फेसबुक पर कुछ भी पोस्ट करने से आखिर क्यों डरने लगा है यह 16 साल का लड़का?

पूरा मामला पिछले साल अगस्त का है, जब पीड़ित लड़के ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के दिन अपने फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट लिखा. इस पोस्ट में उसने अटल बिहारी वाजपेयी को बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए जिम्मेदार बताया था.

फेसबुक पर कुछ भी पोस्ट करने से आखिर क्यों डरने लगा है यह 16 साल का लड़का?

फेसबुक पोस्ट को लेकर 39 दिन हिरासत में रहना पड़ा

खास बातें

  • अटल बिहारी वाजपेयी को लेकर किया था पोस्ट
  • डॉक्टर बनना चाहता है लड़का
  • पिछले साल का है पूरा मामला
मेरठ:

उत्तर प्रदेश के मेरठ में रहने वाले एक 16 साल के लड़के को इस बात का अंदाजा भी नहीं था कि उसे अपनी एक फेसबुक पोस्ट के लिए 39 दिनों तक बाल सुधार गृह में रहना होगा. दरअसल, पूरा मामला पिछले साल अगस्त का है, जब पीड़ित लड़के ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के दिन अपने फेसबुक वॉल पर एक पोस्ट लिखा. इस पोस्ट में उसने अटल बिहारी वाजपेयी को बाबरी मस्जिद विध्वंस के लिए जिम्मेदार बताया था. लड़के का यह पोस्ट उस दौरान काफी वायरल हुआ औऱ बाद में पुलिस ने मामले की जांच शुरू की. इस मामले की जांच के बाद पुलिस ने पहले लड़के को पकड़ा और उसे 39 दिनों तक हिरासत में रखा गया. इस घटना का लड़के के परिवार और खुद उसपर ऐसा प्रभाव पड़ा कि उसने औरउसके परिवार ने यह तय किया कि वह पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी को लेकर फेसबुक पर कुछ भी नहीं लिखेंगे. 

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पिछले साल उस पोस्ट के वायरल होने के बाद पहले यूपी पुलिस मेरठ स्थित उसके गांव पहुंची. उसके परिवार से लड़के के बारे में पूछताछ की गई. चुकि लड़का पुलिस के पहुंचने से पहले ही दिल्ली आ गया था इस वजह से पुलिस ने उसके पिता को पूछताछ के लिए जेवर स्थित पुलिस थाने आने को कहा. बाद में इसकी सूचना लड़के को दी गई और आखिरकार लड़के ने अगले ही दिन पुलिस की पूछताछ में हिस्सा लिया. इसके बाद ही उसके पिता को थाने से छोड़ा गया. 

एनडीटीवी से बातचीत में लड़के ने बताया कि उस दौरान मुझे पता चला था कि मेरे पोस्ट को आरएसएस और बजरंग दल वाले अपने-अपने फेसबुक पेज पर लगा रहे हैं और वायरल भी कर रहे हैं. पोस्ट लिखने के एक दिन बाद ही मुझे पता चला कि मेरे खिलाफ एक मुकदमा दर्ज कराया गया है. शिकायत हिंदू जागरण मंच द्वारा की गई थी. 

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पुलिस ने बाद में लड़के को दो समुदाय के बीच द्वेष फैलाने के आरोप में बाल सुधार गृह भेज दिया. साथ ही उसपर कई और चार्ज भी लगाए गए. पीड़ित लड़के के 23 वर्षीय भाई को भी अपने छोटे भाई की पोस्ट को शेयर करने की सजा दी गई. उसके खिलाफ भी मामला दर्ज  किया गया. हालांकि उसे बाद में जमानत मिल गई थी. 

बाल सुधार गृह और हिरासत में रहकर निकल लड़के ने एनडीटीवी से बातचीत में कहा कि मैं एक डॉक्टर बनना चाहता हूं. उसने बताया कि उसकी जिंदगी के वो 39 दिन काफी भयावक थे. मैं ऐसे परिवार से आता हूं जहां कोई नशा नहीं करता लेकिन हिरासत में मुझे ऐसे बच्चों के साथ रखा गया जहां हर कोई नशा कर रहा था. वहां का खाना भी उतना अच्छा नहीं था. जहां मुझे रखा गया था उस जगह मेरे अलावा जितने भी बच्चे थे वो सब नशा करते थे. उन्हें हर नशे की आदत लग चुकी थी. मैं NEET की तैयारी कर रहा था ताकि मैं डॉक्टर बन सकूं. लेकिन इस घटना ने मेरे करियर पर ही दाग सा लगा दिया है. अपने खिलाफ मुकदमा दर्ज होने की वजह से अब डर लगता है कि क्या मैं डॉक्टर बन पाऊंगा. 

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हालांकि, इस घटना के बाद उसे सामाजिक तौर पर लोगों के बहिष्कार को झेलना पड़ा. और उसे इस बात का सबसे ज्यादा दुख है. मुझे इस घटना के बाद काफी लोगों का साथ मिला लेकिन मेरे दोस्तों की संख्या पहले की तुलना में काफी कम हो गई. पता नहीं कहां से इसे एक सांप्रदायिकता रूप दे दिया गया. वो लोग ऐसा सोचते हैं कि चुकि मैंने अटल बिहारी वाजपेयी जी के बारे में ऐसा लिखा इसलिए मैं एक कट्टर मुसलमान हूं. इससे बहुत दिक्कत हुई. हालांकि सोशल मीडिया पर जो मेरे दोस्त हैं उन्होंने मेरा पूरा साथ दिया. वो कहते हैं कि मैनें कुछ भी गलत नहीं किया है. मुझे मेरे गैर-मुसलमान दोस्तों ने पूरी तरह से छोड़ दिया है. वो मुझसे बात तक नहीं करते हैं. हालांकि कुछ स्कूल समय के दोस्त हैं जो बात करते हैं लेकिन ऐसे दोस्त भी कम ही हैं.