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गंगा सफाई की मांग को लेकर स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद 13 दिनों से अनशन पर

पर्यावरणविद् और एक्टिविस्ट स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ जीडी अग्रवाल पिछले 13 दिनों से गंगा की सफ़ाई को लेकर हरिद्वार में आमरण अनशन पर बैठे हैं.

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गंगा सफाई की मांग को लेकर स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद 13 दिनों से अनशन पर

स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ जीडी अग्रवाल पिछले 13 दिनों से गंगा की सफ़ाई को लेकर अनशन पर हैं.

नई दिल्ली: पर्यावरणविद् और एक्टिविस्ट स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ जीडी अग्रवाल पिछले 13 दिनों से गंगा की सफ़ाई को लेकर हरिद्वार में आमरण अनशन पर बैठे हैं. दो केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और उमा भारती पत्र लिखकर उन्हें मनाने की कोशिश कर चुके हैं. जिसके जवाब में उन्होंने हाथ से लिखे पत्र में लिखा है कि उन्होंने फ़रवरी में प्रधानमंत्री मोदी को गंगा की सफ़ाई के लिए पत्र लिखा था जिसका उन्हें कोई जवाब नहीं मिला. जिसके बाद उन्होंने आमरण अनशन पर जाने का निर्णय लिया है. आमरण अनशन की बात भी 13 जून को प्रधानमंत्री को लिखकर सूचित किया. उमा भारती स्वामी सानंद को अपना बड़ा भाई कहती रही हैं. इसलिए पत्र के अंत में स्वामी सानंद ने लिखा है कि “अगर जीवित रहा तो रक्षाबंधन में याद कर लेना”. स्वामी सानंद 2009 में भागीरथी पर डैम बनाने को रोकने के लिए पहले भी सफ़ल अनशन कर चुके हैं. स्वामी सानंद सन्यास लेने से पहले CPCB के पहले मेंबर सचिव रहने के अलावा पर्यावरण वैज्ञानिक के रूप में IIT कानपुर सहित विभिन्न संस्थानों में पढ़ा चुके हैं. 

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आपको बता दें कि स्वामी ज्ञान स्वरूप सानंद उर्फ जीडी अग्रवाल पहले भी गंगा की सफाई के मुद्दे पर आमरण अनशन पर बैठ चुके हैं. वर्ष 2012 में वह आमरण अनशन पर बैठे थे. बाद में सरकार की ओर से अपनी मांगों पर सहमति मिलने के बाद अनशन समाप्त कर दिया. इस अनशन के दौरान उनकी हालत बिगड़ गई थी और इसके उन्हें उत्तर प्रदेश के वाराणसी से दिल्ली लाया गया था. इंडियन इंस्टीट्यूट के पूर्व प्रोफेसर अग्रवाल गंगा की सफाई के लिए केंद्र सरकार द्वारा गठित नेशनल गंगा रीवर बेसिन ऑथोरिटी (एनजीआरबीए) के असंतोषजनक तथा अप्रभावी कामकाज से नाखुश थे. इसके अतिरिक्त वह गंगा पर बांध, बैराज, सुरंग बनाने के भी खिलाफ थे। उनका कहना था कि इससे नदी का प्राकृतिक प्रवाह एवं गुणवत्ता प्रभावित होगी। साथ ही गंगा से शहरी व औद्योगिक कचरों की सफाई करने वाली नियामक एजेंसियां भी विफल हो जाएंगी. 

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