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उत्तर प्रदेश: थाने के बाहर खड़े बेटे को दिए चिप्स, अंदर पिता की कर दी हत्या; तीन पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज

तीन पुलिस कर्मियों और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कथित तौर पर हिरासत में किसान की मौत के प्रकरण में हत्या का मामला दर्ज किया गया है.

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उत्तर प्रदेश: थाने के बाहर खड़े बेटे को दिए चिप्स, अंदर पिता की कर दी हत्या; तीन पुलिस कर्मियों पर केस दर्ज

Uttar Pradesh: हिरासत में किसान की मौत का मामला

खास बातें

  1. हिरासत में किसान की मौत का प्रकरण
  2. DSP समेत 3 पुलिसकर्मियों पर हत्या का केस दर्ज
  3. मृतक भाई की शिकायत के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज
उत्तर प्रदेश:

तीन पुलिस कर्मियों और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ कथित तौर पर हिरासत में किसान की मौत के प्रकरण में हत्या का मामला दर्ज किया गया है. अधिकारियों ने शुक्रवार को बताया कि गुरुवार रात को मृतक प्रदीप तोमर के भाई कुलदीप तोमर की शिकायत के आधार पर एक प्राथमिकी दर्ज की गई. करीब डेढ़ महीने पहले 35 वर्षीय प्रदीप को अपनी पत्नी की हत्या के मामले में पूछताछ के लिए हापुड़ के पिलखुवा इलाके में छिजारसी पुलिस थाने में हिरासत में लिया गया था.

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मृतक के परिवार ने आरोप लगाया था कि प्रदीप को पूछताछ के दौरान बेरहमी से पीटा गया, जिससे उसकी हालत बुरी तरह बिगड़ गई. आरोप में यह भी कहा गया कि प्रदीप से पूछताछ के दौरान उसका 10 साल का बेटा पुलिस चौकी के बाहर इंतजार करता रहा. इतना ही नहीं, बच्चे को पूरी रात बाहर बैठाकर रखा और उसे खाने के लिए चिप्स देकर चुप रहने को कहा. प्रदीप तोमर के बेटे ने NDTV को बताया कि हमें टोल टैक्स बूथ से उठाया. उनके साथ बहुत बुरी तरह से मारपीट की गई. उन्होंने बिजली के झटके दिए. उन्होंने उसे लाठियों से मारा और उस पर पेचकस से वार किया. उन्होंने मेरे मुंह में बंदूक डाल दी और मुझे धमकी दी कि अपना मुंह बंद रखूं. बाद में, पुलिसकर्मियों में से एक ने मुझे चिप्स का एक पैकेट दिया, क्योंकि मैं थाने के बाहर खड़ा था, चिल्ला रहा था. वे मेरे पिता के साथ यह सब करते हुए मारपीट करते रहे.'' आरोप यह भी है कि पुलिसवालों ने पी रखी थी. 

हापुड़ के पुलिस अधीक्षक यश वीर सिंह ने पीटीआई-भाषा को बताया कि इस मामले में भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) और 323 (हमला) के तहत क्षेत्राधिकारी संतोष कुमार, थाना प्रभारी योगेश बालियान, उप-निरीक्षक अजब सिंह और एक अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है.


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पुलिस के मुताबिक, थाना प्रभारी योगेश बालियान और उप-निरीक्षक अजब सिंह को पहले ही एक कांस्टेबल के साथ निलंबित कर दिया गया है. राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य सचिव और राज्य के पुलिस प्रमुख को नोटिस जारी कर मामले पर उनकी रिपोर्ट मांगी थी, जिसके बाद यह कार्रवाई की गयी.

आयोग के बयान के अनुसार, मीडिया से प्राप्त जानकारी के मुताबिक यह पुलिस हिरासत में एक व्यक्ति के मानवाधिकारों के उल्लंघन का मामला है, जिसके लिए राज्य की पुलिस की जवाबदेही बनती है. एनएचआरसी ने पुलिस महानिदेशक ओ पी सिंह को निर्देश दिया है कि वह आरोपी पुलिस कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई के बारे में और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए उठाए गए कदमों के बारे में अपनी कार्रवाई रिपोर्ट में जानकारी दें.

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आयोग ने मुख्य सचिव से पीड़ित परिवार की, खास तौर पर मृतक के नाबालिग बेटे की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है जो हिरासत में अपने पिता की कथित यातना और मौत के आघात से गुजर रहा है. एनएचआरसी ने कहा, ‘‘चार सप्ताह में दोनों प्राधिकरणों से विस्तृत रिपोर्ट मिलने की उम्मीद है.''



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