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मोदी-शाह किसे बनाएंगे 'यूपी का किंग'? इन 6 नेताओं पर है सबकी नजरें

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मोदी-शाह किसे बनाएंगे 'यूपी का किंग'? इन 6 नेताओं पर है सबकी नजरें

इस बार के चुनाव परिणाम में साबित हो गया है कि बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग गैर-यादव ओबीसी और ईबीसी रही.

खास बातें

  1. मनोज सिन्हा मुख्यमंत्री की रेस में सरप्राइज चेहरा हो सकते हैं.
  2. सोशल इंजीनियरिंग के हिसाब से केशव मौर्य हैं विकल्प.
  3. लखनऊ के मेयर दिनेश शर्मा भी हैं सीएम की रेस में.
लखनऊ: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है. 403 विधानसभा सीटों में से बीजेपी के खाते में 324 सीटें (शाम पांच बजे तक बीजेपी 272 सीटें जीत चुकी है, बाकी पर आगे चल रही है) जाती दिख रही है. यूपी में बीजेपी की अब तक की सबसे बड़ी जीत के साथ ही इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि देश के सबसे बड़े सूबे का मुख्यमंत्री कौन बनेगा? चुनाव के दौरान जानकार कह रहे थे कि बीजेपी के पास मुख्यमंत्री चेहरा नहीं है, इसलिए उसे इसका नुकसान उठाना पड़ सकता है. परिणाम आने के बाद पता चला कि पीएम मोदी के चहरे पर चुनाव लड़ने से बीजेपी को फायदा हुआ है. आइए एक नजर में जानें कौन-कौन से वो बीजेपी के नेता हैं जो मुख्यमंत्री बन सकते हैं.

केशव प्रसाद मौर्य: इस बार के चुनाव परिणाम में साबित हो गया है कि बीजेपी की सोशल इंजीनियरिंग गैर-यादव ओबीसी और ईबीसी रही. ठीक यही सोशल इंजीनियरिंग के दम पर कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने थे. ऐसे में इस रेस में एक विकल्प केशव प्रसाद मौर्य बन हैं. यूं तो जीत का श्रेय पीएम मोदी और अमित शाह की जोड़ी को माना जा रहा है, पर पार्टी का पूरा मैनेजमेंट केशव प्रसाद मौर्य के हाथों में ही था. ऐसे में स्वभाविक है कि इसका काफी श्रेय केशव प्रसाद को जाएगा, जैसा कि महाराष्ट्र चुनाव में प्रदेश अध्यक्ष होने के नाते देवेन्द्र फडणवीस को मिला था. केशव पार्टी के पुराने कार्यकर्ता हैं और उनका संघ से भी जुड़ाव रहा है. झारखंड, महाराष्ट्र, हरियाणा में सरप्राइज चेहरे को मुख्यमंत्री चुनने के ट्रेंड पर नजर डालें तो भी उत्तर प्रदेश में केशव प्रसाद मौर्य बीजेपी के पहले विकल्प हो सकते हैं. 

मनोज सिन्हा: केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा अपने अच्छे कामों के लिए पार्टी में जाने जाते हैं. कहा जाता है कि उन्हें यूपी की सभी 403 सीटों के बारे में सटीक जानकारी होती है. अमित शाह और नरेंद्र मोदी की जोड़ी अक्सर बड़ी जिम्मेदारी के लिए नए चेहरे का चुनाव करते रहे हैं. इनके फैसलों से जनता अचंभे में पड़ती रही है. उदाहरण के लिए केशव प्रसाद मौर्य को यूपी प्रदेश का अध्यक्ष बनाना, पड़ोसी राज्य बिहार में नित्यानंद राय को और झारखंड में ताला मरांडी को प्रदेश अध्यक्ष चुनना जैसे फैसले चौंकाने वाले हैं. ठीक इसी तरह यूपी के मुख्यमंत्री पद के लिए मनोज सिन्हा चौंकाने वाले नाम हो सकते हैं. गृहमंत्री राजनाथ सिंह के करीबी मनोज सिन्हा उस पूर्वांचल से आते हैं, जहां प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सबसे ज्यादा फोकस रहता है. पीएम बतौर रेल राज्यमंत्री मनोज सिन्हा के काम की तारीफ भी कर चुके हैं.
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UP chunav में योगी आदित्यनाथ मुख्यमंत्री के प्रबल दावेदार माने जा रहे हैं.

