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समाजवादी पार्टी और निष्कासन : पिछले कुछ महीनों में इस तरह से निष्कासित होते चले गए बड़े नेता...

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समाजवादी पार्टी और निष्कासन : पिछले कुछ महीनों में इस तरह से निष्कासित होते चले गए बड़े नेता...

सपा परिवार में वर्चस्व की लड़ाई जारी है

खास बातें

  1. पहले मुलायम ने अखिलेश यादव को पार्टी से छह साल के लिए निकाला
  2. बाद में अखिलेश बने सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष, अमर सिंह को पार्टी से निकाल
  3. कौमी एकता दल के पार्टी में विलय को लेकर शुरू हुआ था विवाद
नई दिल्ली:

समाजवादी पार्टी के अंदर क्या हो रहा है, उसे समझना काफी मुश्किल है. सब एक दूसरे की चिंता तो कर रहे हैं लेकिन फिर आगे जाकर एक दूसरे को निष्कासित कर देते हैं. 30 दिसंबर को मुलायम सिंह यादव ने जब प्रेस कांफ्रेंस की थी तब बार-बार एक ही बात कह रहे थे राम गोपाल यादव, अखिलेश यादव का करियर खत्म कर रहे हैं.

तब सब यही उम्मीद कर रहे थे कि एक ज़िम्मेदार पिता की तरह मुलायम सिंह यादव अपने बेटे अखिलेश यादव के भविष्य को लेकर काफी चिंतित हैं, लेकिन मुलायम सिंह यादव के प्रेम को अमर तो नहीं कहा जा सकता लेकिन अमर प्रेम की वजह से उन्होंने अखिलेश यादव को पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया.

मुलायम सिंह ने अखिलेश को पार्टी से निकाला : वहां पर मौजूद मीडिया कर्मियों को यह बात कुछ हज़म नहीं हुई. कई लोगों के मन में एक ही सवाल पैदा हो रहा था कि जो मुलायम सिंह यादव अपने बेटे के भविष्य को लेकर इतने चिंतित दिखाई दे रहे थे फिर ऐसा क्या हुआ कि सिर्फ पांच मिनट के अंदर अपने बेटे अखिलेश को छह साल के लिए पार्टी से बर्खास्त कर दिए.

कई पत्रकारों के मन में यह सवाल भी खड़ा हो रहा था कि बुढ़ापे की वजह से नेताजी कई बार यह भूल जाते है कि वह क्या कह रहे हैं और क्या कर रहे हैं. इसलिए कुछ पत्रकार बार-बार पूछ रहे थे क्या अखिलेश को भी पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया गया तब मुलायम सिंह यादव का एक ही जवाब था 'हां'.


अखिलेश ने मुलायम को राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटाया : इस मामले में अखिलेश यादव भी एक कदम आगे निकले. अखिलेश यादव पार्टी से निकाले जाने के बाद कई बार भावुक हुए और यह बयान भी दिया कि चुनाव में जीत के रूप में नेताजी को गिफ्ट देंगे . कल शाम को राम गोपाल यादव ने भी बयान दिया कि समाजवादी पार्टी में सिर्फ दो बड़े नेता हैं, एक अखिलेश यादव और दूसरे नेताजी यानी मुलायम सिंह यादव और किसी भी हाल में दोनों का अपमान बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. लेकिन रविवार अखिलेश यादव मुलायम सिंह का जगह ले लिए यानी मुलायम को हटाकर खुद राष्ट्रीय अध्यक्ष बन गए.

ऐसे शुरू हुआ निष्कासन का सस्पेंस : सिर्फ चार महीने के अंदर अखिलेश यादव और उनके पिता मुलायम सिंह यादव के रिश्ते इतने ख़राब कैसे हो गए. कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय को लेकर यह सब शुरुआत हुई. एक तरफ मुलायम सिंह यादव कौमी एकता दल को अपने पार्टी में विलय करना चाहते थे तो अखिलेश यादव इसके खिलाफ थे. सभी यही कह रहे थे इस निर्णय के पीछे मुलायम सिंह नहीं बल्कि शिवपाल सिंह यादव हैं. 21 जून की कौमी एकता दल का समाजवादी पार्टी में विलय हो जाता है. अब अखिलेश यादव ने अपनी ताकत दिखाते हुए 25 जून को इस विलय को रद्द कर देते हैं. अब यह लड़ाई सिर्फ बाप-बेटा की नहीं बल्कि चाचा-भतीजा यानी अखिलेश और शिवपाल यादव की भी बन गई है.

