4 बजे तक इंतजार करने के बाद प्रियंका गांधी ने यूपी बॉर्डर पर खड़ी बसें वापस बुलाई

प्रियंका ने ट्विटर के जरिए वीडियो संवाद करते हुए कहा, 'श्रमिक भाई - बहनों के लिए ये संकट का समय है. इस समय संवेदनासाथ उनकी मदद करना ही हम सबका उद्देश्य है.'

4 बजे तक इंतजार करने के बाद प्रियंका गांधी ने यूपी बॉर्डर पर खड़ी बसें वापस बुलाई

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का योगी सरकार पर हमला...

नई दिल्ली:

नई दिल्ली: प्रवासी मजदूरों को घर पहुंचाने को लेकर कांग्रेस और यूपी की योगी सरकार के बीच फंसा पेंच बुधवार को भी जारी रहा. कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने बुधवार को यूपी सरकार से साफ कहा कि हमारी बसें यूपी के बॉर्डर पर खड़ी है. आप इसे राजनीतिक दांवपेंच में उलझाकर लोगों की मदद में बाधा ना पहुंचाए. प्रियंका गांधी ने यूपी सरकार से कहा कि वह शाम 4 बजे तक यदि बसों को अंदर नहीं बुलाते हैं तो हम इन बसों को वापस बुलवा लेंगे.

कांग्रेस नेता ने कहा, 'हमारी पेशकश के पीछे सेवा का भाव है. 500 बसें हमने गाजियाबाद बॉर्डर पर खड़ी की थी. कल हमने 900 बसें, 500 राजस्थान-यूपी बॉर्डर पर और बाकी बसें गाजियाबाद-दिल्ली-यूपी बॉर्डर पर खड़ी की थी. हम बसों की नई सूची देने को तैयार है.'

प्रियंका ने ट्विटर के जरिए वीडियो संवाद करते हुए कहा, 'श्रमिक भाई - बहनों के लिए ये संकट का समय है. इस समय संवेदना साथ उनकी मदद करना ही हम सबका उद्देश्य है.'

उन्होंने कहा, 'कल अगर ये बसें चली होती हो आज हजारों मजदूर अपने घरों पर पहुंच जाते. हमारी बसों को जाने का परमिट नहीं दिया. कल भी बसें खड़ी रही आज भी खड़ी रही. आप हमें बसे इस्तेमाल करने की अनुमित दें. आपको अगर ये कहना है
ये आपने उपलब्ध करवाई है.तो कहिए लेकिन इन्हें चलने दीजिए. अब तक हम कम से कम 92 हजार लोगों को घर पहुंचा सकते थे.

मैं यूपी के सीएम से सिर्फ यह कहना चाहती हूं कि आप हमें अनुमति दीजिए हम लोगों के घर तक पहुंचाएंगे. आपको अनुमति नहीं देनी है तो मत दीजिए हमारी बसें वापस चली जाएंगी जैसे कल गई थी.' 

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प्रियंका गांधी वाड्रा ने कहा इस मामले को राजनीतिक रंग देने से बचने की बात कहते हुए यूपी सरकार से कहा, 'आप इन बसों पर अपने झंडे लगाना चाहते हैं तो लगाईये लेकिन लोगों को परेशानी नहीं होनी चाहिए. आपने बिना वजह इसे राजनीतिक रस्साकशी में उलझा रखा है. सियासत के बीच ये बसें फंस गई है, लोग अभी भी पैदल सड़क पर चलने को मजबूर हैं.'