पुलिस सम्मान से दफनाए गए घोड़े 'शक्तिमान' की प्रतिमा पहले लगाई गई, अब हटाई गई

पुलिस सम्मान से दफनाए गए घोड़े 'शक्तिमान' की प्रतिमा पहले लगाई गई, अब हटाई गई

खास बातें

  • शक्तिमान की मूर्ति विधानसभा चौराहे पर लगी थी, लेकिन अब हटा दिया गया है
  • शक्तिमान को नकली पैर लगाया गया था, लेकिन अप्रैल में उसकी मौत हो गई थी
  • सीएम ने कहा, "मैं मूर्ति लगाने का फैसला अगली सरकार पर छोड़ता हूं..."
देहरादून:

कथित रूप से एक बीजेपी विधायक द्वारा पीटे जाने की वजह से पिछली टांग टूट जाने के कुछ समय बाद जब कुछ महीने पहले शक्तिमान नामक घोड़े की मौत हुई थी, देश के कोने-कोने से शोकसंदेशों के साथ-साथ गुस्सा भी व्यक्त किया गया था। 14 वर्ष का शक्तिमान पुलिस का घोड़ा रहा था, और अप्रैल में उसकी मौत हो जाने के बाद शनिवार को देहरादून के बीचोंबीच एक प्रमुख चौराहे पर श्रद्धांजलिस्वरूप उसकी प्रतिमा लगाई गई, लेकिन मंगलवार सुबह लाल काठी में सजे सफेद रंग के घोड़े की इस प्रतिमा को हटा लिया गया।

बताया जा रहा है कि सरकार ने बीजेपी और आम लोगों के दबाव में यह फैसला लिया है। कुछ स्थानीय लोगों के मुताबिक उत्तराखंड पुलिस के कई जवान अलग-अलग मौकों पर शहीद हुए, लेकिन कभी किसी की मूर्ति नहीं लगाई गई। इसके अलावा बीजेपी भी मूर्ति के विरोध में थी। शक्तिमान की यह मूर्ति विधानसभा चौराहे पर लगाई गई थी, लेकिन अब इसे देहरादून पुलिस लाइन शिफ्ट कर दिया गया है।

जिन दिनों शक्तिमान का इलाज चल रहा था, उसे देखने के लिए पहुंचने वाले उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत ने अब कहा, "मैं यह फैसला अगली सरकार पर छोड़ता हूं कि यह प्रतिमा यहां लगनी चाहिए या नहीं..."

उत्तराखंड में कुछ ही महीनों में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। कुछ आलोचकों ने, जिनमें बीजेपी के लोग भी शामिल हैं, शक्तिमान की प्रतिमा लगाए जाने का इस आधार पर विरोध किया है कि देश के लिए जान गंवा देने वाले उत्तराखंड के जवानों को जब उचित सम्मान नहीं दिया जा सका है, तो एक घोड़े को लेकर इतना हो-हल्ला किसलिए मचाया जा रहा है।

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जिन दिनों शक्तिमान घायल था, बीजेपी ने कांग्रेस की रावत सरकार पर राजनैतिक लाभ उठाने के लिए इस घटना के राजनीतिकरण का आरोप लगाया था। इस मामले में शक्तिमान को घयाल करने के आरोपी बीजेपी विधायक गणेश जोशी को भी गिरफ्तार कर बाद में जमानत पर रिहा किया गया था।

शक्तिमान की घायल पिछली टांग काटने जाने के बाद उसे एक नकली पैर भी लगाया गया था, लेकिन वह बच नहीं सका था। उसे पुलिस सम्मान के साथ दफनाया गया था।