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यूपी में योगी सरकार को अखिलेश की योजनाएं लगती हैं फिजूलखर्ची

अब पूर्व की सपा सरकार की गोमती रिवर फ्रंट परियोजना को फिजूलखर्च बताते हुए राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पूर्व की सरकारों की फिजूलखर्च वाली परियोजनाओं को रोक दिया है.

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यूपी में योगी सरकार को अखिलेश की योजनाएं लगती हैं फिजूलखर्ची

यूपी के मंत्री सूर्य प्रताप साही

लखनऊ: उत्तर प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के  बाद से ही यूपी की नई योगी सरकार अपनी पूर्व की समाजवादी पार्टी की सरकार के कई फैसलों को बदल रही है. कुछ फैसलों पर आपत्ति जताई है और कुछ पर जांच के आदेश भी दे दिए हैं. अब पूर्व की सपा सरकार की गोमती रिवर फ्रंट परियोजना को फिजूलखर्च बताते हुए राज्य के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि योगी आदित्यनाथ की सरकार ने पूर्व की सरकारों की फिजूलखर्च वाली परियोजनाओं को रोक दिया है.

शाही ने कहा, 'पूर्व की सपा सरकार की गोमती रिवर फ्रंट और जनेश्वर मिश्र पार्क जैसी फिजूलखर्च वाली परियोजनाओं को रोक दिया गया है और इस धन का उपयोग लघु एवं सीमांत किसानों की फसल ऋण माफी योजना के तहत किये गये 36,000 करोड़ रुपये के प्रावधान के मद में किया जाएगा.

उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश सरकार किसानों की जरूरतों को लेकर संवेदनशील है और उनकी स्थिति सुधारने तथा आय बढ़ाने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी. शाही ने कहा कि इस बजट में कृषि क्षेत्र के लिए 67,682 करोड़ रुपये का आवंटन किया गया है जो अब तक का सबसे बड़ा आवंटन है. पिछले बजट का आवंटन 29,771 करोड़ रुपये था. (ये भी पढ़ें : सीएम योगी ने दिए गोमती रिवर फ्रंट घोटाले की न्यायिक जांच के आदेश, 27 मार्च को किया था दौरा)

बजट में ग्रामीण क्षेत्रों में बीहड़, बंजर एवं जल भराव वाले क्षेत्रों को सुधारने तथा कृषि मजदूरों को आवंटित भूमि का उपचार एवं आजीविका उपलब्ध कराने के लिए ‘पं0 दीनदयाल उपाध्याय किसान समृद्धि योजना’ के लिए 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गयी है. इसके अलावा फसलों की उपज बढ़ाने हेतु वर्मी कम्पोस्ट की उपलब्धता बढ़ाये जाने की योजना के लिए 19 करोड़ 56 लाख रुपये का प्रस्ताव किया गया है.

बजट में अतिदोहित, क्रिटिकल तथा सेमी क्रिटिकल विकास खण्डों में फव्वारा सिंचाई के लिए 10 करोड़ 41 लाख रुपये रखे गए हैं जबकि वैकल्पिक ऊर्जा प्रबन्धन के अन्तर्गत सोलर फोटोवोल्टेइक इरीगेशन पम्प की स्थापना योजना हेतु 125 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है. गन्ना किसानों की उपज को बाजार तक सुगमता से पहुंचाने के लिए सम्पर्क मार्गों के निर्माण हेतु 200 करोड़ रुपये तथा अनुरक्षण के लिए 250 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है.

कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कानपुर, फैजाबाद, मेरठ, बांदा एवं इलाहाबाद में फसलों पर अनुसंधान के लिये सेन्टर आफ एक्सीलेंस की स्थापना हेतु 10 करोड़ रुपये की व्यवस्था है. लघु एवं सीमांत किसानों की आय बढ़ाने हेतु संकर शाकभाजी उत्पादन एवं प्रबंधन के लिए 25 करोड़ रुपये का प्रावधान है जबकि भारत सरकार के सहयोग से 20 जनपदों में 20 नये कृषि विज्ञान केन्द्रों की स्थापना प्रस्तावित है.


 


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