CAA पर जारी प्रदर्शनों के बीच यूपी में नागरिकता देने के लिए 32000 लोगों की हुई पहचान, मंत्री ने दी जानकारी

उत्तर प्रदेश के मंत्री और सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने NDTV से कहा, "हम इसमें कोई जल्दबाज़ी नहीं कर रहे हैं... अभी सिर्फ शुरुआत हुई है... जब कानून अधिसूचित हो जाता है, तभी हमें आगे बढ़ना होता है... सही कहा न...?"

CAA पर जारी प्रदर्शनों के बीच यूपी में नागरिकता देने के लिए 32000 लोगों की हुई पहचान, मंत्री ने दी जानकारी

मंत्री श्रीकांत शर्मा ने कहा, "यह जारी रहने वाली प्रक्रिया है, हम आंकड़ों को अपडेट करते रहेंगे''

खास बातें

  • जिनकी पहचान की गई है, उनमें एक हिस्सा पीलीभीत में बसे लोगों का है
  • यूपी भी उन राज्यों में शामिल है, जिनमें CAA को लेकर हिंसक प्रदर्शन हुए
  • CAA में पहली बार धर्म को नागरिकता का पैमाना बनाया गया है
लखनऊ:

नए बने नागरिकता कानून (CAA) के तहत भारतीय नागरिकता पाने की आस रखने वाले लोगों की पहचान उत्तर प्रदेश सरकार ने शुरू कर दी है. सरकार के अनुसार, राज्य के 21 जिलों में अब तक 32,000 लोगों की पहचान कर ली गई है. हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इस तरह लोगों की पहचान करने के लिए किस प्रक्रिया को अपनाया गया. नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को तीन दिन पहले राजपत्रित अधिसूचना के ज़रिये लागू कर दिया गया है, लेकिन उसके लिए नियम अभी तक नहीं बनाए गए हैं.

उत्तर प्रदेश के मंत्री और सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा ने NDTV से कहा, "हम इसमें कोई जल्दबाज़ी नहीं कर रहे हैं... अभी सिर्फ शुरुआत हुई है... जब कानून अधिसूचित हो जाता है, तभी हमें आगे बढ़ना होता है... सही कहा न...?"

श्रीकांत शर्मा ने यह भी कहा, "यह जारी रहने वाली प्रक्रिया है, हम आंकड़ों को अपडेट करते रहेंगे... सभी जिलाधिकारियों से सर्वे करवाने और सूची को अपडेट करते रहने के लिए कहा गया है... हम इस सूची को केंद्रीय गृह मंत्रालय को भेजने की भी प्रक्रिया शुरू कर रहे हैं..."

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जिन लोगों की पहचान की गई है, उनमें एक हिस्सा पीलीभीत में बसे लोगों का है. प्रदेश की राजधानी लखनऊ से लगभग 260 किलोमीटर दूर बसा पीलीभीत जिला उत्तराखंड तथा भारत की नेपाल से सटी सीमा के करीब है.

जिले के शीर्ष सरकारी अधिकारी वैभव श्रीवास्तव ने शुक्रवार दोपहर को स्थानीय पत्रकारों से कहा था कि 'शुरुआती सर्वे' के तहत बांग्लादेश (अतीत में पूर्वी पाकिस्तान) से आए 37,000 शरणार्थियों की पहचान कर ली गई है, और राज्य सरकार को नाम भेज दिए गए हैं. वैभव श्रीवास्तव के अनुसार, "शुरुआती जांच से पचा चला है कि ये लोग अपने देश में अत्याचार का शिकार होने की वजह से पीलीभीत आकर बसे थे..."

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इस बात को लेकर कोई स्पष्टीकरण नहीं मिल पाया है कि राज्य सरकार द्वारा बताए गए आंकड़ों में फर्क क्यों है.

पीलीभीत निवासी कालिबाद हलदर ने कहा, "मैं खुश हूं कि सरकार ने हमारे पक्ष में इस पर फैसला किया... इससे मेरे जैसे लोगों को उम्मीद बंधी है..." कालिबाद हलदर ने बताया कि उनका परिवार 1960 के दशक में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से आया था, और महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल में रहने के बाद 1984 में वे पीलीभीत में आकर बस गए थे.

उत्तर प्रदेश भी उन राज्यों में शामिल है, जिनमें नागरिकता संशोधन कानून को लेकर हिंसक विरोध प्रदर्शन हुए. पिछले माह पुलिस तथा प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पों में 21 लोगों की मौत हुई, 300 से ज़्यादा पुलिसकर्मी ज़ख्मी हुए. लेकिन केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्पष्ट रूप से कहा है कि कानून को वापस नहीं लिया जाएगा.

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नागरिकता संशोधन कानून में पहली बार धर्म को नागरिकता का पैमाना बनाया गया है. केंद्र सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद तीन मुस्लिम-बहुल देशों पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश से आए छह अल्पसंख्यक समुदायों (जिनमें मुस्लिम शामिल नहीं हैं) के उन लोगों के प्राकृतीकरण की प्रक्रिया को गति प्रदान करना है, जिन्होंने अपने देश में अत्याचारों का शिकार होने के बाद भारत में शरण मांगी है. आलोचकों का कहना है कि यह कानून राष्ट्रीय नागरिक पंजी (NRC) के साथ जोड़कर देखे जाने पर मुस्लिमों के खिलाफ है.

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