UP में बुखार से बच्चे की मौत, अस्पताल में बेटे के शव से लिपटकर रोता रहा पिता, लापरवाही का लगाया आरोप

बच्चे की मौत से दुखी पिता ने बताया कि उनके बेटे को बुखार और गले में सूजन थी. उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्चे को छूने से मना कर दिया.

UP में बुखार से बच्चे की मौत, अस्पताल में बेटे के शव से लिपटकर रोता रहा पिता, लापरवाही का लगाया आरोप

पीड़ित पिता ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से बच्चे की मौत होने का आरोप लगाया है

खास बातें

  • बच्चे की लाश को सीने से चिपटाये फूट फूट कर रोता रहा पिता
  • पिता ने सही वक्त पर इलाज नहीं मिलने का लगाया आरोप
  • अस्पताल ने लापरवाही के आरोपों को किया खारिज
लखनऊ:

उत्तर प्रदेश के कन्नौज (Kannauj) में एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है. कन्नौज के जिला अस्पताल के बाहर रविवार शाम एक दर्दनाक नज़ारा देखने को मिला. यहां एक शख्स के अपने एक साल के बच्चे के शव से लिपटकर अस्पताल में रोने का वीडियो सामने आया है. वीडियो में एक शख्स अपने मृत बच्चे को सीने से चिपकाये फूट-फूटकर रोता हुआ नजर आ रहा है. पास ही बैठी उसकी पत्नी भी बुरी तरह रो रही है. जिसने भी यह नजारा देखा उसकी आंखों में आंसू आ गए.

पीड़ित पिता ने अस्पताल प्रशासन की लापरवाही से बच्चे की मौत होने का आरोप लगाया है. बच्चे के पिता का आरोप है कि अस्पताल ने उसके बच्चे का वक़्त पर इलाज नहीं किया जिससे उसकी मौत हो गई. लेकिन अस्पताल का कहना है कि बच्चा वायरल इन्सेफेलाइटिस का शिकार था और बहुत गंभीर हालत में अस्पताल लाया गया था. उसे इमरजेंसी में भर्ती कर डॉक्टर से इलाज कराने की कोशिश की गई लेकिन आधे घंटे में ही उसकी मौत हो गई.

बच्चे की मौत से दुखी पिता ने बताया कि उनके बेटे को बुखार और गले में सूजन थी. उन्होंने आरोप लगाया कि अस्पताल के डॉक्टरों ने बच्चे को छूने से मना कर दिया और कानपुर में किसी बड़े अस्पताल में लेकर जाने को कहा. उन्होंने बताया कि कुछ लोगों ने इसका वीडियो बनाने शुरू कर दिया, जिसके बाद बच्चे को इमरजेंसी रूम में जांच के लिए ले जाया गया. 

बच्चे के माता पिता कन्नौज के मिश्री गांव के रहने वाले हैं. उसके पिता प्रेमचंद का कहना है कि ज़िला अस्पताल में कोई डॉक्टर उसके बच्चे का इलाज करने को तैयार नहीं था. वे कह रहे थे कि बच्चे को इलाज के लिए कानपुर ले जाओ. जब वो बाहर परेशान घूम रहा था तभी कुछ मीडिया वाले आ गए. उसके बाद डॉक्टरों ने उसे भर्ती किया लेकिन फौरन ही उसकी मौत हो गई. प्रेमचंद का कहना है कि वह ग़रीब आदमी है इसलिए वो अपने बच्चे को कानपुर इलाज के लिए नहीं ले जा सका.

अस्पताल के डॉक्टरों और जिला प्रशासन ने परिजनों के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि बच्चे को इमरजेंसी रूम में प्राथमिक उपचार दिया गया था लेकिन उसकी हालात काफी गंभीर थी और उनके प्रयासों के बावजूद 30 मिनट के अंदर बच्चे की मौत हो गई. उन्होंने कहा कि इसमें लापरवाही को कोई मामला नहीं है.  

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कन्नौज के डी एम राकेश कुमार मिश्रा का कहना है कि उन्होंने अस्पताल केसीएमएस से इस बारे में तफ्तीश की थी. पहली नज़र में इसमें अस्पताल की गलती नही लगती है. बच्चा अस्पताल में ज़्यादा गम्भीर हालात में लाया गया था इसलिए उसकी मौत जो गई.

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