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मुख्तार अंसारी : एक ऐसा 'बाहुबली' जिसने 2017 के चुनाव में पीएम मोदी के 'कटप्पा' को हरा दिया था

अंसारी ने 2017 में बसपा के साथ कौमी एकता दल का विलय कर दिया और बसपा उम्मीदवार के रूप में विधानसभा चुनाव में पांचवीं बार विधायक के रूप में जीते. 

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मुख्तार अंसारी : एक ऐसा 'बाहुबली' जिसने 2017 के चुनाव में पीएम मोदी के 'कटप्पा' को हरा दिया था

मुख्तार अंसारी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. मुख्तार अंसारी को दिल का दौरा पड़ा.
  2. मऊ से पांच बार विधायक रहे हैं.
  3. बसपा के कद्दावर नेता और मायावती के करीबी माने जाते हैं.
नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मऊ से बाहुबली विधायक मुख्तार अंसारी को दिल का दौरा पड़ा है. हालत गंभीर होने की वजह से उन्हें कानपुर लाया जा रहा है. बताया जा रहा है कि उनसे मिलने पहुंची उनकी पत्नी को भी जेल परिसर में दिल का दौरा पड़ा है. मुख्तार अंसारी को लगभग 8 महीने पहले ही बांदा जेल में शिफ्ट किया गया था. डॉक्टरों ने कहा कि मुख्तार अंसारी की हालत गंभीर है और उनका इलाज बांदा में संभव नहीं, इसलिए दोनों को यहां से रेफर किया जाएगा. 

मुख्तार अंसारी का उत्तर प्रदेश खासकर पूर्वांचल में अपना एक अलग रुतबा हुआ करता है. यही वजह है कि एक बार बसपा ने उन्हें पार्टी से निकाल दिया था, मगर उनके कद को देखते हुए दोबारा पार्टी के टिकट से चुनाव लड़वाया. मुख्तार अंसारी मऊ निर्वाचन क्षेत्र से विधान सभा के सदस्य के रूप में रिकॉर्ड पांच बार विधायक चुने गए हैं. अंसारी ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के एक उम्मीदवार के रूप में अपना पहला विधानसभा चुनाव जीता था. 1996 में अंसारी पहली बार बसपा की टिकट से चुनाव जीते थे. 2002 में और 2007 में उन्होंने निर्दलीय होकर चुनाव लड़ा और दोनों बार जीत हासिल की. बाद में 2007 में ही वो फिर से बसपा में शामिल हो गये. उसके बाद बसपा ने उन्हें 2009 के लोकसभा चुनाव में वाराणसी की सीट से लड़ाया, मगर वो असफल रहे. 

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मगर साल 2010 में आपराधिक गतिविधियों की वजह से बसपा ने अंसारी को पार्टी से निकाल दिया. इसके बाद उन्होंने अपने भाइयों के साथ मिलकर अपनी पार्टी कौमी एकता दल का गठन किया. वह उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2012 में मऊ सीट से विधायक चुने गए. 2017 में बसपा के साथ कौमी एकता दल का विलय कर दिया गया और बसपा उम्मीदवार के रूप में अंसारी विधानसभा चुनाव में पांचवीं बार विधायक के रूप में जीते. 

अंसारी के लिए 2017 का चुनाव काफी अहम था. क्योंकि इस चुनाव में 'बाहुबली' को मात देने के लिए पीएम मोदी ने कटप्पा को चुनावी मैदान में उतारा था. खुद प्रधानमंत्री मोदी ने मऊ की जनसभा में उन्हें 'बाहुबली' कहते हुए कहा था इस 'बाहुबली' के खात्मे के लिए उन्होंने अपना 'कटप्पा' मैदान में उतारा है. पीएम मोदी ने 'कटप्पा' इसलिए कहा था क्योंकि इस सीट पर भाजपा ने राजभरों की पार्टी भारतीय समाज पार्टी के उम्मीदवार  महेंद्र राजभर को गठबंधन के तहत उतारा था. मगर बसपा के इस 'बाहुबली' मुख्तार ने कटप्पा को 7464 मतों से हराया था.

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बाहुबली नेता मुख्तार अंसारी का जन्म यूपी के गाजीपुर जिले में हुआ था. उनके दादा मुख्तार अहमद अंसारी कभी शुरुआत में अखिल भारतीय कांग्रेस के अध्यक्ष रहे चुके थे. इस तरह से देखा जाए तो मुख्तार अंसारी को राजनीति विरासत में मिली. मुख्तार अब्बास अंसारी को पूर्वांचल का बड़ा नेता माना जाता है. एक समय तो बसपा प्रमुख मायावती ने अंसारी को गरीबों का मसीहा और रॉबिनहूड तक कहा था. बता दें कि मुख्तार के बेटे अब्बास निशानेबाजी में राष्ट्रीय स्तर पर कई स्वर्ण पदक जीत चुके हैं.

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हाल ही में यानी सितंबर में मऊ जिले में ठेकेदार मन्ना सिंह व साथी राजेश राय हत्याकांड मामले में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने आठ साल बाद विधायक मुख्तार अंसारी सहित आठ लोगों को बरी कर दिया था. ठेकेदार मन्ना सिंह व इनके साथी राजेश राय की 29 अगस्त, 2009 को कोतवाली शहर के नरई बांध के पास यूनियन बैंक के पास बाइक सवार बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी. मामले में हरेंद्र सिंह की तहरीर पर पुलिस ने मुख्तार सहित 11 लोगों पर केस दर्ज किया था. आठ साल तक चली सुनवाई के दौरान 22 गवाहों में से 17 गवाह पेश किए गए थे. 

VIDEO : मुख्तार अंसारी को पड़ा दिल का दौरा


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