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रविदास जयंती में प्रियंका गांधी की एंट्री क्या उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति को साधने की कोशिश है?

प्रियंका गांधी रविवार को वाराणसी पहुंच रही हैं. वह संत रविदास जयंती में शिरकत करेंगी. यही नहीं, रैदासियों के साथ लंगर भी छकेंगी. प्रियंका के आने की खबर के साथ ही कांग्रेसी खेमे में हलचल तेज हो गई है.

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रविदास जयंती में प्रियंका गांधी की एंट्री क्या उत्तर प्रदेश में दलित राजनीति को साधने की कोशिश है?

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा (फाइल फोटो)

वाराणसी:

कभी कांग्रेस के परंपरागत वोटर रहे दलित उत्तर प्रदेश में बीते कई दशकों से बहुजन समाजवादी पार्टी के पाले में चले गए थे. लेकिन इधर बीजेपी उन पर डोरा डालने की पूरी कोशिश कर रही है और दलित पशोपेश में भी हैं. ऐसे में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा उन्हें अपनी तरफ करने की कोशिश में लगी हैं. प्रियंका गांधी रविवार को वाराणसी पहुंच रही हैं. वह संत रविदास जयंती में शिरकत करेंगी. यही नहीं, रैदासियों के साथ लंगर भी छकेंगी. प्रियंका के आने की खबर के साथ ही कांग्रेसी खेमे में हलचल तेज हो गई है.

संत रविदास मंदिर में करेंगी दर्शन-पूजन
तय कार्यक्रम के मुताबिक प्रियंका गांधी दोपहर तकरीबन 12 बजकर 20 मिनट पर दिल्ली से बाबतपुर एयरपोर्ट पहुंचेंगी. इसके बाद सड़क मार्ग से वह सिरगोवर्धन स्थित संत रविदास की जन्मस्थली पहुंचेंगी. कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अजय राय के मुताबिक प्रियंका गांधी रविदास मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगी. साथ ही रैदासियों के साथ लंगर भी छकेंगी. प्रियंका के आगमन के साथ ही जिला प्रशासन भी अलर्ट हो गया है. मंदिर और उसके आसपास की सुरक्षा बढ़ा दी गई है. दूसरी ओर कांग्रेसी भी तैयारियों में जुट गए हैं.

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राजनैतिक केंद्र बन गया है रविदास मंदिर
हाल के सालों में रविदास मंदिर राजनीति का नया केंद्र बन गया है. 90 के दशक में इस मंदिर में सिर्फ बीएसपी नेताओं का ही आना जाना था, लेकिन 2014 के बाद से हालात बदल गए हैं. बीएसपी नेताओं के अलावा अब यहां राजनीति के बड़े चेहरे दिखाई पड़ते हैं. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल, योगी आदित्यनाथ सरीखे नेता रविदास मंदिर में मत्था टेक चुके हैं. अब इस कड़ी में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का भी नाम जुड़ने जा रहा है.

क्या है प्रियंका गांधी की स्ट्रैटजी
यूपी की सियासत में पांव जमाने की कोशिश में प्रियंका गांधी दिन रात मेहनत कर रही हैं. वो कभी सीएए प्रदर्शनकारियों से मिलने के लिए यूपी के कोने-कोने जाती हैं तो कभी किसानों और कानून व्यवस्था का मुद्दा उछालती हैं. इन सबके बीच प्रियंका गांधी की नजर उत्तर प्रदेश के दलितों पर टिकी है. हाल के सालों में दलितों का बीएसपी से मोहभंग होता दिखा है. दलितों का एक बड़ा धड़ा अब मायावती के साथ नहीं है. लोकसभा और विधानसभा के चुनाव में ये धड़ा बीजेपी के साथ दिखा. लेकिन जिस तरह से दलित एक्ट में संशोधन हुआ, उससे ये वर्ग बीजेपी को लेकर पशोपेश में है. प्रियंका गांधी की नजर इसी दलित वर्ग पर टिकी है. कुछ महीने पूर्व सोनभद्र में दलितों के नरसंहार को लेकर प्रियंका गांधी ने जिस तरह के तेवर दिखाए उसे हर कोई देख चुका है.

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