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यूपी के CM योगी आदित्यनाथ ने AMU और जामिया में दलितों के लिए की आरक्षण की मांग...

सीएम ने कहा कि अगर BHU में दाखिले में दलितों को आरक्षण दिया जा सकता है तो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया में ऐसा क्यों नहीं हो सकता.

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यूपी के CM योगी आदित्यनाथ ने AMU और जामिया में दलितों के लिए की आरक्षण की मांग...

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. यूपी के सीएम ने दलितों के लिए आरक्षण की मांग की
  2. आदित्यनाथ ने कहा- BHU में कोटा तो AMU में क्यों नहीं?
  3. BJP सरकार एएमयू और जामिया के अल्पसंख्यक स्टेटस के खिलाफ है
कन्नौज: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को दलितों के लिए अल्पसंख्यक संस्थानों में आरक्षण की मांग की. उनका कहना है कि जब बनारस हिंदू विश्वविद्यालय दलितों को आरक्षण दे सकते हैं तो फिर अल्पसंख्यक संस्थान क्यों नहीं. मुख्यमंत्री योगी ने दलित हितों की वकालत करने वाले सभी लोगों से मांग की है कि वो इस मुद्दे को उठाएं. सीएम ने कहा कि अगर BHU में दाखिले में दलितों को आरक्षण दिया जा सकता है तो अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी और जामिया मिलिया में ऐसा क्यों नहीं हो सकता.

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योगी आदित्यनाथ ने यूपी के कन्नौज में कांग्रेस पर हमला करते-करते एएमयू और जामिया पर भी सवाल उठाए. 
उन्होंने कहा कि 'एक प्रश्‍न यह भी उनसे पूछा जाना चाहिए कि जो कह रहे हैं कि दलितों का अपमान हो रहा है कि आखिर दलित भाइयों को अलीगढ़ मुस्लिम विश्‍वविद्यालय और जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी में भी आरक्षण देने का लाभ मिलना चाहिए. वे इस बात को उठाने का कार्य कब करेंगे.' 

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दरअसल संविधान के मुताबिक अल्पसंख्यक शैक्षिक संस्थान एससी/एसटी आरक्षण के दायरे से बाहर हैं. लेकिन मौजूदा सरकार उन्हें अल्पसंख्यक संस्थान नहीं मानती. जिसे लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट में है. संविधान के अनुच्छेद 30 (1) के मुताबिक अल्पसंख्यक शिक्षण संस्थानों को एससी/एसटी आरक्षण से छूट है, लेकिन बीजेपी सरकार एएमयू और जामिया के अल्पसंख्यक स्थिति के खिलाफ है.

VIDEO : सीएम योगी ने अल्पसंख्यक संस्थानों में दलित आरक्षण की मांग की

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अजीज बाशा केस में 1967 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एएमयू अल्पसंख्यक संस्थान नहीं है, लेकिन संसद ने 1981 में एएमयू अमेंडमेंट एक्ट पास कर उसे अल्पसंख्यक संस्थान माना. इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 2005 में 1981 के एक्ट को संविधान के खिलाफ माना, लेकिन सुप्रीम कोर्ट  ने हाईकोर्ट के आदेश को स्टे कर दिया. अब मामला सुप्रीम कोर्ट में है.


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