तो इस तरह मानवता की मिसाल कायम कर यूपी पुलिस की छवि सुधार रहे हैं सब इंस्पेक्टर राकेश

अमीनाबाद के इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले आयुष के पिता रत्नाकर सिन्हा पैर में चोट लगने के कारण कमाने में असमर्थ हो गए.

तो इस तरह मानवता की मिसाल कायम कर यूपी पुलिस की छवि सुधार रहे हैं सब इंस्पेक्टर राकेश

सब इंस्पेक्टर राकेश सिन्हा ने बच्चे की मदद की

नई दिल्ली:

जहां एक ओर उत्तर प्रदेश पुलिस अपने कारनामों और थाने पर पहुंचने वाले फरियादियों के साथ बुरे बर्ताव से वर्दी को दागदार कर रही है, वहीं पुलिस में कई ऐसे भी लोग हैं, जो मानवता की मिसाल कायम कर पुलिस की छवि जनता में अच्छी बनाने का काम कर रहे हैं. ऐसे ही लोगों में लखनऊ जनपद में तैनात सब इंस्पेक्टर (एसआई) राकेश चंद्र मिश्र का नाम शुमार होता है. जब सब इंस्पेक्टर राकेश चंद्र को 'एक कोशिश ऐसी भी' सामाजिक संस्था की वर्षा वर्मा और दिव्य सेवा फाउंडेशन के दीपक महाजन से पता चला कि बारह साल के कक्षा आठ में पढ़ने वाले आयुष सिन्हा बेहद गरीबी के चलते स्कूल आने जाने में असमर्थ है और उसे पढ़ाई पूरी करने के लिए एक साइकिल की जरूरत है तो एसआई मिश्रा ने उन्हें आज एक नई साइकिल दिलाकर सराहनीय कार्य किया.

अमीनाबाद के इंटर कॉलेज में पढ़ने वाले आयुष के पिता रत्नाकर सिन्हा पैर में चोट लगने के कारण कमाने में असमर्थ हो गए. एक बेटी और बेटे की पढ़ाई का खर्चा उठाने के लिए उनके पास कोई साधन नहीं था. इस कारण उन्हें अपने बेटे को स्कूल भेजने के लिए एक साइकिल की बहुत जरूरत थी.

उनकी इस बात को सामाजिक कार्यकर्ता वर्षा वर्मा और दीपक महाजन ने अपने फेसबुक अकांउट पर डाला, जिसे पढ़कर सब इंस्पेक्टर राकेश चंद्र ने उनकी सहायता के लिए कहा और आज उन्हें अग्रवाल साइकिल स्टोर विकासनगर से एक नई साइकिल देकर मानवता की मिसाल कायम की. 

उनके इस कदम से आयुष को आगे पढ़ाई करने में बहुत मदद मिलेगी, जिससे वह अपनी पढ़ाई सुचारु रूप से चला सकता है. एसआई मिश्रा की मदद पाकर रत्नाकर सिन्हा और उनकी पत्नी ने राकेश चंद्र को दिल से दुआएं दी. 

वहीं राकेश चंद्र ने कहा, "मुझे समाज के जरूरतमंद लोगों की मदद करना अच्छा लगता है. रिटायरमेंट के बाद मैं अपना पूरी जीवन सामाजिक कार्यो में लगा दूंगा."

 

(इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है. यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)

 
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