यूपी उपचुनाव में बीजेपी की 'हार का दंश' झेल रहे ब्यूरोक्रेट, 37 आईएस अधिकारियों का तबादला

गोरखपुर से आखिरकार राजीव रौतेला विदा हुए. के विजयेंद्र पांडियन गोरखपुर के नए डीएम होंगे. कासगंज मामले के बाद फेसबुक पर टिप्पणी से चर्चा में आए बरेली के राघवेंद्र विक्रम सिंह का भी हुआ तबादला.

यूपी उपचुनाव में बीजेपी की 'हार का दंश' झेल रहे ब्यूरोक्रेट, 37 आईएस अधिकारियों का तबादला

यूपी उपचुनाव में बीजेपी की 'हार का दंश' झेल रहे ब्यूरोक्रेट (फाइल फोटो)

खास बातें

  • गोरखपुर-फूलपुर के उपचुनाव में बीजेपी की हार
  • मंत्रिमंडल में बदलाव भी हो सकता है
  • 37 अधिकारियों के तबादले
लखनऊ:

गोरखपुर और फूलपुर में बीजेपी की हार के बाद पार्टी ने पहले से अधिक कमर कस ली है और ब्यूरोक्रेसी में बड़े बदलाव किए हैं. यूपी में 37 आईएएस अधिकारियों का तबादला कर दिया गया है. गोरखपुर, बरेली, सीतापुर, सोनभद्र, बलरामपुर, भदोही, चंदौली, महराजगंज, बलिया, अमरोहा, अलीगढ़, आज़मगढ़  के भी डीएम बदल दिए गए हैं.

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इन- इन के हुए तबादले, इन्हें मिला जिम्मा...

  • गोरखपुर से आखिरकार विदा हुए राजीव रौतेला. वह देवीपाटन के मंडलायुक्त बना दिए गए हैं.
  • के विजयेंद्र पांडियन गोरखपुर के नए डीएम होंगे
  • कासगंज मामले के बाद फेसबुक पर टिप्पणी से चर्चा में आए बरेली के राघवेंद्र विक्रम सिंह का भी हुआ तबादला
  • वाराणसी, सहारनपुर, आज़मगढ़, देवीपाटन के मंडलायुक्त बदल दिए गए हैं
  • यूपी आवास विकास परिषद के अपर मुख्य सचिव मुकुल सिंघाल को भी हटाया गया है

बता दें कि बीजेपी को 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले एक चौंका देने वाला झटका लगा है क्योंकि लोकसभा की उन तीनों सीटों पर उसके उम्मीदवार हार गए जिनके लिए उपचुनाव हुआ था. इन तीन सीटों में उत्तर प्रदेश में उसका गढ़ रहा गोरखपुर और फूलपुर तथा बिहार में अररिया शामिल है. यूपी की दोनों लोकसभा सीट प्रदेश के सीएम योगी आदित्‍यनाथ और डिप्‍टी सीएम केशव प्रसाद मौर्या की थी. बीजेपी के लिए यह चौंकाने वाला चुनाव परिणाम त्रिपुरा सहित पूर्वोत्तर के तीन राज्यों में उसकी शानदार जीत के कुछ ही दिन बाद आया.

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VIDEO- बीजेपी को गढ़ में क्यों मिली हार? NDTV की ग्राउंड रिपोर्ट

बीजेपी ने त्रिपुरा में वाम दल के किले को ढहा दिया था जहां वह पिछले 25 वर्ष सत्ता में था. बीजेपी ने अपने क्षेत्रीय सहयोगी दलों के साथ मिलकर नगालैंड और मेघालय में भी सरकार बना ली थी. वहीं बीजेपी के लिए यह हार 2019 के लोकसभा चुनावों के लिए खतरे की घंटी है.