैठे हुए दिख रहे हैं. =अखिलेश यादव के इस ट्वीट को सीबीआई जांच की रिपोर्ट्स को लेकर भाजपा पर तंज के रूप में देखा जा रहा है.

सूत्रों ने एनडीटीवी को बताया कि समाजवादी पार्टी के नेता के लिए सीबीआई ने सवालों की लिस्ट तैयार कर ली है. अखिलेश यादव जब मुख्यमंत्री थे तो उन्होंने खनन मंत्रालय अपने पास ही रखा हुआ था. सीबीआई अधिकारियों का दावा है कि खनन घोटाले में अखिलेश यादव के शामिल होने के सबूत उनके पास हैं. उन्होंने आरोप लगाया कि जो 22 अवैध खदान हैं, उनमें से 14 को अखिलेश यादव ने ही मंजूरी दी थी, इसके अलावा जितनी खदान हैं उन्हें गायत्री प्रसाद ने अनुमति दी थी.


CBI का दावा, मुख्यमंत्री रहते अखिलेश यादव ने दे दी थी एक दिन में 13 खनन पट्टों को मंजूरी

बता दें, अवैध खनन मामले की जांच कर रही CBI ने सोमवार को दावा किया था कि मुख्यमंत्री रहते हुए अखिलेश यादव के कार्यालय ने एक ही दिन में 13 खनन पट्टों को मंजूरी दी थी. सीबीआई ने कहा कि अखिलेश यादव के पास कुछ समय के लिए खनन विभाग भी था और उन्होंने 14 खनन पट्टों को मंजूरी दी थी, जिसमें 13 पट्टों को 17 फरवरी 2013 को मंजूरी दी गई थी. ऐसा ई-टेंडरिंग प्रक्रिया का उल्लंघन करते हुए किया गया था. 

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साथ ही केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने दावा किया कि 2012 की ई-टेंडर नीति का उल्लंघन करते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय से मंजूरी हासिल करने के बाद 17 फरवरी को हमीरपुर की जिलाधिकारी बी चंद्रकला ने खनन पट्टे दिये थे. उस नीति का 29 जनवरी 2013 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने मंजूरी दी थी. सीबीआई ने समाजवादी पार्टी प्रमुख यादव की भूमिका का ब्योरा तब दिया जब उन्होंने और अन्य विपक्षी पार्टियों के नेताओं ने केंद्र की भाजपा सरकार पर राजनीतिक फायदे के लिये जांच एजेंसी का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया.

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आपको बता दें अखिलेश यादव ने रविवार को आरोप लगाया था कि भाजपा विपक्षी दलों के नेताओं को धमकाने के लिये औजार के रूप में सीबीआई का इस्तेमाल कर रही है. विपक्षी दलों में से कुछ के नेता सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ गठबंधन बनाने का प्रयास कर रहे हैं. यादव ने कहा था, ‘अब हमें सीबीआई को बताना पड़ेगा कि गठबंधन में हमने कितनी सीटें वितरित की हैं. मुझे खुशी है कि कम से कम भाजपा ने अपना रंग दिखा दिया है. इससे पहले कांग्रेस ने हमें सीबीआई से मिलने का मौका दिया था और इस बार यह भाजपा है जिसने हमें यह अवसर दिया है'. उन्होंने कहा था,‘समाजवादी पार्टी लोकसभा की अधिक से अधिक सीटें जीतने का प्रयास कर रही है. जो हमें रोकना चाहते हैं, उनके साथ सीबीआई है.

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