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अखिलेश यादव को बड़ा झटका देने के लिए चाचा शिवपाल ने बनाई रणनीति, अब तक तोड़ चुके इतने नेता

शिवपाल यादव अपनी नई पार्टी समाजवादी सेक्युलर मोर्चा(Samajwadi Secular Morcha) को सपा का विकल्प बनाना चाहते हैं. यह तभी संभव होगा, जब सपा कमजोर होगी और उनका मोर्चा मजबूत. क्या है उनकी रणनीति.

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अखिलेश यादव को बड़ा झटका देने के लिए चाचा शिवपाल ने बनाई रणनीति, अब तक तोड़ चुके इतने नेता

शिवपाल यादव और अखिलेश यादव की फाइल फोटो.

नई दिल्ली: नई पार्टी बनाने के महीने भर के भीतर शिवपाल यादव(Shivpal Singh Yadav) कई बड़े सपा नेताओं को जोड़ने में सफल रहे. इनमें ज्यादातर नेता मुलायम सिंह यादव के संघर्ष के दौर से साथी रहे हैं. मगर पार्टी में जारी अंतर्कलह के बीच समाजवादी पार्टी में उन्हें घुटन महसूस हो रही थी. शिवपाल सिंह यादव ने बीते 29 अगस्त को जब समाजवादी सेक्युलर मोर्चे(Samajwadi Secular Morcha) का गठन किया तो अखिलेश यादव से नाराज चल रहे सपा के नेताओं को एक राजनीतिक प्लेटफॉर्म मिलता हुआ दिखाई दिया. कुछ नेताओं को शिवपाल यादव से वफादारी और पार्टी विरोधी गतिविधियों के आरोप में अखिलेश यादव ने पार्टी से बाहर भी कर रहा था, इस प्रकार बताया जा रहा है कि शिवपाल यादव के मोर्चे से जुड़ने से एक प्रकार से ऐसे नेताओं का राजनीतिक वनवास खत्म हुआ है.
 
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कभी मुलायम सिंह यादव के बाद पार्टी में नंबर दो माने जाने वाले शिवपाल यादव की सपा में पकड़ उस वक्त से ढीली होनी शुरू हुई, जब भतीजे अखिलेश यादव मुख्यमंत्री बने. मुलायम काफी समय तक शिवपाल यादव के साथ खडे़ दिखते रहे, मगर ऐन वक्त पर उन्होंने भी दांव चलकर अखिलेश को ही आशीर्वाद दिया. ऐसे में सपा में उपेक्षा और फिर बड़े भाई मुलायम सिंह यादव के 'पुत्रमोह' को देख जब समाजवादी पार्टी से अपनी बची-खुची उम्मीद भी टूटती दिखी इस साल 29 अगस्त को शिवपाल सिंह यादव ने नई राह चुनते हुए सेक्युलर फ्रंट का एलान किया. उनका दावा था कि मुलायम सिंह यादव के आशीर्वाद से उन्होंने नई पार्टी बनाई है. मगर हालिया आयोजन में मुलायम सिंह यादव बेटे अखिलेश के साथ खड़े दिखे.

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क्या है शिवपाल की रणनीति
समाजवादी पार्टी छोड़कर सेक्युलर मोर्चा से जुड़े एक नेता का कहना है कि सपा में रहते शिवपाल यादव ने जितना कार्यकर्ताओं का ख्याल रखा, उतना किसी और नेता ने नहीं. अखिलेश सरकार में मंत्री रहे तो ज्यादातर कार्यकर्ता उन्हीं से फरियाद करते थे. क्योंकि मुलायम सिंह यादव के साथ पार्टी की शुरुआत से हर जिले के बारंबार दौरे के चलते उन्हें जमीनी सच्चाई मालुम रहती थी. पार्टी में घमासान के बाद से नेताओं और कार्यकर्ताओं का एक वर्ग उपेक्षा का शिकार है. अब शिवपाल इन सभी असंतुष्टों को अपने सेक्युलर मोर्चे से जोड़ने की तैयारी में है. शिवपाल यादव सेक्युलर मोर्चे को सपा का विकल्प बनाना चाहते हैं. यह तभी हो सकता है, जब समाजवादी पार्टी कमजोर हो और सेक्युलर मोर्चा मजबूत. इसके लिए शिवपाल यादव सभी पुराने सपा नेताओं को सेक्युलर मोर्चा से जोड़ने की तैयारी में जुटे हैं. कई असंतुष्ट जहां खुद शिवपाल यादव से निशाना साध रहे हैं तो कुछ से शिवपाल यादव संपर्क कर रहे हैं. 

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ये सपाई हो चुके हैं सेक्युलर मोर्च में शामिल
शिवपाल सिंह यादव की नई पार्टी में अखिलेश यादव सरकार में मंत्री रहे नेता भी शामिल हुए हैं. कई पूर्व सांसद और पूर्व विधायक भी जुड़े हैं. गाजीपुर से दो बार विधायक और मंत्री रहीं शादाब फातिमा, शारदा प्रताप शुक्ला, पूर्व मंत्री श्रीप्रकाश राय उर्फ लल्लन राय हाल में सेक्युलर मोर्चे से जुड़े हैं. इसके अलावा इटावा से दो बार सांसद और  विधायक रहे रघुराज सिंह शाक्य भी शिवपाल के साथ आ गए हैं. उन्हें कानपुर महानगर का प्रभारी बनाया गया है.बिधूना से पूर्व विधायक प्रमोद गुप्ता भी समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा का सदस्य बन चुके हैं. इसके अलावा भी कई छोटे-बड़े नेता सपा का दामन छोड़कर अखिलेश के साथ आए हैं. बताया जा रहा कि पिछले साल पार्टी में कलह के बाद बसपा का दामन थामने वाले पूर्व मंत्री अंबिका चौधरी भी शिवपाल के साथ आ सकते हैं. अंबिका को मुलायम और शिवपाल दोनों का करीबी माना जाता है. 

वीडियो-शिवपाल यादव ने बनाया समाजवादी सेक्यूलर मोर्चा 
 


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