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क्यों सूख गए चंदेलकालीन तालाब, बांदा के इस गांव ने जल संरक्षण को लेकर पेश की मिसाल

बुंदेलखंड में पानी लाने के लिए सरकार ने करीब 12000 करोड़ रुपए पानी की तरह बहाया.

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क्यों सूख गए चंदेलकालीन तालाब, बांदा के इस गांव ने जल संरक्षण को लेकर पेश की मिसाल

बुंदेलखंड में सूखे पड़े तालाब की फाइल फोटो

नई दिल्ली: सरकार की नाकामी से जहां बुंदेलखंड के प्राचीन चंदेलकालीन हजारों तालाब सूखे पड़े हैं वहीं इसी बुंदेलखंड के एक गांव में बिना सरकारी मदद से जलस्तर लगातार ऊपर आ रहा. एनडीटीवी ने इन इलाकों में घटते जल स्तर का जायजा लिया. 
बुंदेलखंड के सूखे ने चंदेलकालीन इस तालाब के सीने को छलनी कर दिया है.उर्मिल नदी का पानी न मिलने से तालाब की जमीन पत्थर जैसी सख्त हो गई है.सदियों से तालाब के भरोसे खेती और मछली पालने वाले किसानों की जिंदगी भी इन सीपियों की तरह बेजान हो रही है.तालाब में पानी ही नहीं होगा तो मछली और खेती कैसे होगी.कई महीना पहले ये तालाब सूख चुका है.जलस्तर नीचे पहुंच गया है और खेत सूख चुके हैं.महोबा के निवासी निर्दोष दीक्षित बताते हैं कि छठी शताब्दी में चंदेल राजाओं ने इस तरह के करीब 11हजार तालाब बुंदेलखंड की प्यास बुझाने के लिए बनवाए.लेकिन अब इन तालाबों की जमीन जब इतनी सख्त हो गई है तो खेतों का हाल समझा जा सकता है.

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इन प्राचीन तालाबों को कैसे खत्म किया जा रहा है ये समझने के लिए हमनें छतरपुर के एतिहासिक महेबा कस्बे की ओर रुख किया. 1676 में महाराजा छत्रसाल ने धुबेला तालाब को बनवाया था.लेकिन इस तालाब को सुखाने में मप्र सरकार के इस नहर का अहम योगदान है.कागजों में सिंचाई का रकबा बढ़ाने के लिए इस तालाब से एक नहर खेतों तक निकाल दी गई.नतीजा कागजों में सिंचाई का रकबा तो बढ़ा लेकिन तालाब में चलने वाली ये दर्जनों नावें जमीन पर औंधे मुंह उलट गईं.छतरपुर के महेबा के निवासी शैलेंद्र कौशिक बताते हैं कि जब से सरकार ने नहर बनाई सदियों पुराने इस तालाब मे पानी का अकाल पड़ गया.अब न तो खेत तक पानी पहुंच रहा है और न ही आदमी और पशुओं को इस तालाब से पानी मिल रहा है. बुंदेलखंड में पानी लाने के लिए सरकार ने करीब 12000 करोड़ रुपए पानी की तरह बहाया.केंद्र सरकार ने सूखे से निपटने के लिए मप्र और उप्र के 13 जिलों को बुंदेलखंड पैकेज दिया इसके तहत करीब 7200 करोड़ उप्र और मप्र सरकारों को मिले हैं. इससे मप्र और उप्र में 40000 कुएं, 30000 तालाब और 2.60 लाख हेक्टेयर जमीन पर पौधारोपड़ और 11 लाख हेक्टेयर जमीन को सिंचित करने का दावा किया गया.
 
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बिना सरकारी मदद के कैसे बुंदेलखंड के जखनी गांव का जलस्तर बढ़ा.बिना सरकारी मदद के बांदा के जखनी गांव के कुंए में छह फीट पर पानी भरा है.गांववालों के अपने प्रयास से जखनी का जलस्तर लगातार ऊपर आ रहा है. इतना पैसा खर्च करने के बावजूद जहां तालाबों की जमीन फट रही है.खेत सूखे पड़े हैं.वहीं बुदेलखंड के ही बांदा जिले के छोटे से गांव जखनी में पानी के उत्सव में देवरिया लोकनृत्य हो रहा है.सरकार भले करोड़ों खर्च करके तालाब में पानी नहीं ला पाई लेकिन जखनी गांव के तालाब में हम नौकाविहार कर रहे हैं.ये तालाब देख रहे है एक पैसा सौंदर्यीकरण के नाम पर हम लोगों ने सरकार को खर्च नहीं करने दिया. जहां बुंदेलखंड में 0.20 मीटर पानी हर साल नीचे जा रहा हो वहीं इस गांव का जलस्तर ऊपर आ रहा है.हैरानी की बात ये है कि बुंदेलखंड पैकेज का यहां एक भी सरकारी पैसा नहीं खर्च हुआ.जखनी गांव के स्थानीय निवासी और सामाजिक कार्यकर्ता उमाशंकर पांडेय बताते हैं कि गांव के दस तालाबों में सौंदर्यीकरण के नाम पर सीमेंट का पक्का काम करवाने के हम लोग खिलाफ है.

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कंक्रीट का काम होने से पानी रुकेगा नहीं.यही वजह है कि हमने सरकार से आज तक फूटी कौड़ी भी नहीं ली.हमारे लिए ये पहेली थी कि जब बुंदेलखंड बूंद बूंद को तरस रहा हो तब बांदा के जखनी गांव के तालाब पानी से लबालब कैसे हैं .गांव वाले बारिश की एक बूंद को गांव और खेत से बाहर नहीं जाने देते हैं.इस गांव की नालियां एक दूसरे से जुड़ी हैं.गांव का जितना भी गंदा पानी है..वो इस तरह सब्जी के खेतों तक पहुंचता है.गांव के ही घरेलू इस्तेमाल के इस पानी से उर्मिला देवी कई सब्जियां उगा रही है.जखनी गांव के बाहर के खेतों में ऊंची ऊंची मेड़ बना दी गई है जिससे बारिश का पानी ज्यादा से ज्यादा खेतों में रुके.यही नहीं इस गांव में 10 तालाब है और किसी भी तालाब में सीमेंट या कंक्रीट का इस्तेमाल नहीं है.गांववालों ने ढलान इस तरह दी है कि बारिश का सारा पानी यहां इकट्ठा हो.इसी के चलते गांव के तालाब पानी से लबालब है.

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जखनी गांव के किसान अली मोहम्मद बताते हैं कि कई साल से वो पानी बचाने की मुहिम में लगे हैं.प्रयास रंग लाया है. पुराने तरीके से पानी बचाने वाले इस गांव की तर्ज पर भारत सरकार ने देश भर के 1100 गांवों को जलग्राम बनाने के लिए चुना है.इस गांव ने दिखाया है कि जल संरक्षण की जागरुकता से पानी लाया जा सकता है.
 


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