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साजिश के तहत की गई हत्या, इसमें कई नेता, सरकार और पुलिस शामिल : मुन्ना बजरंगी की पत्नी

उत्तर प्रदेश में लोग जेल में भी सुरक्षित नहीं हैं, बागपत जेल में सोमवार सुबह माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की 10 गोलियां मारकर हत्या कर दी गयी.

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साजिश के तहत की गई हत्या, इसमें कई नेता, सरकार और पुलिस शामिल : मुन्ना बजरंगी की पत्नी

बागपत जेल में माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की 10 गोलियां मारकर हत्या कर दी गयी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. मुन्ना बजरंगी की पत्नी ने कहा, साजिश के तहत की गई हत्या
  2. उन्होंने कहा कि इस हत्या में कई नेता भी शामिल हैं
  3. बागपत जेल में मुन्ना बजरंगी की गोली मारकर हत्या कर दी गई
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में लोग जेल में भी सुरक्षित नहीं हैं, बागपत जेल में सोमवार सुबह माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी की 10 गोलियां मारकर हत्या कर दी गयी. हत्या का आरोप जेल में बंद दूसरे गैंगस्टर सुनील राठी पर है. इस मामले की न्यायिक जांच के आदेश देकर जेलर, डिप्टी जेलर समेत 4 जेलकर्मियों को सस्पेंड कर दिया गया है. सोमवार सुबह बागपत जेल में वो हुआ जिससे जेल की सुरक्षा की धज़्ज़ियां उड़ गयीं. यहां की हाई सिक्योरिटी बैरक नंबर नम्बर 2 से सुबह 6:30 बजे जैसे ही माफिया डॉन मुन्ना बजरंगी को निकाला गया, उसको जेल के अंदर ही बेहद नज़दीक से करीब 10 गोलियां मारी गयीं, जिससे मौके पर ही उसकी मौत हो गयी. मुन्ना बजरंगी की एक्सटॉर्शन के एक मामले में सोमवार को बागपत कोर्ट में पेशी होनी थी, वो रविवार रात 9:30 बजे 23 सुरक्षाकर्मियों के साथ झांसी की जेल से यहां आया था.

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हत्या का आरोप इसी जेल की हाई सिक्योरिटी बैरक नम्बर 10 में बंद गैंगस्टर सुनील राठी पर है. बागपत का रहने वाले सुनील राठी पर 40 से ज्यादा केस दर्ज हैं. हालांकि, जिस पिस्टल से हत्या हुई, वो अब तक बरामद नहीं हुई है. पुलिस के मुताबिक उसे टॉयलेट में फेंक दिया गया है, जिसकी खुदाई की जा रही है. जिस जगह इस हत्याकांड को अंजाम दिया गया वहां कोई सीसीटीवी कैमरा नहीं लगा हुआ था. सवाल ये है कि आखिर 4 लेयर सिक्योरिटी के बाद भी जेल के अंदर हथियार गया कैसे और हत्या को अंजाम कैसे दिया गया? 

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मुन्ना बजरंगी के माफिया डॉन बनने की कहानी भी फिल्मी है. जौनपुर के रहने वाले मुन्ना बजरंगी का असली नाम प्रेम प्रकाश सिंह है. उसे बचपन से गैंगस्टर बनने का शौक था,17 साल की उम्र में पहला अपराध किया. इसके बाद उसे जौनपुर के स्थानीय दबंग माफिया गजराज सिंह के इशारे पर जौनपुर के भाजपा नेता रामचंद्र सिंह की हत्या कर की. 80 और 90 के दशक में उसके बेहिसाब अपराध किये और पूर्वांचल में अपना दबदबा बना लिया फिर वो मुख्तार अंसारी के गैंग में शामिल हो गया. 1996 में सपा से विधायक बनने के बाद मुन्ना की मदद से सरकारी ठेकों और वसूली के कारोबार पर मुख्तार अंसारी ने कब्जा जमा लिया.

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लेकिन इसी दौरान तेजी से उभरते बीजेपी के विधायक कृष्णानंद राय उनके लिए चुनौती बनने लगे. कहा जाता है कि उनके साथ मुख्तार का दुश्मन माफिया डॉन बृजेश सिंह था. 29 नवंबर 2005 को माफिया डॉन मुख्तार अंसारी के कहने पर मुन्ना बजरंगी ने कृष्णानंद राय और उनके साथ 6 लोगों की हत्या कर दी. उसके बाद 1998 में दिल्ली के बदली इलाके में दिल्ली पुलिस से मुठभेड़ में उसे 11 गोलियां लगीं लेकिन वो बच गया. ज़मानत मिलने के बाद वो कई सालों तक मुंबई में छिपा रहा, लेकिन 2009 में उसे दिल्ली पुलिस ने मुंबई से गिरफ्तार कर लिया.

VIDEO: बागपत जेल में अपराधी मुन्ना बजरंगी की हत्या
करीब 10 दिन अपने पति की हत्या का शक ज़ाहिर कर चुकी मुन्ना बजरंगी की पत्नी का कहना है कि हत्या में कई नेता, सरकार और पुलिस शामिल है. सीमा सिंह का आरोप है कि उनके पति की हत्या एक साजिश के तहत की गई है. एक हफ्ते पहले ही सीमा सिंह ने चेताया था कि उनके पति को जान का खतरा है. सीएम से लेकर मानवाधिकार तक को सूचित किया गया था. दरअसल, ये राजनीतिक हत्या है इसकी साजिश पूर्व सांसद धनंजय सिंह, पिके तिवारी, जयंत सिंह और मनोज सिन्हा ने रची है. इसमे सरकार और एसटीएफ के लोग भी शामिल हैं. 


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