कांग्रेस के दो बड़े नेता गुपचुप फिरोजाबाद पहुंचे, मृतकों के परिजनों को प्रियंका गांधी की चिट्ठी सौंपी

कांग्रेस के नेता पीएल पुनिया व राशिद अल्वी का फ़िरोज़ाबाद का गोपनीय दौरा, मृतकों के परिजनों से की मुलाकात

कांग्रेस के दो बड़े नेता गुपचुप फिरोजाबाद पहुंचे, मृतकों के परिजनों को प्रियंका गांधी की चिट्ठी सौंपी

फिरोजाबाद में मृतकों के परिजन के साथ कांग्रेस के नेता पीएल पुनिया और राशिद अल्वी.

खास बातें

  • प्रियंका गांधी का दो जनवरी 20 का लिखा एक पत्र मृतकों के परिजनों को दिया
  • मृतकों के परिजनों ने मीडिया कर्मियों से नहीं की बात
  • दंगे में मरे छह लोगों के परिजनों से मिलने आ सकती हैं प्रियंका गांधी
लखनऊ:

कांग्रेस के नेता पीएल पुनिया व राशिद अल्वी शुक्रवार को फ़िरोज़ाबाद पहुंचे. वे मृतकों के परिजनों से गोपनीय रूप से मिले. इन दोनों नेताओं ने प्रियंका गांधी का दो जनवरी 20 का लिखा एक पत्र मृतकों के परिजनों को दिया है. इनका दौरा इतना गोपनीय था कि जिला प्रशासन,  कांग्रेस जिलाध्यक्ष को भी इसकी खबर नहीं लगी. कुछ देर रुककर शाम को 7.45 बजे ये दोनों नेता चले गए.

सूत्रों के मुताबिक फिरोजाबाद में दंगे में मरे छह लोगों के परिजनों से मिलने के लिए प्रियंका गांधी के आने का कार्यक्रम बन सकता है?  इसी को लेकर यह दोनों कांग्रेस के बड़े नेता मृतकों के परिजन से मिले. उन्होंने एक पत्र जो प्रियंका गांधी द्वारा हस्ताक्षरित है, परिजनों को दिया. मृतकों के परिजनों के पास जब मीडिया कर्मी जानकारी लेने पहुंचे तो उन्होंनों मीडिया को कुछ भी बताने से इनकार कर दिया तथा तुरंत ही चले जाने को कहा.

बताते चलें कि 20 दिसंबर को फ़िरोज़ाबाद में हुए बवाल में अभी तक छह लोगों की मौत हो चुकी है. प्रशासन ने अभी तक 49 मुकदमे दर्ज किए हैं. इसमें से 29 नामजद, 2500 अज्ञात हैं, 14 लोगों को जेल भेजा जा चुका है. शहर में दंगे में आरोपी 200 फोटो जारी किए गए हैं.

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जिला प्रशासन अभी किसी बड़े नेता को फ़िरोज़ाबाद नहीं आने दे रहा है. इसलिए ये नेता चुपचाप आए और प्रियंका गांधी का संदेश देकर चले गए. इन दोनों नेताओं ने पुलिस को भी अपने आने की सूचना नहीं दी थी. इन दोनों नेताओं के साथ अलीगढ़ के पूर्व एमएलसी विवेक बंसल भी साथ थे.

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प्रियंका गांधी के पत्र में लिखा है -

आदरणीय  नमस्ते,

अपनों का खोना क्या होता है मैं दिल की गहराइयों से समझती हूं. आपके साथ जो हुआ है उसकी कोई भरपाई तो नहीं की जा सकती मगर ऐसे मौके पर एक दूसरे का हाथ थामने से भी मन को तसल्ली मिलती है. आप कतई अपने आप को अकेला न समझें, हौसला न खोएं, हम आपके साथ हैं. हमें आगे बढ़ना है और इंसाफ की मांग को मजबूत करना है. इंसान को बांटने वाली ताकतें मुल्क को कमजोर कर रही हैं. हमें अपने प्यारे मुल्क और संविधान को बचाने के लिए लड़ना है. जब भी और जहां भी हमारी जरूरत हो आवाज देने में हिचक ना करें.


आपकी साथी

प्रियंका गांधी वाड्रा

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