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बनारस के सरकारी स्कूलों में मना पीएम मोदी का जन्मदिन, लोगों ने कहा - एक और नया ईवेंट

पहले से ही तमाम कार्यक्रमों और वादों को देख चुकी बनारस की जनता ने कहा कि ये सब ईवेंट है.

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बनारस के सरकारी स्कूलों में मना पीएम मोदी का जन्मदिन, लोगों ने कहा - एक और नया ईवेंट

वाराणसी में बीजेपी पहली बार प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन को व्यापक बनाने में जुटी है....

खास बातें

  1. भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिले के 129 स्कूलों को गोद लिया है
  2. 129 स्कूलों में बच्चों को कॉपी, पेंसिल, रबर और मिठाई बांटी
  3. वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के कुल 34 चौराहों को सजाया जाएगा
वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन 17 सितंबर को है. उनके संसदीय क्षेत्र वाराणसी में जन्मदिन को यादगार बनाने के लिए कई कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे हैं. भाजपा कार्यकर्ताओं ने कुछ सरकारी स्कूलों को गोद लेकर कॉपी किताब और पेंसिल वितरण कार्यक्रम आयोजित किए. चूंकि 17 तारीख को रविवार है, इसलिए ये कार्यक्रम 16 को ही स्कूलों में आयोजित कर लिया गया. भाजपा कार्यकर्ताओं ने जिले के 129 स्कूलों को गोद लिया. इस मौके पर प्रदेश के खेलकूद और युवा कल्याण मंत्री नीलकंठ तिवारी वाराणसी के एक प्राथमिक विद्यालय में बच्चों को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का जन्मदिन मनाते नजर आए.

वाराणसी में भाजपा पहली बार प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन को व्यापक बनाने में जुटी है. इसके लिए स्कूलों को भी चुना गया. जिले के 129 स्कूलों में बच्चों को कॉपी, पेंसिल, रबर और मिठाई बांटी. शहर  के अलग-अलग स्कूलों में ये कार्यक्रम सुबह 9 बजे से 1 बजे तक आयोजित किए गए. बच्चों के लिये ये नई बात थी. छात्रा मुस्कान पूछने पर बड़ी मासूमियत से बताती हैं, "मंत्री सर आए थे. स्वच्छता अभियान के लिए थे. कल पीएम मोदी का जन्मदिन है, इसलिए उनका जन्मदिन भी मनाया गया."  

पीएम के जन्मदिन पर शहर में प्रधानमंत्री के संकल्प 'स्वच्छता ही सेवा है' को साकार करने के लिए शहर के 825 स्थानों पर स्वच्छता कार्यक्रम होगा. इसमें तकरीबन 6000 भाजपा कार्यकता लगेंगे. वाराणसी लोकसभा क्षेत्र के कुल 34 चौराहों को सजाया जाएगा. 67वां जन्मदिन है इसलिए जहां 67 किलो का केक काटा जाएगा. वहीं बनारस के 67 घाटों पर दिए भी जलाए जाएंगे जो स्वच्छता की रोशनी फैलाएगी.

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पहले से ही तमाम कार्यक्रमों और वादों को देख चुकी बनारस की जनता ने कहा कि ये सब ईवेंट है. बनारस में अब तक कुछ ख़ास नहीं बदला. बनारस के अमित सिंह से जब ये सवाल किया गया तो उन्होंने तपाक से कहा "अभी तक यही लग रहा है कि बनारस में सिर्फ ईवेंट हो रहा, अगर बदल गया होता तो बनारस का ये स्वरूप नहीं दिखाई देता. ये ईवेंट ही है. धरातल पर ये योजनाए दिखाई नहीं दे रही है. ये तो सारे जनमानस को दिखाई दे रहा है कि काशी क्योटो नहीं बन पाई. जो आता है एक नई योजना की शुरुवात करवा जाता है. वो योजना जमीन पर आई की नहीं आई ये देखने वाला कोई नहीं."

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कुछ ऐसी ही प्रतिक्रिया 62 साल के बुजुर्ग अजित कुमार सिंह की थी. "नहीं-नहीं कुछ बदला नहीं सिर्फ एक दो फीसदी बदला है, बाकी ईवेंट है. सिम्बॉलिक ईवेंट है. थोड़ी देर काम किया उसके बाद अपना अपना रास्ता नाप लिया. यहां प्रशासन ही कोई काम नहीं कर रहा सफाई का."

VIDEO : बनारस के सरकारी स्कूलों में मना पीएम मोदी का जन्मदिन


साफ़ है कि लोगों को ये इसलिये लग रहा है कि काशी 3 साल में क्योटो नहीं बन पाई और ई-बोट गंगा की लहरों पर नहीं चल पाई. बाकी योजनाएं भी धरातल से दूर नजर आ रही है. लिहाजा लोगों को बच्चों के स्कूल का ये कार्यक्रम भी अगर साल भर नहीं चलता तो ईवेंट ही नजर आएगा और ऐसे ईवेंट से सरकारी स्कूलों की दशा ठीक नहीं हो सकती.


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