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बसपा-सपा गठबंधन में कांग्रेस की उम्मीदें अब भी जिंदा? प्रियंका गांधी करेंगी अखिलेश से सीधे बातचीत

उत्तर प्रदेश की सियासत में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले प्रियंका गांधी वाड्रा की सक्रिय राजनीति में एंट्री ने एक बार फिर से बीजेपी के खिलाफ सपा-बसपा के गठबंधन में कांग्रेस के जगह पाने की उम्मीद जगा दी है.

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बसपा-सपा गठबंधन में कांग्रेस की उम्मीदें अब भी जिंदा? प्रियंका गांधी करेंगी अखिलेश से सीधे बातचीत

प्रियंका गांधी (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. सपा-बसपा गठबंधन में अब भी कांग्रेस की उम्मीदें कायम.
  2. अखिलेश यादव बातचीत करने को इच्छूक हैं, मगर मायावती नहीं.
  3. प्रियंका गांधी बीच का रास्ता निकालेंगी.
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश की सियासत में बसपा-सपा गठबंधन में अब भी कांग्रेस की उम्मीदें जिंदा हैं. उत्तर प्रदेश की सियासत में लोकसभा चुनाव से ठीक पहले प्रियंका गांधी वाड्रा की सक्रिय राजनीति में एंट्री ने एक बार फिर से बीजेपी के खिलाफ सपा-बसपा के गठबंधन में कांग्रेस के जगह पाने की उम्मीद जगा दी है. एनडीटीवी को मिली सूत्रों से जानकारी की मानें कांग्रेस समाजवादी पार्टी के नेतृत्व के संपर्क में है और प्रियंका गांधी कांग्रेस के सपा-बसपा गठबंधन में शामिल होने और ज्यादा से ज्यादा सीटों हासिल करने के मुद्दे पर अखिलेश यादव से सीधे तौर पर बातचीत करेंगी. 

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समाजवादी पार्टी के नेताओं ने एनडीटीवी से कहा कि अखिलेश यादव बातचीत के लिए तैयार हैं, मगर सबसे बड़ी चुनौती है मायावती को समझाना. हालांकि, ऑन रिकॉर्ड उन्होंने कहा कि दोनों पार्टियां कांग्रेस के साथ बातचीत की संभावनाओं पर किसी तरह के कमेंट करने की स्थिति में नहीं है. उत्तर प्रदेश से राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने एनडीटीवी से कहा कि यह ऐसा मसला है, जिस पर मैं कमेंट नहीं कर सकता.


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दरअसल, प्रियंका गांधी ने 2017 के विधानसभा चुनावों से पहले भी अखिलेश यादव के साथ गठबंधन की बातचीत के कमान को संभाला था. मगर चुनाव में परिणाम दोनों दलों के लिए काफी खराब साबित हुए थे. फिर भी, अखिलेश यादव ने भविष्य के गठजोड़ों से इनकार नहीं किया था. हालांकि, मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान में सीट शेयरिंग को लेकर अंतिम दौर में बात नहीं बनी थी. 

बताया जाता है कि सूबे में कांग्रेस नेताओं के अड़ियल रवैये की वजह से अखिलेश यादव और मायावती ने कांग्रेस को गठबंधन से अलग कर दिया था. जबकि सपा और बसपा के विधायक अब भी मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस सरकार को समर्थन कर रहे हैं. 

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दरअसल, यूपी की सभी 80 लोकसभा सीटों पर कांग्रेस ने अपने उम्मीदवार उतारने का ऐलान किया है. यूपी की 80 सीटें किसी भी पार्टी के लिए केंद्र में राज करने के लिए काफी अहम होती हैं. यही वजह है कि यूपी में कांग्रेस को मजबूत करने और अधिक से अधिक सीट जीतने के इरादे से राहुल गांधी ने अपना सबसे बड़ा सियासी दांव चला और प्रियंका गांधी को पूर्वी यूपी की कमान दे दी. इतना ही नहीं, यूपी फतह करने के लिए राहुल ने प्रियंका गांधी के अलावा ज्योतिरादित्य सिंधिया को भी पश्चिमी यूपी का प्रभारी बना दिया. 

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जबकि मायावती की बहुजन समाजा पार्टी और अखिलेश की समाजवादी पार्टी उत्तर प्रदेश में 38-38 सीटों पर लड़ने के लिए सहमत हुई है, तो अब कांग्रेस नेताओं का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि वे अखिलेश यादव कम से कम 8 से 10 सीट के देने के लिए मना लेंगे. हालांकि, कांग्रेस नेता के ऐसे दावों को सपा नेताओं ने इनकार कर दिया. उनका कहना है कि अगर उनकी पार्टी सिर्फ 28 सीटों पर चुनाव लड़ेगी, तो यह हमारे लिए फायदेमंद नहीं होगा. कांग्रेस की सीटों के लिए दोनों पार्टियों को त्याग करना होगा. हालांकि, सपा नेताओं ने यह भी कहा कि अखिलेश यादव बीजेपी को हराने के लिए बेस्ट सिचुएशन चाहते हैं.  

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वहीं, अखिलेश यादव के आधिकारी प्रवक्ता ने कहा कि ऐसी खबरें काल्पनिक हैं. बता दें कि इससे पहले यादव परिवार की छोटी बहु अपर्णा यादव भी प्रियंका गांधी की तारीफ कर चुकी हैं. उन्होंने कहा कि अगर 2017 में प्रियंका गांधी को गठबंधन की ओर से मुख्यमंत्री का चेहरा बनाया जाता तो परिणाम कुछ और सामने आते. 

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