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तीन तलाक की नौबत आए तो सबसे पहले उलेमा से सम्पर्क करें: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खलीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी ने आज ‘भाषा‘ को बताया कि आगामी 10-11 फरवरी को हैदराबाद में बोर्ड की साधारण सभा की बैठक होगी.

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तीन तलाक की नौबत आए तो सबसे पहले उलेमा से सम्पर्क करें: मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड

प्रतीकात्मक फोटो

खास बातें

  1. समाज को सम्भालने की मुहिम का हाल लेगा मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड
  2. 'तीन तलाक की नौबत आए तो सबसे पहले उलेमा से सम्पर्क करें'
  3. 10-11 फरवरी को हैदराबाद में बोर्ड की साधारण सभा की बैठक होगी
लखनऊ:

ऑल इण्डिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) अगले महीने हैदराबाद में आयोजित होने वाली साधारण सभा में मुस्लिम समाज में फैली तीन तलाक समेत तमाम बुराइयों के खिलाफ देश भर में चल रही मुहिम की रिपोर्ट लेगा और अगले एक साल की कार्ययोजना को अंतिम रूप देगा. बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खलीलुर्रहमान सज्जाद नोमानी ने आज ‘भाषा‘ को बताया कि आगामी 10-11 फरवरी को हैदराबाद में बोर्ड की साधारण सभा की बैठक होगी. इसमें तीन तलाक और दहेज प्रथा समेत मुस्लिम समाज में फैली तमाम बुराइयों के खिलाफ पूरे देश में चलायी जा रही मुहिम का जायजा लिया जाएगा. उन्होंने कहा कि बोर्ड ने महसूस किया कि सामाजिक जागरूकता के बगैर किसी भी व्यवस्था को चलाना मुमकिन नहीं है. बोर्ड देश में बहुत बड़ा अभियान चला रहा है. 

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बोर्ड के संदेशवाहक हर मदरसे और मस्जिद में जाकर तीन तलाक बंद करने और दहेज तथा अन्य बुराइयों से दूर रहने को कह रहे हैं. नोमानी ने बताया कि वार्षिक साधारण सभा में सबसे बड़ा काम यही होगा कि पूरे मुल्क से रिपोर्ट ली जाएंगी. यह देखा जाएगा कि कितना काम हुआ, कितने लोगों तक यह संदेश पहुंच सका और कितना काम बाकी है. उसके आधार पर अगले एक साल की कार्ययोजना तैयार की जाएगी. उन्होंने बताया कि चूंकि तलाक के ज्यादातर मामले कम पढ़े-लिखे लोगों में आते हैं लिहाजा बोर्ड खासकर गांवों में अभियान पर खासी मेहनत कर रहा है. संदेश पहुंचाने वालों में मदरसों के शिक्षक और छात्र भी शामिल हैं. उनका पूरा जोर तीन तलाक के साथ-साथ दहेज के खिलाफ संदेश फैलाना है. वे मुस्लिम समाज से कह रहे हैं कि अगर तलाक देने की नौबत आये तो सबसे पहले उलमा से सम्पर्क करें और तीन तलाक से हर कीमत पर परहेज किया जाए. 

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नोमानी ने बताया कि यह अभियान पिछले एक साल में काफी तेज किया गया है. चूंकि मुसलमानों की आबादी काफी ज्यादा है और उनमें से ज्यादातर गैर पढ़े-लिखे हैं. इसके अलावा बोर्ड के पास उतने संसाधन भी नहीं हैं, लिहाजा अभी बहुत काम बाकी भी है. उन्होंने बताया कि बोर्ड इस मुहिम के लिये सोशल मीडिया का भी सहारा ले रहा है. वह फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्सअप और यूट्यूब पर आ चुका है और लोग इन माध्यमों के जरिये बोर्ड से जुड़कर अपनी शंकाएं दूर कर सकते हैं. तीन तलाक रोधी कानून पर कल शुरू हो रहे संसद के सत्र के दौरान राज्यसभा में चर्चा किये जाने के बारे में पूछे जाने पर बोर्ड के प्रवक्ता ने कहा कि बोर्ड अब भी अपने पुराने रुख पर कायम है और वह चाहता है कि प्रस्तावित कानून में जरूरी बदलाव किये जाएं.

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उन्होंने कहा कि बोर्ड तीन तलाक के सख्त खिलाफ है लेकिन कुछ परिस्थितियों में तीन तलाक को मान्यता दी गयी है. बहुत से मामलों में औरत खुद तीन तलाक मांगती है, मगर जो लोग समाज को अंदर से नहीं देखते, वे सब यही समझते हैं कि तीन तलाक के सारे मामले मर्दों की ही ज्यादती हैं. यह पूरी तरह से गलत है. नोमानी ने कहा कि दारुल क़ज़ा (शरई अदालतें) के रिकार्ड बताते हैं कि बीवी जब तलाक मांगती है, तो काजी उन्हें समझाते हैं. मगर जब यह देखा जाता है कि अलग होने से ही दोनों की जिंदगी ठीक गुजरेगी, तो मजबूरन तलाक दिलाना पड़ता है. ऐसे मामलों के लिये ही तीन तलाक की व्यवस्था रखी गयी है. 

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यही वजह है कि बोर्ड मानता है कि तीन तलाक को एकदम से प्रतिबंधित कर देना महिलाओं के साथ ही ज्यादती है. हम प्रस्तावित कानून में इसी के अनुरूप बदलाव चाहते हैं. बोर्ड प्रवक्ता ने बताया कि वार्षिक साधारण सभा की बैठक में बाबरी मस्जिद मामले की सुनवाई की प्रगति पर भी चर्चा होगी.


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