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वाराणसी में मकर संक्रांति के मौके पर देश का पहला टॉयलेट मेला

मकर संक्रांति के मौके पर जिला प्रशासन ने वाराणसी के जलालपुर गांव मे संक्रांति स्वच्छता मेला का आयोजन किया. इस आयोजन में एक ही दिन में 1100 शौचालय बनाया गया और लोगों को उसकी सौगात दी गई.

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वाराणसी में मकर संक्रांति के मौके पर देश का पहला टॉयलेट मेला

51 गांव को ओडीएफ यानी खुले में शौच मुक्त गांव घोषित किया गया

वाराणसी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में मकर संक्रांति का दिन बहुत खास रहा क्योंकि इस मौके पर यहां संक्रांति शौचालय दिवस मनाया गया. जिले के आरजी लाइन ब्लाक के 7 गांवों को 1100 शौचालय की सौगात एक साथ एक ही दिन दी गई. इसके अलावा 51 गांव को ओडीएफ यानी खुले में शौच मुक्त गांव घोषित भी किया गया. मकर संक्रांति पर एक बड़े संदेश के साथ संक्रांति शौचालय दिवस अपने तरह का अनूठा आयोजन है.

मकर संक्रांति के मौके पर जिला प्रशासन ने वाराणसी के जलालपुर गांव मे संक्रांति स्वच्छता मेला का आयोजन किया. इस आयोजन में एक ही दिन में 1100 शौचालय बनाया गया और लोगों को उसकी सौगात दी गई. प्रशासन ने इस दिन को इसलिये चुना क्‍योंकि ये पर्व अपने अपने पाप को धो कर पूण्य के लिये है और समाज का सबसे बड़ा अभिशाप है खुले में शौच करना, लिहाजा इसी दिन ही समाज को इस अभिशाप से मुक्त कराने का संकल्प लिया जाये. जाधिकारी योगेश्वर राम मिश्रा और तफसील से बताते हुए कहते हैं कि 'आज मकर संक्रांति है. आज से खरमास के बाद अच्छे दिन शुरू होते हैं. आज से सूर्य पूरी तरह अपनी गति को प्रदान करते हैं, आज सभी पवित्र नदियों में अपने शरीर के विकार को धोने के लिए स्नान किया जाता है. इसलिए गन्दगी से निस्तारण के लिए आज संकल्प लिए गया है.'

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जिस समय ये लोग इस स्वच्‍छता संक्रांति मेले में जुटे थे, उसी वक्त उनके गांव में हर घर के बाहर गड्ढे खुद रहे थे. शौचालय की दीवार खड़ी हो रही थी. और जब ये लोग अपने हाथ में यहां से शौचालय का सर्टिफिकेट लेकर निकले तब तक इनके घरों में शौचालय बन कर तैयार हो चुका था. आराजी लाइन के जलालपुर, मोहराई, कल्लीपुर, बसंत पट्टी, हरसोसपुर, बेनीपुर और वीरभानपुर गांव को शौचालयों की सौगात एक ही दिन में दी गई है. मकर संक्रांति के दिन इस शौचालय को पा कर जहां महिलाएं खुश थीं तो वहीं खुले में शौच न जाने के लिये लोगों को जागरूक भी कर रही थीं. निगरानी समिति की सदस्य अनिता देवी बताती हैं कि गांव को खुले में शौच से मुक्त कराना है क्‍योंकि खुले में शौच से कई प्रकार की गंभीर बीमारियां फैलती हैं. हमलोगों का लक्ष्य है कि अपने गांव में लोगों को जागरूक कर शौचालय में जाने के लिए प्रेरित करें.'

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ऐसा पहली बार हुआ जब मकर संक्रांति के पर्व को स्वच्छता पर्व के रूप में मनाया गया. प्रशासन की पूरी कोशिश है कि 31 मार्च 2018 तक पूरे जनपद को ओडीएफ घोषित कर दिया जाए. पूरे जनपद में दो लाख तीन हजार शौचालय बनाने हैं जिनमें से एक लाख 51 हजार शौचालय बनाए चुके हैं. जब ये यात्रा शुरू हुई थी तब 47 शौचालय प्रतिदिन बनाने का लक्ष्य था, आज वो उपलब्धि 900 तक पहुंच चुकी है.


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