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उत्तराखंड में यदि शिक्षिका सस्पेंड तो राजस्थान में मंत्री बर्खास्त क्यों नहीं?

नौकरशाही के काम नहीं करने से राजनेता भी त्रस्त हैं तो फिर एक बेबस टीचर द्वारा मुख्यमंत्री के दरबार में जाकर चिरौरी करने को कैसे गलत ठहराया जा सकता है?

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उत्तराखंड में यदि शिक्षिका सस्पेंड तो राजस्थान में मंत्री बर्खास्त क्यों नहीं?

सीएम रावत के जनता दरबार के दौरान हुई थी घटना.

उत्तराखंड में मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत के जनता दरबार में कथित अभद्रता किए जाने पर शिक्षिका उत्तरा पन्त की गिरफ्तारी और निलंबन से अनेक सवाल खड़े हो गए हैं? 

अफसरशाही से त्रस्त उत्तरा पन्त पर अनुशासनहीनता की कारवाई क्यों- उत्तरा पन्त पर ऊपर आरोप है कि बगैर अनुमति के मुख्यमंत्री से मिलने से सर्विस रूल का उल्लंघन हुआ है. नौकरशाही के काम नहीं करने से राजनेता भी त्रस्त हैं तो फिर एक बेबस टीचर द्वारा मुख्यमंत्री के दरबार में जाकर चिरौरी करने को कैसे गलत ठहराया जा सकता है? झारखंड के मुख्यमंत्री रघुबर दास ने हालिया बयान में कहा कि चारधाम करने पर लोगों को मोक्ष मिल जाता है परंतु अफसरशाही में आठ धाम की यात्रा के बावजूद फाइलों को मोक्ष नहीं मिलता. अफसरशाही से त्रस्त हरियाणा सरकार ने लिखित आदेश जारी करके कहा है कि सांसद और विधायकों को सरकारी अफसरों द्वारा विशेष सम्मान दिया जाय. काम न होने पर केंद्र और राज्य सरकारों के अनेक मंत्रियों ने अफसरों के साथ अनेक बार गाली गलौज और मारपीट किया तो फिर उत्तरा पन्त पर ही अनुशासनहीनता की कारवाई क्यों हो रही है?  

राजस्थान में शिक्षकों के तबादलों पर मंत्रियों में हाथापाई- राजस्थान में भाजपा सरकार के दो मंत्रियों के बीच शिक्षकों के तबादलों को लेकर हाथापाई की नौबत आ गई. सीकर जिले के खंडेला विधानसभा क्षेत्र में तबादलों पर सिफारिश न माने जाने पर नाराज़ चिकित्सा राज्य मंत्री बंशीधर बाजिया शिक्षा राज्य मंत्री वासुदेव देवनानी के आवास पर पहुंच कर गालीगलौज करने लगे. सोशल मीडिया पर वायरल मैसेज के अनुसार बाजिया ने देवनानी को थप्पड़ मार दिया. वासुदेव देवनानी ने कहा है कि बाजिया की सिफारिश पर 160 तबादले पहले ही कर दिए गए परन्तु 20 तबादले नहीं होने पर बाजिया ने आपत्ति जाहिर की. लेकिन थप्पड़ मारने जैसी कोई घटना नहीं हुई. 

उत्तरा पन्त गिरफ्तार तो फिर मंत्री भी गिरफ्तार हों- मुख्यमंत्री के साथ असम्मान तथा अभद्रता करने के आरोप में पुलिस ने धारा 151 के तहत शिक्षिका को गिरफ्तार कर लिया, परन्तु मीडिया में मामला उछलने पर शाम को उत्तरा पन्त की रिहाई हो गयी. महिला शिक्षिका को सिर्फ अभद्रता के आधार पर यदि गिरफ्तार किया गया तो फिर वसुंधरा राजे सरकार के दोनों मंत्रियों को भी आईपीसी, भ्रष्टाचार और सरकारी काम में बाधा डालने के आरोप में क्यों नहीं गिरफ्तार किया जाता? इस बात की जांच होनी चाहिए कि क्या राजस्थान में शिक्षकों के थोक तबादलों के लिए मंत्रियों ने रकम ली थी?  

