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समाजवादी पार्टी का रुख सख्‍त, क्‍या शिवपाल यादव पार्टी से बाहर होंगे?

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समाजवादी पार्टी का रुख सख्‍त, क्‍या शिवपाल यादव पार्टी से बाहर होंगे?

सपा की राज्‍य कार्यकारिणी की मीटिंग में शिवपाल यादव का नाम लिए बिना उनके खिलाफ प्रस्ताव पास हुआ. (फाइल फोटो)

खास बातें

  1. शिवपाल के खिलाफ पार्टी की राज्‍य कार्यकारिणी की बैठक में प्रस्ताव पास हुआ
  2. इस बैठक में भीतरघातियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई
  3. शिवपाल ने इटावा में कहा था की वो 11 मार्च के बाद अलग पार्टी बना लेंगे
लखनऊ: क्या शिवपाल यादव समाजवादी पार्टी से निकले जाएंगे? क्या पार्टी पर हावी अखिलेश गुट उन्हें निकालने की भूमिका बना रहा है? यह सवाल तब उठे जब लखनऊ में आज अखिलेश यादव की मौजूदगी में पार्टी की राज्‍य कार्यकारिणी की मीटिंग में शिवपाल यादव का नाम लिए बिना 'अलग पार्टी बनाने का ऐलान करने वालों' के खिलाफ प्रस्ताव पास हुआ और भीतरघातियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई.

शिवपाल यादव ने ही बीती 31 जनवरी को इटावा में कहा था की वो 11 मार्च के बाद अलग पार्टी बना लेंगे. अखिलेश के एक क़रीबी नेता ने पिछले दिनों एनडीटीवी से कहा था कि अखिलेश के सामने शिवपाल को निकालने के अलावा कोई चारा नहीं है, क्योंकि उनके ऊपर बीजेपी का हाथ है.

लखनऊ में समाजवादी पार्टी के दफ़्तर में आज राज्‍य कार्यकारिणी की बैठक इस नतीजे पर पहुंची कि पार्टी की हार में पार्टी के बड़े नेताओं का रोल है, जिन्‍होंने पार्टी के उम्मीदवारों का विरोध किया. ईवीएम की गड़बड़ी भी इसकी कुछ हद तक ज़िम्मेदार है.

इस मीटिंग में पार्टी के नेता राजपाल सिंह एडवोकेट का प्रस्ताव पास हुआ, जिसमें कहा गया कि 'कुछ वरिष्ठ नेताओं द्वारा अलग पार्टी बनाए जाने जैसी बातों से अनुशासनहीनता फैलाने की कोशिशें की जा रही हैं, उससे पार्टी की छवि को धक्का लगा.' बैठक में भीतरघातियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की गई. यह भी कहा गया कि ईवीएम की जांच कराई जाए और आगे से बैलेट पेपर का इस्‍तेमाल हो.

विधानसभा चुनावों में इतनी बड़ी हार के बाद भी यादव परिवार का झगड़ा खत्‍म कम होने की बजाय बढ़ रहा है. हाल की घटनाओें से इस बात के चर्चे भी चलें हैं कि मुलायम के बिना शिवपाल, बेटे-बहू प्रतीक और अपर्णा अपनी कोई और सियासी राह चुनेंगे?

7 मार्च को मुलायम की दूसरी पत्‍नी साधना यादव ने न्‍यूज एजेंसी एएनआई को बुलाकर इंटरव्‍यू दिया, जिसमें अखिलेश पर निशाना साधा और प्रतीक को राजनीति में लाने की ख्‍वाहिश जताई.

11 मार्च को चुनाव नतीजों के दिन शिवपाल ने पार्टी की हार पर कहा कि ये घमंड की हार है.

24 मार्च को मुलायम के छोटे बेटे प्रतीक और अपर्णा नए सीएम योगी आदित्‍यनाथ से मिलने गए.

31 मार्च को योगी आदित्‍यनाथ प्रतीक और अपर्णा की गौशालामें पहुंचे.

1 अप्रैल को मुलायम ने मैनपुरी में अखिलेश के लिए कहा कि 'जो अपने बाप को नहीं हुआ वो आपका क्‍या होगा?' और 5 अप्रैल को शिवपाल यादव योगी आदित्‍यनाथ से मिलने गए.


चर्चा है कि परिवार में चल रहे न खत्‍म होने वाले झगड़े के बीच शिवपाल अपने और अपने बेटे आदित्‍य के लिए कुछ नई सियासी संभावनाएं तलाश कर रहे हैं और प्रतीक व अपर्णा भी इसी खोज में हैं, क्‍योंकि तीनों को लगता है कि मुलायम के जीते-जी ही जब अखिलेश से उनके ये रिश्‍ते हैं तो उनके न रहने के बाद क्‍या होगा?


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