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राम जन्मभूमि केस के पक्षकार महंत भास्कर दास का निधन, ब्रेन स्ट्रोक के बाद हॉस्पिटल में भर्ती करवाए गए थे

88 साल के भास्कर दास को सांस लेने में तकलीफ और ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था.

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राम जन्मभूमि केस के पक्षकार महंत भास्कर दास का निधन, ब्रेन स्ट्रोक के बाद हॉस्पिटल में भर्ती करवाए गए थे

राम जन्मभूमि केस के पक्षकार महंत भास्कर दास का निधन (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. निर्मोही अखाड़ा के महंत भास्कर दास का शनिवार तड़के निधन
  2. अयोध्या में राम जन्मभूमि मामले में पक्षकार थे
  3. सांस लेने में तकलीफ, ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद हॉस्पिटल में भर्ती हुए थे
फैजाबाद: अयोध्या में राम जन्मभूमि मामले में पक्षकार निर्मोही अखाड़ा के महंत भास्कर दास का शनिवार तड़के निधन हो गया. 88 साल के भास्कर दास को सांस लेने में तकलीफ और ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. निर्मोही अखाड़ा के महंत का फैजाबाद के हर्षण हृदय संस्थान में इलाज चल रहा था. आज सुबह साढ़े 3 बजे भास्कर दास ने आखिरी सांस ली. महंत भास्कर दास का अयोध्या के तुलसी घाट पर अंतिम संस्कार किया जाएगा. उत्तराधिकारी पुजारी राम दास ने बताया कि मंगलवार को सांस लेने में तकलीफ और ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया था. इसके बाद से ही हालत खराब होती गई. शनिवार सुबह उन्होंने आखरी सांस ली. महंत के निधन की सूचना के बाद उनके शिष्यों का जमावड़ा अयोध्या स्थ‍ित मंदिर में लगने लगा है.

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महंत को अंतिम विदाई देने के लिए उनके शिष्य आश्रम पहुंचने लगे हैं. फैजाबाद के सांसद लल्लू सिह और पूर्व कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष डॉ. निर्मल खत्री ने भी उनको श्रद्धांजलि दी. भास्कर दास के निधन का नाका हनुमानगढ़ी में साफ असर दिख रहा है. शोक में सभी दुकानें बंद कर दी गई हैं. निर्मोही अखाड़ा के महंत भास्कर दास रामजन्मभूमि केस में मुख्य पक्षकार थे. 88 वर्षीय महंत भास्कर दास 1959 से राम जन्मभूमि के मुकदमे जुड़े थे. बावजूद इसके उनके मुस्लिम पक्षकार हाशिम अंसारी से मधुर रिश्ते थे.

महंत भास्कर दास का जन्म 1929 में गोरखपुर के रानीडीह में हुआ था. 16 साल की उम्र में 1946 में वह अयोध्या आ गए, हनुमान गढ़ी पहुंचे. जहां वह महंत बलदेव दास निर्मोही अखाड़ा के शिष्य बने. इसी दौरान उनकी शिक्षा दीक्षा भी हुई. इसके बाद उन्हें राम चबूतरे पर बिठा दिया गया और पुजारी नियुक्त किया गया.1993 में महंत भास्कर दास निर्मोही अखाड़े के उपसरपंच बन गए थे. फिर 1993 में ही सीढ़ीपुर मंदिर के महंत रामस्वरूप दास के निधन के बाद उनके स्थानस्थान पर भास्कर दास को निर्मोही अखाड़े का सरपंच बना दिया गया. तब से यही निर्मोही अखाड़े के महंत रहे. 1949 में वह राम जन्मभूमि बनाम बाबरी मस्जिद केस से जुड़े.

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1986 में भास्कर दास के गुरु भाई बाबा बजरंग दास का निधन हो गया. जिसके बाद इन्हें हनुमान गढ़ी का महंत बना दिया गया. भास्कर दास फैजाबाद में निर्मोही अखाड़ा के महंत रहे.


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