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उत्तर प्रदेश के प्राइवेट विश्वविद्यालयों पर योगी सरकार की 'नकेल', जारी किया नया अध्यादेश 

उत्तर प्रदेश में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath) ने नए अध्यादेश के ड्राफ्ट को मंजूरी दी है.

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खास बातें

  1. निजी विश्वविद्यालयों के लिए नया अध्यादेश
  2. यूपी में कुल 27 निजी विश्वविद्यालय हैं
  3. कैंपस में राष्ट्रविरोधी गतिविधियों पर रोक़
नई दिल्ली:

उत्तर प्रदेश में प्राइवेट यूनिवर्सिटीज़ के लिए योगी आदित्यनाथ सरकार (Yogi Adityanath) ने नए अध्यादेश के ड्राफ्ट को मंजूरी दी है. उत्तर प्रदेश प्राइवेट यूनिवर्सिटीड ऑर्डिनेंस 2019 के मुताबिक अब प्राइवेट यूनिवर्सिटीज को एक शपथ पत्र देना होगा कि यूनिवर्सिटी किसी भी तरह की राष्ट्रविरोधी गतिविधि में शामिल नहीं होगी और न ही कैंपस में इस तरह की गतिविधियां होने दी जाएंगी. अगर ऐसा हुआ तो यह कानून का उल्लंघन माना जाएगा और सरकार यूनिवर्सिटी के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है. इस नए अध्यादेश के तहत यूपी के सभी 27 प्राइवेट यूनिवर्सिटी एक कानून के अंदर आ जाएंगी. हालांकि यूपी सरकार के अध्यादेश में राष्ट्रविरोधी गतिविधि की परिभाषा नहीं बताई गई है.

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यह अध्यादेश मंगलवार को योगी मंत्रिमंडल द्वारा पारित किया गया. अध्यादेश अब विधानसभा सत्र में रखा जाएगा. मामले में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है कि विश्वविद्यालयों में सिर्फ शिक्षा दी जाए न कि वहां राष्ट्र विरोध गतिविधियां पनपें.

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डिप्टी सीएम केशव मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश ही नहीं देश के किसी भी विश्वविद्यालय हो या शैक्षिक संस्थान में राष्ट्रविरोधी गतिविधि हो उसे कोई स्वीकार नहीं करेगा. उत्तर प्रदेश सरकार ने इस दिशा में निर्णय लिया है कि शिक्षा के मंदिर में सिर्फ शिक्षा का ही काम होना चाहिए. वहां किसी ऐसी गतिविधि को ऐसी छूट नहीं दी जा सकती है जो देश के हित में नहीं हो.

बता दें कि इस अध्यादेश का उद्देश्य 'इन विश्वविद्यालयों के कामकाज और शैक्षणिक स्तर में सुधार' लाना है. विश्वविद्यालयों को 50 प्रतिशत शुल्क पर गरीब समुदायों के विशिष्ट छात्रों के लिए प्रवेश सुनिश्चित करना होगा और 75 प्रतिशत संकायों को स्थायी कर्मचारियों के रूप में रखना होगा. विसंगतियों के मामलों में, राज्य की उच्च शिक्षा परिषद को अब इस मामले की जांच करने का अधिकार दिया जाएगा. ये प्रावधान राज्य सरकार को निजी विश्वविद्यालयों की वित्तीय और अकादमिक गतिविधियों पर नजर रखने के लिए और अधिक शक्ति देंगे. इसे निजी विश्वविद्यालयों के कामकाज को नियमित करने और उन्हें सरकारी दायरे में लाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है.

अध्यादेश में यह भी कहा गया है कि 'विश्वविद्यालयों को राज्य सरकार की पूर्वानुमति के बिना मानद उपाधि देने की अनुमति नहीं' दी जाएगी. कुलपति की नियुक्ति कुलाधिपति द्वारा शासी निकाय के परामर्श के बाद ही की जा सकती है. अध्यादेश के अनुसार, 'अध्यादेश में यह प्रस्ताव किया गया है कि विश्वविद्यालय के लिए जमीन बेची नहीं जा सकती व हस्तांतरित या पट्टे पर नहीं दी जा सकती, हालांकि इसे विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए किसी बैंक या वित्तीय संस्थान को गिरवी रखा जा सकता है.' 

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अध्यादेश के अनुसार, राज्य उच्च शिक्षा परिषद अब नोडल एजेंसी होगी, जो अध्यादेश और नियमों के अनुपालन की देखरेख करेगी. यह परिषद को कार्रवाई के लिए सरकार के साथ रिपोर्ट दर्ज करने का अधिकार देती है, अगर वह किसी निजी विश्वविद्यालय से समय की निश्चित अवधि के भीतर जानकारी प्राप्त करने में असमर्थ है. अध्यादेश के अनुसार, परिषद वर्ष में कम से कम एक बार एक विश्वविद्यालय का निरीक्षण करेगी, ताकि शिक्षा की गुणवत्ता और नियमों के अनुपालन की निगरानी की जा सके और इसके कामकाज पर एक वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की जा सके. यदि कोई उल्लंघन सामने आता है, तो राज्य सरकार उचित निर्देश जारी करेगी, जिसका पालन करना विश्वविद्यालय के लिए अनिवार्य होगा.

(इनपुट: IANS)



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