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गर्भवती पत्नी की जान बचाने के लिए जब मासूम बेटे का कर दिया 'सौदा'

गर्भवती पत्नी की जान बचाने के लिए जब पति ने एक साल के बेटे को बेचने की कोशिश की. मामला यूपी के कन्नौज का है.

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गर्भवती पत्नी की जान बचाने के लिए जब मासूम बेटे का कर दिया 'सौदा'

कन्नौज में जब पत्नी का इलाज कराने के लिए व्यक्ति ने बेटे को बेचने की कोशिश की.

खास बातें

  1. उत्तर प्रदेश के कन्नौज में चौंकाने वाला मामला
  2. पत्नी के इलाज के लिए मासूम को बेचने की कोशिश
  3. चौंकी इचार्ज ने अपनी जेब से पैसा भर कराया इलाज
नई दिल्ली: अपनों की जान बचाने के लिए आपने मकान और जमीन बेंचते तो सुना होगा, लेकिन बेटे को बेंचते हुए शायद ही किसी ने सुना हो. गरीबी और लाचारी में एक युवक ने ऐसा ही कदम उठा लिया. प्रसव पीड़ा से जूझ रही पत्नी के इलाज के लिए जब पैसे कम पड़े, तो उसने पत्नी और पेट में पल रहे बच्चे की जान बचाने के लिए अपने एक बेटे का सौदा कर दिया.

मामला कन्नौज के सौरिख थानाक्षेत्र के गांव बरेठी दारापुर का है. गरीब आदमी की बीमार पत्नी को जब ज़िला अस्पताल में चिकित्सकों ने भर्ती करने से मना कर दिया, तो अपनी पत्नी की जान बचाने के लिए उसने एक साल के बेटे को बेचने की कोशिश की. इस बात की जानकारी जब पुलिस को मिली तो चौकी प्रभारी बृजेंद्र कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे. जब उन्होंने परिवार की हालत जानी तो उन्होंने पहले बीमार महिला को अस्पताल में भर्ती कराया और फिर महिला के इलाज का पूरा खर्च खुद उठाने की बात कही.

गांव के रहने वाले अरविंद बंजारा बेहद गरीब हैं। उनकी एक चार वर्ष की एक बेटी रोशनी और एक साल का बेटा जानू है. पत्नी सुखदेवी को बुधवार सुबह अचानक तेज प्रसव पीड़ा होने लगी.इससे वह पत्नी को जिला अस्पताल ले गया. जहां चिकित्सकों ने उसके शरीर में बेहद कम खून पाया. इससे उसे रेफर कर दिया. इसके बाद अरविंद बंजारा पत्नी को लेकर जिला अस्पताल कन्नौज ले आया. जहां उसे भर्ती नहीं किया गया. अरविंद ने आरोप लगाया कि जिला अस्पताल में नर्सों ने उससे 25 हजार रुपये की मांग की. पैसे न होने पर वह पत्नी को लेकर मेडिकल कालेज पहुंचा. जहां सुखदेवी की नाजुक हालत देखकर चिकित्सकों ने भर्ती नहीं किया. पत्नी के इलाज के लिए पैसे न होने पर अरविंद ने अपने एक वर्षीय बेटे जानू को बेंचने का फैसला कर लिया.

पत्नी और बच्चों के साथ मेडिकल कालेज के गेट पर आकर एक युवक से सौदा करने लगा. अरविंद ने पत्नी और उसके गर्भ में पल रहे बच्चे की जान बचाने के लिए 30 हजार रुपये में बच्चे को बेंचने की बात कही, लेकिन खरीददार 25 हजार रुपये देने को राजी हुआ. खरीददार अपनी पत्नी से बच्चे को खरीदने की राय लेने घर चला गया. तभी कुछ लोगों ने इसकी सूचना पुलिस को दे दी. इससे मौके पर पहुंचे मेडिकल कालेज चौकी प्रभारी बृजेंद्र कुमार पुलिस बल के साथ पहुंच गए और अरविंद व उसकी पत्नी से पूछताछ की. अरविंद ने बताया कि वह बेहद गरीब है. पत्नी और पेट में पल रहे बच्चे को बचाने के लिए उसने अपने बेटे को बेंचने का फैसला लिया था.इसके बाद चौकी प्रभारी ने गंभीर हालत में सुखदेवी को मेडिकल कालेज में भर्ती कराया. चौकी प्रभारी ने सुखदेवी के इलाज में खर्च होने वाले पैसों की जिम्मेदारी ली.

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