करोड़ों खर्च कर संजीवनी बूटी की खोज करवाएगी उत्तराखंड सरकार

करोड़ों खर्च कर संजीवनी बूटी की खोज करवाएगी उत्तराखंड सरकार

प्रतीकात्मक चित्र

नई दिल्ली:

उत्तराखंड सरकार ने पौराणिक कथाओं में चर्चित कथित रूप से हिमालय की पहाड़ियों में मिलने संजीवनी बूटी की तलाश कराएगी। कांग्रेस पार्टी की हरीश रावत सरकार ने इसके लिए आयुष विभाग (आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी) की एक कमेटी बनाई है। यह कमेटी चमोली जिले के द्रोणागिरी रेंज में इसकी खोज करेगी।

उत्तराखंड सरकार इस पर 25 करोड़ रुपये खर्च करने जा रही है। हिमलाय क्षेत्र में वैसे तो कई तरह के जंगली पौधे उगते हैं जो चिकित्‍सीय गुणों से संपन्‍न होते हैं, हालांकि इस बात के बहुत कम सबूत हैं कि ये जड़ीबूटी कभी मौजूद भी थी क्‍योंकि सदियों से ऋषि मुनि और आधुनिक खोजकर्ता इसकी खोज में नाकाम रहे हैं।

उत्तराखंड के वैकल्पिक औषधि मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने बताया, 'हमें कोशिश करनी है और यह बेकार नहीं जाएगी। अगर हम दृढ़ निश्‍चय कर लें तो निश्चित रूप से हम इसे ढूंढ सकते हैं। मंत्री ने बताया, खोज का दायरा चीन की सीमा से लगे हिमालय के द्रोणागिरी रेंज में होगा जिसके एक पहाड़ का जिक्र रामायण में उस पहाड़ के रूप में है जहां यह चमत्‍कारिक औषधि पाई जाती थी।

मंत्री के अनुसार, केंद्र सरकार ने इस योजना में पैसे लगाने से इनकार कर दिया है लेकिन वैज्ञानिक इसपर अगस्‍त के महीने में काम शुरू करेंगे। इस प्रचीन बूटी में जीवन दायक गुण होते हैं, यह हिमालय के ऊंचे स्‍थानों पर पनपती है और अंधेरे में चमकती है। रामायण में इस संजीवनी बूटी का जिक्र मिलता जिसमें कहा गया है कि हनुमान ने हिमालय के एक पर्वत से इस बूटी के जरिये लक्ष्मण की जान बचाई थी।

उल्लेखनीय है कि योगगुरु रामदेव के करीबी आचार्य बालकृष्ण पहले ही मृत संजीवनी खोजने का दावा कर चुके हैं। बताया जा रहा है कि केंद्र सरकार के इनकार के बाद संजीवनी की खोज के लिए राज्य सरकार ने फंड जुटाया है।

Listen to the latest songs, only on JioSaavn.com

राज्य के आयुष मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी ने एक बयान में कहा, ''हम अपने खर्चे पर इसकी खोज करा रहे हैं। दुनियाभर में जड़ी-बूटियों का मार्केट तेजी से बढ़ रहा है। जानकारों का मानना है कि इसमें जीवन रक्षक गुण पाए जाते हैं।''

नेगी ने बताया कि इसके रिसर्च पैनल में आयुर्वेद के 4 जानकारों को शामिल किया गया है, जो अगस्त में काम शुरू करेंगे और इसके बाद रिपोर्ट सौंपेंगे। उन्होंने कहा कि हिमालय की पहाड़ियों में संजीवनी को खोजना आसान नहीं होगा।