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प्रियंका गांधी की यूपी में नई टीम के साथ लखनऊ में नया बंगला भी, कांग्रेस में जान फूंकने की कोशिश

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी अब और ज़्यादा वक़्त लखनऊ में रहकर सियासत करेंगी, शीला कौल के खाली बंगले को बनाया अपना आशियाना

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प्रियंका गांधी की यूपी में नई टीम के साथ लखनऊ में नया बंगला भी, कांग्रेस में जान फूंकने की कोशिश

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने लखनऊ में अपने निवास के लिए एक बंगला चुन लिया है.

खास बातें

  1. प्रियंका का बंगला लखनऊ शहर के बीच एक पॉश इलाके में
  2. प्रियंका की राजनीतिक जरूरतों के मुताबिक माकूल है बंगला
  3. बंगले के गेट पर लगा बरगद का पेड़ गांधी जी ने रोपा था
लखनऊ:

प्रियंका गांधी ने लखनऊ में रहने के लिए एक नया बंगला ढूंढ लिया है और काम करने के लिए यूपी कांग्रेस की नई टीम भी बना दी है. उनका बंगला भी उनकी पसंद का है जो शहर के बीच एक पॉश इलाके में है. नई कांग्रेस कमेटी में उनकी पसंद के लोग हैं जिसमें अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और सीएलपी लीडर आराधना मिश्रा हैं. पता चला है कि अब प्रियंका ज़्यादा वक़्त लखनऊ में रहकर कांग्रेस में जान फूंकेंगी. प्रियंका गांधी अब और ज़्यादा वक़्त लखनऊ में रहकर सियासत करेंगी. लोकसभा चुनावों के दौरान उन्होंने पूर्वांचल में गंगा यात्रा की थी जिसमें वे अलग-अलग जगह रुकती थीं. और जब तीन दिन के लिए लखनऊ आईं तो ताज होटल में रहीं. लेकिन यहां ज़्यादा वक्त रहने के लिए उनके स्थाई ठिकाने की जरूरत थी.

वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी का कहना है कि 'अगर जनरल सेक्रेटरी इंचार्ज हैं तो दिल्ली बैठकर वे राजनीति नहीं करेंगी. वे जनता के बीच जाएंगी. जनता के बीच काम करेंगी. निसंदेह, जब यहां आई थीं, तीन रात रही थीं. सुबह 3-4 बजे तक काम करती थीं. तो निश्चित रूप से रुकना तो पड़ेगा ही उनको यहां.'


लखनऊ के पॉश इलाके गोखले मार्ग पर उन्होंने अपनी रिश्तेदार पूर्व केंद्रीय मंत्री शीला कौल का बंगला रहने के लिए चुना है. शीला कौल का परिवार बाहर रहता है और बंगला बंद पड़ा था. दो मंजिल का यह बंगला एक काफी चौड़ी रिहायशी सड़क पर है. यहां काफी हरियाली है. गेट पर लगा बरगद का पेड़ गांधी जी ने लगाया था जो अब काफी बड़ा हो गया है.

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लखनऊ में प्रियंका गांधी की राजनीतिक जरूरतों के मुताबिक यह बंगला बिल्कुल ठीक पाया गया है. सियासी तौर पर भी और सिक्यूरिटी  के नज़रिए से भी, क्योंकि यह चलती हुई आम सड़क पर नहीं है. लेकिन यह बिल्कुल सेंट्रली लोकेटेड है. यहां से कांग्रेस का दफ़्तर, विधान सभा, राजभवन, हज़रतगंज सब कुछ बिल्कुल पास-पास है.

प्रियंका ने यूपी कांग्रेस का नया अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को बनाया है जो दो बार के विधायक हैं. प्रियंका के साथ उनकी सबसे ज़्यादा तस्वीरें तब आईं जब सोनभद्र कांड के बाद वहां जाते समय प्रियंका को पुलिस ने रास्ते में रोककर हिरासत में ले लिया था. इसी तरह वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी की बेटी आराधना मिश्रा कांग्रेस लेजिस्लेचर पार्टी की नेता बनाई गई हैं. आराधना प्रतापगढ़ की रामपुर खास सीट से एमएलए हैं और प्रियंका की क़रीबी मानी जाती हैं. प्रियंका की गंगा यात्रा में वे काफी सक्रिय थीं.

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यूपी की सीएलपी लीडर आराधना मिश्रा ने कहा कि 'सदन से लेकर सड़क तक कांग्रेस संघर्ष करने के लिए तैयार है, चाहे  पिछले मुद्दे रहे हों, उन्नाव की बेटी का मामला रहा हो, शाहजहांपुर की घटना रही हो या सोनभद्र का  मामला रहा हो.. कांग्रेस पार्टी ने एक मजबूत विपक्ष की तरह, जिम्मेदार विपक्ष की भूमिका सदन में भी निभाई है, सड़क पर भी निभाई है.'

प्रियंका गांधी की नई टीम काफी छोटी है. पिछली टीम में 500 लोग थे, नई टीम में सिर्फ़ 67 हैं. टीम के लोगों की औसत उम्र 40 साल है. अध्यक्ष समेत 45 फीसदी सदस्य पिछड़ी और अति पिछड़ी जातियों से हैं. इसमें सवर्ण 20 फीसदी और दलित भी करीब 20 फीसदी हैं. सलाहकार परिषद में 18 वरिष्ठ नेता हैं. लेकिन तमाम वरिष्ठ लोगों को इसमें कोई जगह नहीं मिली है.

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यूपी में कांग्रेस के सामने बहुत बड़ी चुनौतियां हैं. सन 1989 के बाद पार्टी सत्ता से बाहर है. उसका पारंपरिक वोट बैंक छिटक गया है, संगठन  कमज़ोर है. पार्टी चलाने के लिए संसाधन नहीं हैं. दूसरी तरफ बीजेपी जैसी ताकतवर पार्टी से मुकाबला आसान नहीं है.अब कांग्रेस यहां कानून व्यवस्था, बेरोजगारी, महंगाई और मंदी को मुद्दा बनाना चाहती है.

प्रमोद तिवारी कहते हैं कि 'खास तौर से आर्थिक मोर्चे पर बेरोज़गारी.. इस मोर्चे पर जो विफलता है उससे एक बड़ा सा वेक्यूम बना है. उस वेक्यूम के लिए भाजपा का विकल्प बनना कांग्रेस की सबसे बड़ी चुनौती है. राष्ट्रीय आधार पर कोई दूसरी पार्टी है नहीं.'

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प्रियंका की सियासत में एंट्री बहुत देर से हुई है लेकिन अब तो मैदान में हैं ही. कुछ वक्त में अंदाज़ होगा कि उनका नया ठिकाना और नई  टीम कांग्रेस में कितनी जान फूंक पाई.

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