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कौशाम्बी : एम्बुलेंस न मिलने पर मजदूर को साइकिल पर ले जानी पड़ी भांजी की लाश

डॉक्टर और एम्बुलेंस के ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई

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कौशाम्बी : एम्बुलेंस न मिलने पर मजदूर को साइकिल पर ले जानी पड़ी भांजी की लाश

कौशाम्बी में एम्बुलेंस न मिलने पर मजदूर को अपनी भांजी का शव साइकिल पर ले जाना पड़ा.

खास बातें

  1. एक हाथ से हैंडिल संभालकर साइकल चलाते हुए ले गया शव
  2. कौशाम्बी के डीएम ने मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए
  3. सहारनपुर के गंगोह में गर्भवती को नहीं मिली एम्बुलेंस
लखनऊ:

यूपी के कौशाम्बी जिले में एक गरीब मजदूर को अस्पताल में भांजी की मौत होने पर उसकी लाश कंधे पर रखकर 10 किलोमीटर तक साइकल से जाना पड़ा क्योंकि अस्पताल ने उसे एम्बुलेंस नहीं दी. अब अस्पताल के डॉक्टर और एम्बुलेंस के ड्राइवर के खिलाफ एफआईआर हो गई है. इसी अस्पताल में चंद दिनों पहले एक गर्भवती महिला की लाश उसके परिजन स्ट्रेचर पर धकेलते हुए घर ले गए थे क्योंकि अस्पताल ने उन्हें भी एम्बुलेंस नहीं दी थी.

गरीब मजदूर बृजमोहन कंधे पर भांजी की लाश लिए, एक हाथ से हैंडिल संभालकर साइकल चलाते हुए उसे दफन करने के लिए निकला. वह कहीं बियाबान तो कहीं बाजार से गुजरा. खराब सड़क से गुजरती साइकिल बार-बार डगमगा जाती थी और मजदूर घबरा जाता था कि कहीं लाश हाथ से छूट न जाए. उसकी सात माह की भांजी को इस हालत में देखने वालों की रूह कांप गई होगी.

बृजमोहन ने बताया कि उसने इमर्जेंसी में ड्यूटी कर रहे डॉक्टर से कहा कि शव ले जाने के लिए कोई साधन मुहैया करा दीजिए. इस पर डॉक्टर ने कहा कि एक फोन नंबर लिखा है उस पर फोन करो, गाड़ी आएगी और तुमको घर तक छोड़ेगी. बृजमोहन ने उस नंबर पर फोन किया तो गाड़ी वाले ने कहा कि उसकी गाड़ी में तेल नहीं है और वह नहीं जा सकता.


बृजमोहन ने बताया कि “हमको बोले कि अगर कुछ तेल के लिए खर्चा दोगे तो हम चलेंगे. हमने कहा कि जब हम आपको ही तेल देंगे तो हम अपने साधन से चले जाएंगे” उससे जब पूछा कि बड़े डॉक्टर से शिकायत क्यों नहीं की? तो उसने कहा कि बड़े डॉक्टर वहीं खड़े थे. उन्होंने कुछ सुना ही नहीं तो मजबूरी में अपनी साइकल से ले जाना पड़ा.

बताया जाता है कि बृजमोहन की भांजी को बहुत ज्यादा उल्टी-दस्त की शिकायत थी. अस्पताल वाले कागज़ी कार्यवाही करवाते रहे और इसी बीच उसने दम तोड़ दिया.

कुछ दिन पहले भी इसी अस्पताल में एक गर्भवती महिला की मौत हो गई. उसके घर वालों को भी एम्बुलेंस नहीं मिली. फिर बड़ी जद्दोजहद के बाद उसे लाश ले जाने को स्ट्रेचर दे दिया. मामला मीडिया में आने के बाद जिला प्रशासन ने एफआईआर करा दी.

कौशाम्बी के डीएम मनीष कुमार वर्मा ने कहा कि “संबंधित चालक और डॉक्टर के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करा दी है और प्रकरण की मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दे दिए गए हैं. विभागीय कार्रवाई के लिए भी हमने शासन को लिख दिया है. हॉस्पिटल में और ऐसे प्रकरण दुबारा नहीं होने चाहिए. इस पर कड़ी से कड़ी कार्रवाई होगी.”

सहारनपुर के गंगोह में भी कुछ ऐसा ही वाकया दोहराया गया. गंगोह पीएचसी में एक गर्भवती महिला भारती को तबीयत बिगड़ने पर सहारनपुर रेफर किया गया, लेकिन घंटों एम्बुलेंस नहीं मिलने पर उसके घर वाले उसे प्राइवेट गाड़ी में ले गए. इस बीच उसकी तबीयत और ज्यादा बिगड़ गई.

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सहारनपुर के सीएमओ डॉक्टर बीएस सोढी ने एम्बुलेंस उपलब्ध न कराने की मजबूरी बताई. उन्होंने कहा कि “कल पेट्रोल पंप में सर्वर डाउन हो गए थे. इनके पास कार्ड होता है, जिससे कि पेट्रोल डाला जाता है…इससे असुविधा रही.”

ओडिशा के दाना मांझी की कहानी अभी भी आंखों में आंसू ला देती है, लेकिन ओडिशा से बहुत दूर यूपी में भी चिकित्सा सुविधाओं की दुर्दशा का वही आलम जारी है.अखिलेश यादव सरकार के आखिरी सालों में यूपी में 3700 से ज्यादा एम्बुलेंस चलाई गईं थीं. इनका काम जरूरतमंद लोगों को फ्री सेवा देना था. लेकिन यह एम्बुलेंस जिस तरह चल रही हैं वह चिंता की बात है.


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