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मायावती का अपमान मतलब मेरा अपमान: अखिलेश यादव

यादव ने कहा कि आज से सपा का कार्यकर्ता यह गांठ बांध ले कि मायावती जी का अपमान मेरा अपमान होगा. हम समाजवादी हैं औऱ समाजवादियों की विशेषता होती है कि हम दुख और सुख के साथी होते हैं.

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खास बातें

  1. 'बीजेपी हमारे बीच गलतफहमी पैदा कर सकती है'
  2. जनता बीजेपी के तानाशाही रवैये से खासी नाराज है
  3. लोग बीजेपी के घोर चुनावी वादाखिलाफी के खिलाफ खड़े हैं
लखनऊ:

लोकसभा चुनाव 2019 (Loksabha Election 2019) को लेकर समाजवादी पार्टी (SP) और बहुजन समाज पार्टी(BSP) के बीच हुए गठबंधन के बाद अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav) ने बसपा सुप्रीमो मायावती (Mayawati) की तारीफ की. उन्होंने कहा कि (Akhilesh Yadav)  इस गठबंधन के लिए मैं मायावती जी (Mayawati) का धन्यवाद देना चाहता हूं. अगर आज हम साथ हैं तो इसका श्रेय मायावती जी को भी जाता है. अखिलेश यादव (Akhilesh Yadav)  ने कहा कि मैं पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं से कहना चाहूंगा कि वह जिस तरह से आप मुझे सम्मान देते हैं उसी तरह से आप मायावती जी को भी सम्मान दें. अगर आप मायावती जी (Mayawati) का अपमान करते हैं तो समझिएगा कि आप मेरा अपमान कर रहे हैं. साथ ही उन्होंने (Akhilesh Yadav) कहा कि भाजपा के अहंकार का विनाश करने के लिए सपा-बसपा का मिलना जरूरी था. उन्होंने कहा कि मैनें कहा था कि इस गठबंधन के लिए अगर दो कदम पीछे भी हटना पड़ा तो हम करेंगे.

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यादव ने कहा कि आज से सपा का कार्यकर्ता यह गांठ बांध ले कि मायावती जी का अपमान मेरा अपमान होगा. हम समाजवादी हैं औऱ समाजवादियों की विशेषता होती है कि हम दुख और सुख के साथी होते हैं. बीजेपी हमारे बीच गलतफहमी पैदा कर सकती है. बीजेपी द्वारा दंगा-फसाद भी कराया जा सकता है लेकिन हमें संयम और धैर्य से काम लेना है. मैं मायावती जी के इस निर्णय का स्वागत करता हूं. मैं आपको भरोसा दिलाता हूं कि अब बीजेपी का अन्त निश्चिचत है. गौरतलब है कि शनिवार को मायावती और अखिलेश यादव ने लखनऊ में एक साझा प्रेस कांफ्रेंस करके गठबंधन करने का ऐलान किया. प्रेस कांफ्रेंस के दौरान मायावती ने कहा कि पीएम मोदी और अमित शाह दोनों गुरु चेले की नींद उड़ाने वाली अति महत्वपूर्ण और ऐतिहासिक प्रेस कांफ्रेंस होने जा रही है.

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हमारी पार्टी बीएसपी ने अंबेडकर के देहांत के बाद उनके कारवां को गति प्रदान की है. हमनें उस कारवां को ऐतिहासिक सफलता भी दिलाई है. हम जातिवादी व्यवस्था के शिकार लोगों को सम्मान दिलाने का काम कर रहे हैं. हम पहले भी साथ आए थे और आज फिर चुनाव के लिए साथ आ रहे हैं. हमें उस दौरान भी चुनाव में सफलता मिली थी. इस बार भी हम सफल होंगे. हमारी मकसद सिर्फ बीजेपी जैसी सांप्रदायिक पार्टियों को सत्ता से बाहर रखने का है. अब देश में जनहित को लखनऊ गेस्टहाउस कांड से ऊपर रखते हुए एक बार फिर हमनें उसी प्रकार की दूषित राजनीति को जड़ से हटाने के लिए एक साथ आने का फैसला लिया है. आज उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश के सवा सौ करोड़ आम जनता बीजेपी के घोर चुनावी वादा खिलाफी के खिलाफ खड़े हैं.

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आज आम जनता बीजेपी के तानाशाही रवैये से खासे नाराज हैं. आज सपा और बसपा ने देशहित को ध्यान में रहकर एक जुट होने का फैसला किया है. हमारा गठबंधन नई राजनीतिक क्रांति की तरह होगी. बीएसपी-सपा के गठबंधन से आम जनता की उम्मीद जग गई है. यह गठबंधन सिर्फ चुनाव जीतने के लिए ही नहीं है बल्कि यह गरीबों, महिनलाओं, किसानों, दलितों, शोषित और पिछड़ों को उनका हक दिलाने के लिए है. बीजेपी की गलत नीतियों और कार्य प्रणाली से जनता खासी दुखी है. अब इस पार्टी को सत्ता में आने का अधिकार नहीं है. हम उसे दोबारा सत्ता में आने से रोकना चाहते हैं. 

 

 

 

 

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