NDTV Khabar

उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर सपा-बसपा में 'सैद्धांतिक सहमति', कांग्रेस ने कहा- इंतजार कीजिए, जल्‍द पता चलेगा

बहरहाल, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के लिये क्रमशः अमेठी और रायबरेली सीटें छोड़ी जाएंगी.

 Share
ईमेल करें
टिप्पणियां
उत्तर प्रदेश में गठबंधन को लेकर सपा-बसपा में 'सैद्धांतिक सहमति', कांग्रेस ने कहा- इंतजार कीजिए, जल्‍द पता चलेगा

खास बातें

  1. सपा के प्रवक्ता राजेंद्र चौधरी ने दी जानकारी
  2. गठबंधन का ऐलान जल्द होगा
  3. कांग्रेस ने कहा-हम अकेले लड़ेंगे
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (सपा) और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के बहुप्रतीक्षित गठबंधन के लिये दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व ने ‘सैद्धांतिक सहमति‘ कर दी है और गठजोड़ का ऐलान बहुत जल्द होगा. सपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता राजेन्द्र चैधरी ने बताया कि आगामी लोकसभा चुनाव में गठबंधन को लेकर ‘सैद्धांतिक सहमति‘ बन चुकी है और उम्मीद है कि इस गठजोड़ की औपचारिक घोषणा जल्द होगी. सम्भावना है कि इसी महीने इसका एलान हो जाएगा. उन्होंने बताया कि गठबंधन को लेकर पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव और बसपा प्रमुख मायावती के बीच कई दौर की बातचीत हो चुकी है. गुरुवार को भी दोनों नेताओं के बीच दिल्ली में मुलाकात हुई थी. इस सवाल पर कि दोनों दलों के बीच उत्तर प्रदेश में सीटों के बंटवारे को लेकर क्या सहमति बनी है, सपा प्रवक्ता ने इसकी कोई जानकारी होने से इनकार किया लेकिन इतना कहा कि कुछ छोटे दलों को भी गठबंधन में शामिल करने के लिये बात हो रही है. उन्होंने स्वीकार किया कि गठबंधन में शामिल करने के लिये पश्चिमी उत्तर प्रदेश में असर रखने वाले राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) से भी बातचीत हो रही है. कांग्रेस को गठबंधन में शामिल किये जाने की सम्भावना पर चौधरी ने कहा कि इसका निर्णय तो अखिलेश और मायावती ही लेंगे.

हालांकि उत्तर प्रदेश के कांग्रेस प्रमुख राज बब्‍बर ने NDTV  से खास बातचीत में कहा कि उन्‍हें यह जानकारी मीडिया के माध्‍यम से ही हुई है. उन्‍होंने कहा, 'आपके सूत्र मज़बूत हो सकते हैं लेकिन हमें हमारे राष्ट्रीय नेतृत्व से कोई आदेश नहीं मिला है. जनता चाहती है कि हम सभी दल एक साथ चुनाव लड़ें. औपचारिक या अनौपचारिक रूप से हमें अभी तक कुछ नहीं बताया गया है. राज बब्‍बर ने बताया कि ग़ुलाम नबी आज़ाद से सोमवार को उनकी मुलाकात होनी है और इस मामले पर तभी फैसला होगा. अभी कुछ भी कहना जल्दबाज़ी होगी. उन्‍होंने कहा, 'हमें यूपी में पूरी 80 सीटों पर तैयारी करनी होगी ताकि हमें अपनी ताक़त का अंदाज़ा भी रहे. हमें जो आदेश मिलेगा उसका पालन होगा. हमारा कार्यकर्ता सब जानता है. आप इंतज़ार करिए आपको जल्द पता चलेगा.'


हालांकि दोनों पार्टियों के गठबंधन की खबरों के बीच कांग्रेस के राज्यसभा सांसद पीएल पुनिया ने भी बड़ा बयान दिया. उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी उत्तर प्रदेश में अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. उन्होंने कहा, 'एक गठबंधन हमारे लिए महत्वपूर्ण नहीं है, हमारे कार्यकर्ता तैयार हैं. हमने किसी से भी गठबंधन की बात नहीं की है'.

राहुल गांधी को बड़ा झटका, सूत्रों के मुताबिक यूपी में अखिलेश-मायावती के बीच सीटें भी तय, 10 अहम बातें

बहरहाल, कांग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गांधी और सोनिया गांधी के लिये क्रमशः अमेठी और रायबरेली सीटें छोड़ी जाएंगी. मालूम हो कि सपा और बसपा के बीच गठबंधन के बीज पिछले साल गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव के दौरान ही पड़ गये थे. इन दोनों सीटों पर बसपा ने सपा प्रत्याशियों को समर्थन दिया था और दोनों ही जगह उन्हें कामयाबी मिली थी. उसके बाद कैराना लोकसभा उपचुनाव में रालोद उम्मीदवार तबस्सुम हसन ने सपा के प्रत्यक्ष और बसपा के परोक्ष सहयोग से जीत हासिल की थी. सपा और बसपा को भरोसा है कि दोनों के साथ मिलकर चुनाव लड़ने से वे उत्तर प्रदेश में भाजपा को परास्त कर सकती हैं. वैसे, तो पिछले साल हुए उपचुनावों के नतीजों से संकेत मिले थे कि सपा और बसपा उत्तर प्रदेश में गठबंधन करके चुनाव लड़ेंगी, मगर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव खासतौर पर इस गठबंधन के लिये इच्छुक लगे. अखिलेश अक्सर अपने सम्बोधनों में बसपा के प्रति नरम रुख दिखाते रहे हैं. वह तो यहां तक कह चुके हैं कि अगर जरूरत पड़ी तो वह बसपा के लिये दो कदम पीछे हटने को भी तैयार हैं. उन्होंने हाल में गठबंधन के बारे में कहा था कि यह लोगों और विचारों का संगम होगा.    

नीतीश के बदले रुख पर शिवानंद तिवारी ने कहा- चूहे जहाज छोड़ने लगें तो उसका डूबना तय

टिप्पणियां

साल 2014 में ‘मोदी लहर‘ के बीच हुए लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में सपा का वोट प्रतिशत 22.35 था और उसे पांच सीटों पर ही कामयाबी मिली थी, जबकि बसपा 19.77 फीसद वोट हासिल करने के बावजूद एक भी सीट नहीं जीत सकी थी. यादव-मुस्लिम समीकरण पर काफी हद तक निर्भर रहने वाली सपा और दलितों में जनाधार रखने वाली बसपा के गठबंधन के परिणाम को लेकर तरह-तरह के कयास लगाये जा रहे हैं. सपा को विश्वास है कि बसपा के साथ उसका गठबंधन आगामी लोकसभा चुनाव में भाजपा के लिये मुसीबत पैदा करेगा. वहीं, भाजपा का मानना है कि इस गठजोड़ से कोई फर्क नहीं पड़ेगा. भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता शलभमणि त्रिपाठी का कहना है कि सपा और बसपा का गठबंधन नापाक और अवसरवादी गठजोड़ है. प्रदेश की जनता अब जाति की नहीं बल्कि विकास की सियासत को ही चाहती है और अगले लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा की गलतफहमी दूर हो जाएगी. 

झारखंड में पीएम मोदी, कहा- केंद्र में बिचौलियों को जगह नहीं​



Hindi News से जुड़े अन्य अपडेट लगातार हासिल करने के लिए हमें फेसबुक पर लाइक और ट्विटर पर फॉलो करें.


Advertisement