प्रयागराज : कुंभ में बड़ी संख्या में लोगों ने गृहस्थ से संयास आश्रम तक का तय किया सफर

सोमवार को संगम के तट पर निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर की देखरेख में सैकड़ों की संख्या में गृहस्थ जीवन त्याग कर सन्यासी बनने की प्रक्रिया में लोग जुटे थे.

प्रयागराज : कुंभ में बड़ी संख्या में लोगों ने गृहस्थ से संयास आश्रम तक का तय किया सफर

प्रतीकात्मक चित्र

प्रयागराज:

प्रयागराज के कुंभ में अध्यात्म और मोक्ष की खोज में तीन धाराओं के संगम पर साधु-संत सन्यासी के साथ गृहस्थ आश्रम के लोग तो आते ही हैं पर इसमें एक बड़ा तबका उन लोगों का भी होता है,  जो इस सांसारिक जीवन से निकल कर सन्यास जीवन में प्रवेश करते हैं. उनके लिए अमावस्या के स्नान से पहले दीक्षित करने का अलग अलग अखाड़ों शंकराचार्य के हैं कार्यक्रम होते हैं. इसी कड़ी में सोमवार को संगम के तट पर निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर की देखरेख में सैकड़ों की संख्या में गृहस्थ जीवन त्याग कर सन्यासी बनने की प्रक्रिया में लोग जुटे थे. सन्यासी बनने की प्रक्रिया बड़ी जटिल होती है इसमें जो व्यक्ति गृहस्थ आश्रम से संयास आश्रम में प्रवेश करता है, उसे पहले अपना खुद का जीवित रहते हुए श्राद्ध करना पड़ता है जिसके लिए बाकायदा वह पिंड दान करते हैं.

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यह पिंडदान पहले स्वयं का होता है फिर उसके बाद पिता का और बाद में सारे पितरों का वह पिंड दान करके गंगा में स्नान करते हैं और उसके बाद भिक्षा लेने निकल पड़ते हैं. अज्ञात रूप में वह भिक्षा अपने घर से भी लेते हैं और उसके बाद वह इस सांसारिक जीवन को छोड़कर एक नए जीवन में प्रवेश करते हैं जिसे सन्यास जीवन कहते हैं. सन्यासी बनने की प्रक्रिया सौ से डेढ़ सौ की संख्या में लगभग हर दिन चलती है और बड़ी संख्या में लोग कुंभ के मौके पर संयास आश्रम में दीक्षित होते हैं. 

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