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यूपी निकाय चुनाव : इन 5 कारणों से हुई बसपा की निकाय चुनाव में वापसी

बसपा का इस चुनाव में ओवर ऑल प्रदर्शन देखा जाए तो ये कहा जा सकता है कि बसपा ने निकाय चुनाव से अपनी वापसी के संकेत दिये हैं. 

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यूपी निकाय चुनाव : इन 5 कारणों से हुई बसपा की निकाय चुनाव में वापसी

फाइल फोटो

खास बातें

  1. भाजपा लहर के बावजूद बसपा दो सीट जीतने में कामयाब.
  2. मायावती ने निकाय चुनाव को गंभीरता से लिया.
  3. सपा और कांग्रेस से आगे निकली मायावती की बसपा.
लखनऊ: यूपी निकाय चुनाव में भले ही भारतीय जनता पार्टी विधानसभा चुनाव की तरह की ऐतिहासिक जीत दर्ज करने में सफल रही, मगर नतीजे कुछ हद तक बहुजन समाजवादी पार्टी के लिए भी सुखद रहे. भाजपा निकाय चुनाव में महापौर के लिए 16 सीटों में से 14 सीट जीतने में कामयाब रही, वहीं दो सीटें बसपा छीन ले गई. बसपा के लिए ये दो सीटें ही काफी अहम इसलिए भी हैं क्योंकि भाजपा की लहर में जहां सपा और कांग्रेस का सुपड़ा साफ हो गया, वैसी स्थिति में दो सीटें निकाल लेना बसपा के लिए किसी वापसी से कम नहीं है. बसपा का इस चुनाव में ओवर ऑल प्रदर्शन देखा जाए तो ये कहा जा सकता है कि बसपा ने निकाय चुनाव से अपनी वापसी के संकेत दिये हैं. 

तो चलिए जानते हैं कि इस चुनाव के बहाने आखिर वो मायावती की पार्टी बसपा कैसे एक बार फिर से प्रदेश में वापसी कर चुकी है.

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पहला कारण: जहां भाजपा ने महापौर पद के लिए 16 में से 14 सीट जीतकर सपा और कांग्रेस को तरसा दिया, वैसे एकतरफा हवा में से बहुजन समाजवादी पार्टी मेयर की दो सीटें निकालने में कामयाब हो गईं, ये कम बात नहीं है. यानी कि बीजेपी लहर से बसपा ने दो सीटें जीत कर ये साबित कर दिया है कि उनका पार्टी की वापसी अब हो रही है और इस मामले में वो अब कांग्रेस और सपा से आगे निकल गई है. 

दूसरा कारण: बसपा ने लोकसभा चुनाव और विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार से सबक लेने की कोशिश की है. जिस तरह से लोकसभा और विधानसभा चुनाव में मायावती की पार्टी की हार हुई इसके लिए बसपा को वर्क आउट करने की जरूरत थी और उससे सबक भी लेने की. यही वजह है कि अपनी गलतियों से सबक लेते हुए बसपा ने लोगों के साथ सीधा संवाद स्थापित किया है और निकाय चुनाव में बीजेपी को टक्कर देने में कामयाब रही. 

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तीसरा कारण: बसपा ने इस चुनाव में काफी संगठनात्मक तौर पर काम किया. बसपा ने अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए कार्यकर्ता से सीदा जुड़ाव का अभियान चलाया और वोटर्स से सीधा संवाद स्थापित करने में यकीन किया. बसपा को मिल रही हार ने उसे ये एहसास करा दिया था कि जमीनी स्तर पर जब तक पार्टी को मजबूत नहीं किया जाएगा, तब तक पार्टी की वापसी मुश्किल होगी. इन्हीं बातों को ध्यान में रखकर बसपा ने ये निकाय चुनाव लड़ा.

चौथा कारण: बसपा की वापसी की सबसे बड़ी वजह पार्टी की मुखिया मायावती रहीं. इस चुनाव को पार्टी ने काफी गंभीरता से लिया था. बेशक निकाय चुनाव में बेशक मायावती ने रैलियां नहीं कीं, लेकिन पूरे चुनाव प्रचार अभियान पर उन्होंने अपनी नजर बनाए रखी.

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पांचवा कारण: भाजपा की रणनीतियों का असर बसपा पर चुनाव प्रचार के दौरान दिखा. बसपा ने भी इस चुनाव में जीत हासिल करने के लिए रैलियों और चुनावी अभियान को ही तवज्जो दी. खुद मायावती और पार्टी के और भी कई कद्दावर नेताओं ने रैलियां कीं. पार्टी ने डोर-टू-डोर कैंपेन किया और बूथ लेवल तक के कार्यकर्ताओं को जोड़ा.

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