अखिलेश यादव ने शिवपाल यादव का विभाग छीना : अब इस्तीफ़ा की सिलसिला शुरू होता है. कौमी एकता दल का विलय रद्द हो जाने के बाद शिवपाल यादव इस्तीफ़ा देने की धमकी दे डालते हैं. फिर दीपक सिंघल को मुख्य सचिव क पद से हटाया जाता है . अब शुरू होता है पार्टी में फेरबदल का सिलसिला. सबसे पहले मुलायम सिंह यादव अखिलेश यादव को प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाते हुए शिवपाल यादव को यह ज़िम्मेदारी सौंप देते हैं. अखिलेश को यह लगता है कि इस निर्णय के पीछे मुलायम सिंह यादव का नहीं बल्कि शिवपाल सिंह यादव का हाथ हैं. फिर अखिलेश यादव मंत्री रहे शिवपाल से कई विभाग छीन लेते हैं.

अखिलेश ने शिवपाल के करीबी मंत्रियों को निकाला : अब पार्टी से निकालना और वापस लेने की सिलसिला शुरू हो जाता है. शिवपाल सिंह यादव, राम गोपाल यादव के कुछ रिश्तेदारों को पार्टी से निकाल देते हैं. फिर 26 सिंतबर को अखिलेश यादव, शिवपाल सिंह यादव के करीबी माने जाने वाले कुछ मंत्रियों को निकाल देते हैं. अब गाज राम गोपाल यादव पर गिरती है. अखिलेश यादव के करीबी माने जाने वाले रामगोपाल को मुलायम सिंह यादव को पार्टी से निकाल देते हैं. कुछ दिनों के बाद रामगोपाल यादव की पार्टी में वापसी होती है.

मुलायम ने अखिलेश और रामगोपाल को निकाला : अब उत्तर प्रदेश के चुनाव के लिए दो अलग अलग उम्मीदवारों की लिस्ट तैयार की जाती है. एक लिस्ट मुलायम सिंह यादव की होती है और दूसरी अखिलेश यादव की. 28 दिसंबर को मुलायम सिंह यादव एक प्रेस कांफ्रेंस करते हैं और प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव नहीं होते हैं. मुलायम सिंह यादव विधानसभा चुनावों के लिए 325 उम्‍मीदवारों की सूची जारी कर देते हैं. अब सोशल मीडिया पर एक लिस्ट लीक हो जाती है और बताया जाता है कि यह अखिलेश यादव की लिस्ट है जो मुलायम सिंह यादव के लिस्ट से अलग है. यह बात मुलायम सिंह यादव को हजम नहीं होती है फिर मुलायम सिंह यादव एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाते हैं और एक बहुत बड़ा निर्णय लेते हुए मीडिया को बताते हैं कि अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव को पार्टी से छह साल के लिए निकाल दिया गया है.

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अमर सिंह को अखिलेश पार्टी से बाहर निकाला : अखिलेश  के समर्थन में लहर देखने को मिलता है. समाजवादी पार्टी के कुछ बड़े नेता के मौजूदगी में अखिलेश यादव और मुलायम यादव के बीच बैठक होता है और इस बैठक के में यह निर्णय लिया जाता है कि अखिलेश यादव और रामगोपाल यादव का निष्कासन वापस लिए जाएंगे. फिर इसकी औपचारिक घोषणा की जाती है. अब जब सबको लगता था कि अखिलेश और मुलायम के बीच सब कुछ ठीक हो गया है तब रविवार को राम गोपाल यादव ने राष्ट्रीय कार्यकारी अधिवेशन में यह निर्णय लिया गया कि अखिलेश यादव राष्ट्रीय अध्यक्ष होंगे, अमर सिंह को पार्टी से निकाल दिया जाता है और शिवपाल यादव के प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी छीन ली जाती है.

मुलायम सिंह यादव ने राम गोपाल के साथ -साथ दूसरे नेताओं को निकाला : अब मुलायम सिंह यादव इस सबके लिए रामगोपाल यादव को ज़िम्मेदार मानते हैं और  रामगोपाल यादव को पार्टी से बर्खास्त कर देते हैं. सिर्फ इतना नहीं नरेश अग्रवाल और किरणमय नंदा को पार्टी से निकाल दिया जाता है. इसी से अंदाज़ा लगाया जा सकता है कि पिछले कुछ महीनो में समाजवादी पार्टी के अंदर यह निष्कासन का खेल कैसे चल रहा है. 


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