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योगी सरकार ने कानून व्यवस्था को लेकर उठाया बड़ा कदम, 90 से ज्यादा बाहुबलियों की जेल बदली

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योगी सरकार ने कानून व्यवस्था को लेकर उठाया बड़ा कदम, 90 से ज्यादा बाहुबलियों की जेल बदली

मुख्यमंत्री ने 30 मार्च को कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हुए अधिकारियों को कार्रवाई के लिए कहा.

लखनऊ:

उत्तर प्रदेश के 90 से अधिक ‘बाहुबलियों’ को उनके गृह जनपदों से दूर की जेलों में स्थानांतरित कर दिया गया. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार के स्थानीय अपराध नेटवर्क को ध्वस्त करने के प्रयास के तहत यह कदम उठाया गया है. स्थानांतरित किए गए बाहुबलियों में मुख्तार अंसारी, मुन्ना बजरंगी, अतीक अहमद, शेखर तिवारी, मौलाना अनवारूल हक, मुकीम उर्फ काला, उदयभान सिंह उर्फ डॉक्टर, टीटू उर्फ किरनपाल, राकी उर्फ काकी और आलम सिंह शामिल हैं.

अपर पुलिस महानिदेशक (कारागार) जीएल मीणा ने कहा, "डॉन सलाखों के पीछे हैं. हालांकि उनके गिरोह के लोग हत्या, अपहरण, डकैती और रंगदारी आसानी से अंजाम देते हैं और आतंक फैलाते हैं." उन्होंने बताया कि 90 से अधिक जेल अंत:वासियों को एक जेल से दूसरी जेल स्थानांतरित किया गया है. जो लोग आगरा, वाराणसी और बरेली के मानसिक अस्पतालों में भर्ती हैं, उन्हें चिन्हित किया जा रहा है. जेल प्रशासन ने शनिवार को वाराणसी, आगरा और बरेली के मानसिक अस्पतालों को पत्र भेजकर निर्देश दिया है कि विचाराधीन कैदियों की स्वास्थ्य की स्थिति पर रिपोर्ट भेजें. मीणा ने बताया कि विभिन्न मानसिक अस्पतालों में दाखिल 18 जेल अंत:वासियों की पहचान की जा चुकी है. उनके खिलाफ गिरफ्तारी का वारंट देने की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है.

उन्होंने कहा, "मैंने उन अस्पतालों के चिकित्सा अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी है, जहां विचाराधीन कैदी भर्ती हैं. अधिकांश कुख्यात अपराधी हैं. पकड़े जाने के डर से अब डाक्टरों ने ऐसे विचाराधीन कैदियों को अस्पताल से छुट्टी देना शुरू कर दिया है." जेल प्रशासन को सूचना मिली है कि गिरोह के सदस्य जेल में मिलने आते हैं और वहीं से आपराधिक वारदात की योजना बनती है. औचक छापे के दौरान अपराधियों की बैरकों से मोबाइल फोन और सिम कार्ड बरामद किए गए हैं. व्यवसायी, ठेकेदार और सरकारी अधिकारियों तथा बात नहीं मानने वालों को जेल से किसी बाहुबली का फोन ही धमकाने के लिए काफी होता है. मीणा ने कहा कि अंत: वासियों को एक जेल से दूसरी जेल स्थानांतरित करने की वजह उनका नेटवर्क तोड़ना है जहां वह लंबे समय से उस क्षेत्र की जेल में हैं.


मुख्यमंत्री ने 30 मार्च को कानून व्यवस्था की समीक्षा करते हुए पुलिस एवं कारागार अधिकारियों को कार्रवाई के लिए कहा. मुख्तार अंसारी को लखनऊ से बांदा जेल भेजा गया. अतीक अहमद को नैनी से देवरिया भेजा गया. मुन्ना बजरंगी को झांसी से पीलीभीत और शेखर तिवारी को बाराबंकी से महाराजगंज जेल भेजा गया. स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) और आतंकवाद रोधी स्क्वायड (एटीएस) ने जेल में बंद माफिया डॉन की गतिविधियों की निगरानी करने के बाद इसकी सूचना जेल प्रशासन को दी.

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने गैंगस्टर से नेता बने मुख्तार अंसारी के क्षेत्र मउ की चुनावी रैली में 27 फरवरी को कहा था कि उत्तर प्रदेश की जेलें अपराधियों के लिए महल बन गयी हैं, जहां उन्हें हर तरह की सुविधा मिलती है. मोदी ने कहा कि गैंगस्टरों को मुस्कुराते हुए और फोटो सेशन कराते देखा जा सकता है. प्रतापगढ जिले के पुलिस उपाधीक्षक जिया उल हक की हत्या के आरोपी गुलशन यादव को इलाहाबाद के एसआरएन अस्पताल में दाखिल कराया गया. उसकी मेडिकल रिपोर्ट कहती है कि उसे पीठ दर्द की शिकायत है. राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के करोड़ों रुपये के घोटाले का आरोपी बाबू सिंह कुशवाहा यहां राम मनोहर लोहिया अस्पताल में भर्ती है.

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जांच के दौरान जेल प्रशासन ने पाया कि कई विचाराधीन कैदियों ने मेडिकल प्रमाणपत्र बनवाने में अपने प्रभाव का इस्तेमाल किया और उनके मेडिकल प्रमाणपत्र में कहा गया कि वे किसी मानसिक बीमारी से ग्रस्त हैं. राज्य के गृह विभाग ने भी जिलाधिकारियों और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिया है कि वे जेलों में बंद विचाराधीन कैदियों द्वारा मोबाइल फोन के इस्तेमाल की जांच करें.

(हेडलाइन के अलावा, इस खबर को एनडीटीवी टीम ने संपादित नहीं किया है, यह सिंडीकेट फीड से सीधे प्रकाशित की गई है।)



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