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छवि सुधारने में जुटे इलाहाबाद के अखाड़े, अब आसान नहीं होगा महामंडलेश्वर की उपाधि

शराब का व्यवसाय करने वाले सचिन दत्ता को 2015 में निरंजनी अखाड़ा का महामंडलेश्वर बनाया गया.

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छवि सुधारने में जुटे इलाहाबाद के अखाड़े, अब आसान नहीं होगा महामंडलेश्वर की उपाधि

इलाहाबाद कुंभ में नागा साधु, फाइल तस्वीर.

इलाहाबाद: राधे मां और सचिन दत्ता को महामंडलेश्वर बनाए जाने की घटना से फजीहत झेल चुके अखाड़ों ने अपनी छवि सुधारने के प्रयास में जुट गई है. अब अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद हर संन्यास लेने वाले की पूरी पड़ताल करेगा. उसके बाद ही प्रयाग के 2019 के अर्धकुंभ में उन्हें संन्यास की दीक्षा व मंडलेश्वर, महामंडलेश्वर की उपाधि दी जाएगी.12012 में जूना अखाड़ा ने हरिद्वार में राधे मां को महामंडलेश्वर की उपाधि दी थी. इस पर विवाद होने के बाद वह प्रयाग में 2013 में लगे कुंभ पर्व में नहीं आ पाई थीं. विवाद बढ़ने पर अखाड़ा ने निर्णय वापस ले लिया. इसके बाद शराब का व्यवसाय करने वाले सचिन दत्ता को 2015 में गुरु पूर्णिमा पर भव्य समारोह में निरंजनी अखाड़ा का महामंडलेश्वर बनाया गया. विवाद ने तूल पकड़ा तो सचिन दत्ता की उपाधि वापस लेकर अखाड़ा से बाहर कर दिया गया. 

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संन्यास लेने वाले की पारिवारिक पृष्ठभूमि, आपराधिक इतिहास, शिक्षा की पड़ताल की जाएगी. संस्कृत व वेद का ज्ञाता होना भी जरूरी है. ऐसी पड़ताल के लिए 13 अखाड़ा के प्रमुखों को कहा गया है.

कठिन है संन्यास की प्रक्रिया : गृहस्थ जीवन छोड़कर संन्यास लेना काफी कठिन प्रक्रिया होती है. कुंभ, अर्धकुंभ में संन्यास का बहुत अधिक महत्व होता है. इसके अलावा सूर्य के उत्तरायण होने पर भी संन्यास लिया जाता है. संन्यास लेने वाले व्यक्ति को तीन दिन का उपवास रखना पड़ता है. पहले दिन वह जल पीकर, दूसरे दिन दूध एवं तीसरे दिन सिर्फ फलाहार करता है.

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इस दौरान ब्रह्मसूत्र, पंचदशी, उपनिषद का पाठ एवं 24 लाख गायत्री मंत्र का जाप पूरा करना होता है, जबकि नागा संन्यासी सिर्फ उपवास रखकर अपने आराध्य का ध्यान करते हैं. उपवास पूरा होने पर उनका छौरकर्म (मुंडन) होता है, जिसमें चोटी छोड़ दी जाती है, फिर वह स्वयं का पिंडदान करते हैं, ताकि दूसरा उसे न करे. इसके बाद विजयाहवन होता है जिससे वह हर शुभकर्म से स्वयं को दूर रखने का संकल्प लेते हैं. इसके बाद आचार्य महामंडलेश्वर चोटी को हाथ से निकालकर संन्यास लेने वाले व्यक्ति को वस्त्र व नया नाम देते हैं.
 


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