योगी आदित्यनाथ: वर्तमान राजनीतिक परिस्थिति में उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ बीजेपी के एकलौते फायर ब्रांड नेता हैं. विधानसभा चुनाव से पहले तक आदित्यनाथ पूर्वांचल तक ही सिमित थे, लेकिन इस बार पार्टी ने उनसे पश्चिमी यूपी में भी जमकर प्रचार कराया है. बीजेपी के स्टार प्रचारक के रूप में उन्होंने सबसे ज्यादा रैलियां की हैं. उन्होंने हर भाषण में वही शब्द कहे, जिससे वोटों का धुर्व्रीकरण हो सके. बीजेपी की जीत का श्रेय आदित्यनाथ को भी जाएगा. यूपी बीजेपी के वे इकलौते बड़े नेता था थे जो 300 सीटें जीतने का दावा करते थे, वही सच भी हुआ है. ऐसे में आदित्यनाथ मुख्यमंत्री के दावेदार हो सकते हैं.

दिनेश शर्मा: लखनऊ के राजनीतिक गलियारों में बीजेपी के मुख्यमंत्री पद के लिए दिनेश शर्मा के नाम की भी चर्चा है. लखनऊ के मेयर व बीजेपी नेता दिनेश शर्मा यूपी के उन गिने चुने नेताओं में से हैं, जिन्हें पार्टी के अच्छे दिनों में सबसे ज्यादा इनाम मिला. सरकार बनने के तुरंत बाद पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की कुर्सी मिली. अमित शाह उन्हें कितना पसंद करते हैं इसका अंदाजा इस बात से लगा सकते हैं कि उन्हें पीएम मोदी के ही राज्य गुजरात का पार्टी प्रभारी बनाया गया. नवंबर 2014 में उन्हें पार्टी का राष्ट्रीय सदस्यता प्रभारी बनाया गया. इस दौरान उन्होंने बीजेपी को दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा दिलाया. वे कल्याण सिंह और कलराज मिश्र के भी खास हैं. साल 2006 में अटल बिहारी बाजपेयी ने अपना आखिरी भाषण भी दिनेश शर्मा को चुनाव जिताने के लिए दिया था. 2014 में नामांकन का पर्चा खरीदने के बाद राजनाथ सिंह के लिए वह पीछे हुए.

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राजनाथ सिंह: चर्चा है कि पीएम नरेंद्र मोदी एक बार फिर से केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह को राज्य की राजनीति में लौटने को कह सकते हैं. पार्टी को प्रचंड बहुमत मिली है तो वे चाहेंगे कि कोई ऐसा चेहरा मुख्यमंत्री की कुर्सी पर बैठे जो सर्वमान्य हो.

संतोष गंगवार: केंद्रीय वित्त-राज्यमंत्री संतोष गंगवार का नाम भी मुख्यमंत्री की रेस में है. 2014 के लोकसभा चुनाव में 16 वीं लोकसभा के लिए बतौर सांसद उन्होंने चुनाव जीता और अपने सियासी विरोधी को 2.4 लाख मतों से चुनाव में शिकस्त दी. वित्त-राज्यमंत्री बनने से पहले गंगवार  पेट्रोलियम और नेचुरल गैस राज्यमंत्री थे. इसके साथ ही उन्हें संसदीय कार्य की भी अतिरिक्त जिम्मेदारी दी गई थी. वर्ष 1999 में वो साइंस एंड टेक्नोलॉजी राज्यमंत्री भी रह चुके हैं. 1989 के बाद से ही गंगवार बीजेपी के स्टेट वर्किंग कमेटी के सदस्य भी हैं.
 


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