मुख्यमंत्री की पत्नी नियमों से परे क्यों- देश में संविधान का शासन होने के साथ राजशाही भी ख़त्म हो गयी है, उसके बावजूद किस क़ानून के तहत मुख्यमंत्रियों द्वारा ऐसे जनता दरबार लगाए जाते हैं? जनता दरबार में सामंती तरीके से मुख्यमंत्री द्वारा आदेशों को अफसर किस क़ानून के तहत लागू करते हैं? नेशनल मीडिया में मामला आने पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने कहा कि शिक्षिका के आवेदन पर सहानुभूति पूर्ण रवैया अख्तियार कर नियमानुसार समुचित कार्यवाही की जाये. सरकारी अधिकारियों का इस बारे में कहना है कि उत्तरा पन्त की अर्जी वेटिंग लिस्ट-59 पर है और नंबर आने पर उनका ट्रांसफर हो जाएगा. आरटीआई में मिली जानकारी और समाचारों के अनुसार मुख्यमंत्री की पत्नी सुनीता रावत ने 1992 में सरकारी स्कूल में शिक्षिका की नौकरी की शुरुवात किया. नौकरी के 4 साल के भीतर उन्हें देहरादून में पोस्टिंग मिल गयी. वर्ष 2008 में उनका प्रमोशन हो गया, उसके बावजूद 22 वर्षों से उनका ट्रांसफर देहरादून से बाहर नहीं हुआ. ट्रान्सफर नीति सिर्फ कमजोर लोगों के लिए होती है, क्योंकि केंद्रीय विद्यालयों शिक्षिकाओं के तौर पर कार्यरत बड़े अफसरों और नेताओं की पत्नियों और परिवारजनों की पूरी नौकरी महानगरों में गुजर जाती है. संविधान के अनुच्छेद 14 के तहत सभी लोग बराबर हैं तो फिर उत्तरा पन्त के लिए बताये जा रहे नियमों को मुख्यमंत्री की पत्नी पर भी क्यों नहीं लागू किया जाता? 

इलाहाबाद हाईकोर्ट का महिला शिक्षकों के ट्रान्सफर के लिए विशेष आदेश-  इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सितंबर 2017 के एक आदेश में कहा था कि विशेष परिस्थितियों में महिला शिक्षिकाओं का अपने पति के गृह जिले में ट्रांसफर किया जा सकता है. महिला शिक्षिका उत्तरा पन्त के पति का 2015 में निधन हो गया और वे पिछले 25 वर्षों से दूरस्थ इलाकों में पोस्टेड हैं. महिला ने मुख्यमंत्री से कहा कि उन्होंने टीचर की नौकरी की है लेकिन वनवास पर अपने हस्ताक्षर नहीं किए तो फिर उन्हें बच्चों के साथ रहकर शिक्षिका धर्म के निर्वहन का अवसर क्यों नहीं मिलता? 

देवभूमि में महिला शिक्षिका का अपमान भारतीय संस्कृति के विरुद्ध- देश में हज़ारों विधायक और सांसद आपराधिक मामलों से जूझ रहे हैं, फिर भी उन्हें सम्मान देने के लिए राजकीय निर्देश जारी किये गए हैं. दूसरी और एक महिला शिक्षिका को धक्का देकर मुख्यमंत्री के दरबार से निकाल दिया जाता है. इतिहास में दर्ज घटनाओं के अनुसार राजा नंद के दरबार में जब चाणक्य का अपमान हुआ तो उन्होंने नंद वंश के विनाश का संकल्प लिया. देव भूमि में महिला शिक्षिका के साथ सामंती बर्ताव, संविधान के विरुद्ध होने के साथ लोकतंत्र और भारतीय संस्कृति को भी शर्मसार करता है. दरबार लगाने वाले मुख्यमंत्री रावत, महिला शिक्षिका के साथ न्याय करके गुरु के सम्मान के साथ शंकराचार्य की देव भूमि के गौरव को अभी भी बहाल कर सकते हैं. 

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विराग गुप्ता सुप्रीम कोर्ट अधिवक्ता और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ हैं...

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