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...इस वजह से यूपी में सड़कों पर फेंका जा रहा है आलू

किसानों ने लाखों टन आलू कोल्ड स्टोरेज में छोड़ दिया है, क्योंकि उसे निकालकर बाजार में बेचना घाटे का सौदा है.

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...इस वजह से यूपी में सड़कों पर फेंका जा रहा है आलू

यूपी में सड़कों पर फेंका जा रहा है आलू

लखनऊ: देश में सबसे ज्यादा आलू पैदा करने वाले यूपी के किसान बेहाल हैं, क्योंकि उन्हें लागत से भी बहुत कम दाम मिल रहा है. किसानों ने लाखों टन आलू कोल्ड स्टोरेज में छोड़ दिया है, क्योंकि उसे निकालकर बाजार में बेचना घाटे का सौदा है. करीब साल भर बाद अब कोल्ड स्टोरेज मालिक अगली फसल के लिए अपना कोल्ड स्टोरेज खाली करने के वास्ते आलू सड़कों पर फेंक रहे हैं. देश में पैदा होने वाले कुल आलू का 40 फीसदी यूपी में पैदा होता है. पिछले साल 155 लाख टन आलू पैदा हुआ. 120 लाख टन आलू कोल्ड स्टोरेज में रखा गया. यूपी में इटावा, मैनपुरी, फर्रुखाबाद, कन्नौज, फिरोजाबाद, आगरा, अलीगढ़, हाथरस, बाराबंकी आदि में बड़े पैमाने पर आलू की खेती होती है. किसानों ने पिछले साल मार्च-फरवरी में कोल्ड स्टोरेज में आलू रखा था, जिसे बड़े पैमाने पर निकाला नहीं. अब फरवरी में आलू की नई फसल तैयार हो जाएगी. ऐसे में अपना कोल्ड स्टोरेज खाली करने के लिए कोल्ड स्टोरेज मालिक आलू फेंक रहे हैं.

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किसानों ने कोल्ड स्टोरेज से आलू क्यों नहीं निकाला, यह समझने के लिए आलू का गणित समझना पड़ेगा. किसानों को आलू की उत्पादन लागत आई है करीब 450 रुपये प्रति क्विंटल. कोल्ड स्टोरेज का किराया आया करीब 250 रुपये प्रति क्विंटल. कोल्ड स्टोरेज तक ढुलाई आई 50 रुपये क्विंटल, बेचने के लिए मंडी ले जाने पर ढुलाई लगेगी 50 रुपये क्विंटल. इस तरह आलू की लागत आई 800 रुपये क्विंटल, जबकि मंडी ने आलू का दाम है 500 रुपये क्विंटल. यानी किसानों को आलू बेचने पर 300 रुपये क्विंटल का घाटा आया. लेकिन अगर किसान कोल्ड स्टोरेज से आलू नहीं निकालेगा तो उसे घाटा आएगा 250 रुपये क्विंटल. इसलिए किसानों का आलू अब कोल्ड स्टोरेज वाले फेंक रहे हैं.

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आलू किसानों का दर्द समझने हम बाराबंकी के गांव में गए. मीलों में फैली आलू की फसल तमाम अंदेशों के साथ पक रही है. फरवरी में तैयार हो जाएगी. नरेपुरवा के राकेश वर्मा ने पिछले साल 5 एकड़ में आलू बोया. उन्हें 1,60,000 रुपये का घाटा हुआ. इस बार फिर आलू बो दिया. वह कहते हैं, 'मजबूरी है. खेती के अलावा जीने का कोई जरिया नहीं है. इस उम्मीद पर जिंदा हैं कि शायद इस बार कुछ बच जाए. अब किसान ना तो फैक्ट्री लगा सकता है और ना ही खेती छोड़कर डाक्टरी करने लगेगा.'

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सरकार ने 487 रुपये की दर से 10 लाख क्विंटल आलू खरीदने का लक्ष्य रखा था, लेकिन 13,000 क्विंटल भी आलू खरीदा नहीं जा सका. प्रदेश सरकार के प्रवक्ता श्रीकांत शर्मा कहते हैं, सरकार आलू किसानों के लिए फूड प्रोसेसिंग यूनिट लगाने पर विचार कर रही है. उम्मीद है दो-ढाई साल में इसका स्थायी समाधान हो जाएगा.'


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