तेलंगाना से अलग है विकास दुबे का एनकाउंटर, पुलिस पर हमले के लिए तैनात थे 80 बदमाश : यूपी सरकार

यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि यह एनकाउंटर तेलंगाना मुठभेड़ से अलग था. वहां आरोपी हार्ड कोर अपराधी नहीं थे, लेकिन विकास दुबे पर 64 आपराधिक मामले दर्ज थे. तेलंगाना में आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाया गया लेकिन यहां एक दुर्घटना हुई.

तेलंगाना से अलग है विकास दुबे का एनकाउंटर, पुलिस पर हमले के लिए तैनात थे 80 बदमाश : यूपी सरकार

विकास दुुबे एनकाउंटर मामले की सुनवाई अब सुप्रीम कोर्ट में 20 जुलाई को होगी

नई दिल्ली :

यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा है कि यह एनकाउंटर तेलंगाना मुठभेड़ से अलग था. वहां आरोपी हार्ड कोर अपराधी नहीं थे, लेकिन विकास दुबे पर 64 आपराधिक मामले दर्ज थे. तेलंगाना में आरोपियों को घटनास्थल पर ले जाया गया लेकिन यहां एक दुर्घटना हुई और इसे साबित करने के लिए सामग्री साक्ष्य उपलब्ध हैं.  वहीं यूपी सरकार ने भी यह कहा कि तेलंगाना ने मजिस्ट्रेट जांच या न्यायिक आयोग का आदेश नहीं दिया लेकिन जहां यूपी ने जांच आयोग का गठन किया है वहीं एसआईटी भी गठित की है. विकास दुबे  ने 80 के आसपास अपराधी छत के ऊपर तैनात  किए थे. उसने आत्मसमर्पण नहीं किया, बल्कि उसे उज्जैन पुलिस ने हिरासत लिया था. 

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यूपी सरकार ने कहा कि दुर्घटना स्थल (भौंती) के पास कोई बसावट नहीं थी और इसलिए स्थानीय लोग गोलियों की  की आवाज सुनकर नहीं आए. विकास दुबे पर पुलिस ने 6 गोलियां चलाईं जिनमें से तीन उसको लगी हैं. विकास दुबे के पैर में  रॉड प्रत्यारोपण हुआ था. लेकिन उसे भागने में कोई दिक्कत नहीं थी.  वो 3 जुलाई को पुलिसकर्मियों को मारने के बाद 3 किमी दौड़ा था.   सरकार ने कहा है कि यह केवल संक्षिप्त उत्तर है और यदि समय दिया जाए तो अधिक तथ्य दर्ज किए जाएंगे. सुप्रीम कोर्ट इस मामले की अगली सुनवाई 20 जुलाई को करेगा.

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विकास दुबे ने बीती 3 जुलाई को गिरफ्तार करने गई पुलिस टीम पर अपने गुर्गों के साथ मिलकर 8 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी. पुलिस आने की खबर उसको पहले लग चुकी थी. लेकिन उसने भागने के बजाए हमला करने की साजिश रची और अपने गुर्गों के साथ मिलकर पुलिस टीम पर फायरिंग कर दिया. इस घटना में डीएसपी देवेंद्र मिश्रा ने भी जान गंवाई थी. इस घटना को अंजाम देने के बाद करीब 6 दिन बाद विकास दुबे को उज्जैन में महाकाल मंदिर से गिरफ्तार किया गया. मध्य प्रदेश पुलिस ने उसे .यूपी एसटीएफ को सौंप दिया. इसके बाद कानपुर से 30 किलोमीटर दूर भौंती के पास एक कथित दुर्घटना के बाद उसने भागने की कोशिश की जहां पुलिस ने उसको एनकाउंटर में मार गिराया.