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मन चंगा कर अपनी आत्मा की कठौती में संत रविदास की भक्ति में डूबे ‘रैदासी’

"मन चंगा तो कठौती में गंगा" इस बात को कहने वाले कबीर के समकालीन संत रविदास का जन्म 31 जनवरी को माघी पूर्णिमा के दिन वाराणसी के सीर गोवर्धन में हुआ था.

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मन चंगा कर अपनी आत्मा की कठौती में संत रविदास की भक्ति में डूबे ‘रैदासी’

संत रविदास की भक्ति में डूबे ‘रैदासी

खास बातें

  1. संत रविदास की भक्ति में डूबे ‘रैदासी’
  2. संत रविदास का जन्म 31 जनवरी को हुआ था
  3. उनका जन्म माघी पूर्णिमा के दिन वाराणसी के सीर गोवर्धन में हुआ था
वाराणसी:

"मन चंगा तो कठौती में गंगा" इस बात को कहने वाले कबीर के समकालीन संत रविदास का जन्म 31 जनवरी को माघी पूर्णिमा के दिन वाराणसी के सीर गोवर्धन में हुआ था. सीरगोवर्धन में उनके जनस्थल पर भव्य मंदिर है.  जहां हर साल दुनिया भर में फैले उनके भक्तों का मेला लगता है. तीन दिन तक यहां उत्सव होता है. इस साल भी सीर गोवर्धन के गलियों में उनके जन्म का उत्साह झलक रहा है. संत रविदास की जन्म स्थली का कोना-कोना श्रृद्धा और भक्ति के रस में ऐसा पगा है कि हर कोई उस भाव में गोता लगता नजर आ रहा है.  

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लाखों भक्तों के लिये लंगर की व्यस्वस्था मंदिर कैम्पस में ही है. लंगर के लिये पंजाब से भर कर खाद्य सामग्री आई है. जिसे यही भक्त सेवा भाव से बना कर पंगत में लोगों को परोस कर खिला रहे हैं. सेवादार भी भक्तों की सेवा में लगे हैं, क्योंकि उनके गुरु ने यही सिखाया है कि अपना काम करते हुवे यदि भगवान का भजन और स्मरण किया जाये तो भगवान् खुद भक्त के मन में गंगा की तरंगों की तरह निर्मलता देने के लिये आ जाते हैं. संत रविदास की जन्मस्थली के इलाके में पग-पग पर कई रंग देखने को मिल रहे हैं. कहीं पंजाबी भजनो की गूंज है तो सेवा भाव का सुवास. और कहीं देश दुनिया के रैदासी संत रविदास के उपदेश की किताबों में रमे नजर आ रहे हैं.  


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संत रविदास की इस जन्म स्थली पर उनका जन्म दिन दशकों से उनके भक्त मानते आ रहे हैं. लेकिन इधर कुछ वर्षों से इसमें राजनीति की चाशनी भी घुलने लगी है. क्योंकि नेताओं को लगता है कि यहां से जुड़ने पर एक ख़ास वर्ग के लोगों का वोट उनकी तरफ झुक सकता है. यहां पहले मायावती ने अपनी दस्तक दी. उन्होंने सोने की पालकी भी भेंट की थी।. बाद में राहुल गांधी यहां लंगर छाकने आये. आम आदमी पार्टी के नेता अरविन्द केजरीवाल भी पंजाब चुनाव से पहले यहां आये थे और लंगर छके थे. उस वक्त राजनीति खूब गर्म हुई थी.

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देश के प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी जब बनारस से सांसद हुए तो वो भी इस मंदिर में आ कर लोगों के साथ पंगत में बैठ कर लंगर छके थे. अब इस साल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ इस मंदिर में अपनी दस्तक देंगे. साफ़ है कि हर किसी दल को इनका वोट चाहिये. पर यहां जुटने वाले रैदासी इस राजनीति से दूर अपना मन चंगा कर अपनी आत्मा की कठौती में संत रविदास की भक्ति में डूबे रहते हैं.  


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